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कानपुर में लोग बोले- बारिश नहीं, लापरवाही ने छीनी छत:12 मकान गिरे, 60 घरों में घुसा पानी; कहा- समय पर नाले की सफाई नहीं हुई

कानपुर में लोग बोले- बारिश नहीं, लापरवाही ने छीनी छत:12 मकान गिरे, 60 घरों में घुसा पानी; कहा- समय पर नाले की सफाई नहीं हुई

कानपुर में मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई। नाला चोक होने से बारिश का पानी बस्ती में घुस गया। इससे 12 मकान धराशायी हो गए। 60 से ज्यादा घरों में पानी भर गया। इस दौरान 12 लोग फंस गए थे, जिन्हें फायरकर्मियों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। बुधवार सुबह जब भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो हर तरफ मलबा, कीचड़ और बिखरा घरेलू सामान दिखाई दिया। कोई भीगे कपड़े सुखा रहा था, कोई टूटे घर से बचा-खुचा सामान निकाल रहा था। लोगों का कहना था कि अगर नगर निगम ने समय रहते नाले की सफाई कराई होती तो इतनी बड़ी तबाही नहीं होती। हादसे के 24 घंटे बाद भी किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। इस आपदा से करीब 460 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें 110 महिलाएं, 150 पुरुष और 200 बच्चे शामिल हैं। नाले के किनारे की मिट्टी लगातार खिसक रही है, जिससे पांच और मकानों पर गिरने का खतरा बना हुआ है। कई परिवार पलायन को मजबूर हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट..... जनप्रतिनिधि आए, लेकिन राहत अब तक नहीं मिली नई बस्ती रैदास विहार के रहने वाले नदीम, मुकेश, अमन और अताउल्लाह ने बताया कि हादसे के बाद जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन अब तक किसी भी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता नहीं मिली है। जलभराव के कारण पांच और मकानों पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है। नाले के किनारे की मिट्टी लगातार कट रही है, जिससे मकानों में दरारें पड़ने लगी हैं। लोगों का कहना है कि अगर नगर निगम ने समय रहते नाले की सफाई करा दी होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। हादसे के बाद हरकत में आया नगर निगम बुधवार सुबह नगर निगम की 10 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची और नाले की सफाई के साथ मलबा हटाने का काम शुरू किया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई हादसे के बाद हुई। यदि पहले ही नाले की सफाई कर दी जाती तो बस्ती को इतनी बड़ी तबाही का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों का आरोप है कि नाले पर कबाड़ियों ने कब्जा कर रखा है, जिससे पानी की निकासी नहीं हो पाती। हर बारिश में आसपास की हासमी लाइन और छीलन बस्ती भी जलभराव की चपेट में आ जाती है। ऐसे में इन इलाकों के लोगों में भी डर का माहौल है। पांच मकानों पर अब भी खतरा बरकरार नाले के किनारे की मिट्टी लगातार धंसने से बुच्चू, नदीम, रहमान, लाला और राजेश के मकानों का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए परिवारों ने अपना सामान बाहर निकाल लिया है। स्थानीय लोगों ने एहतियात के तौर पर रस्सियां बांधकर खतरे वाले हिस्से को घेर दिया है। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो ये मकान कभी भी नाले में समा सकते हैं। राहत के लिए समाजसेवी बने सहारा क्षेत्रवासियों का कहना है कि हादसे की रात प्रशासन की ओर से तत्काल कोई राहत नहीं पहुंची। ऐसे में समाजसेवी नावेद आलम और यासीन ने आगे आकर पीड़ित परिवारों के लिए टेंट और तख्त की व्यवस्था कराई। महिलाओं और बच्चों ने पूरी रात टेंट में गुजारी, जबकि पुरुष घरों और सामान की रखवाली करते रहे। कई परिवारों को सड़क किनारे रात बितानी पड़ी। पीड़ित शाहिद ने बताया कि घर से सामान निकालने की अफरा-तफरी के दौरान उनकी पत्नी की पायल और टॉप्स चोरी हो गए। वहीं उनकी मां के 25 हजार रुपए तेज बहाव में बह गए। इसके अलावा मोहल्ले के दो अन्य घरों से भी सामान चोरी होने की बात सामने आई है। आपदा के बीच चोरी की घटनाओं ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। 20 से 25 परिवार छोड़ चुके हैं बस्ती स्थानीय निवासी विकास जायसवाल ने बताया कि यह बस्ती करीब 40 साल पुरानी है, लेकिन उन्होंने पहले कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। भारी नुकसान के बाद 20 से 25 परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से पीड़ितों को मुआवजा देने और सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की। पीड़िता तनीषा ने बताया कि बारिश का पानी घर में घुसने से उनका पूरा सामान खराब हो गया। मंगलवार रात से ही वह घर से पानी निकालने में लगी हैं। तीन छोटे बच्चों के साथ उन्हें पूरी रात सड़क पर गुजारनी पड़ी। बिजली गुल, पानी की भी किल्लत सुनीता ने बताया कि हादसे के बाद एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। घरों में कपड़े और जरूरी सामान मलबे में दबे हैं। पीने और नहाने के पानी तक की समस्या खड़ी हो गई है। छोटे-छोटे बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं। हनीफ ने अपने टूटे मकान की ओर इशारा करते हुए कहा कि मंगलवार दोपहर तक यहीं मेरा घर था, आज सिर्फ मलबा बचा है। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान उनकी पत्नी और तीन बच्चे घर में थे। समय रहते सभी को बाहर निकाल लिया गया, जिससे उनकी जान बच गई। हादसे में सभी को मामूली चोटें आईं और निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। ऑपरेशन के आठ दिन बाद बेटे को गोद में उठाकर बचाया विमला देवी ने बताया कि उनके बेटे का आठ दिन पहले ऑपरेशन हुआ था और उसके टांके भी नहीं कटे थे। अचानक पानी भरने लगा तो पड़ोसियों ने उसे गोद में उठाकर सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान उनकी बहू भी पानी की चपेट में आ गई, जिससे उसके शरीर पर कई जगह चोटें आईं। परिवार का राशन, कपड़े और घरेलू सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया।

- Hindi News - Local - Uttar pradesh - Kanpur - Kanpur Rain Havoc | Houses Collapse As Drains Clog; Residents Face Plight कानपुर में लोग बोले- बारिश नहीं, लापरवाही ने छीनी छत:12 मकान गिरे, 60 घरों में घुसा पानी; कहा- समय पर नाले की सफाई नहीं हुई - कॉपी लिंक कानपुर में मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई। नाला चोक होने से बारिश का पानी बस्ती में घुस गया। इससे 12 मकान धराशायी हो गए। 60 से ज्यादा घरों में पानी भर गया। इस दौरान 12 लोग फंस गए थे, जिन्हें फायरकर्मियों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। बुधवार सुबह जब भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो हर तरफ मलबा, कीचड़ और बिखरा घरेलू सामान दिखाई दिया। कोई भीगे कपड़े सुखा रहा था, कोई टूटे घर से बचा-खुचा सामान निकाल रहा था। लोगों का कहना था कि अगर नगर निगम ने समय रहते नाले की सफाई कराई होती तो इतनी बड़ी तबाही नहीं होती। हादसे के 24 घंटे बाद भी किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। इस आपदा से करीब 460 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें 110 महिलाएं, 150 पुरुष और 200 बच्चे शामिल हैं। नाले के किनारे की मिट्टी लगातार खिसक रही है, जिससे पांच और मकानों पर गिरने का खतरा बना हुआ है। कई परिवार पलायन को मजबूर हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट..... जनप्रतिनिधि आए, लेकिन राहत अब तक नहीं मिली नई बस्ती रैदास विहार के रहने वाले नदीम, मुकेश, अमन और अताउल्लाह ने बताया कि हादसे के बाद जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन अब तक किसी भी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता नहीं मिली है। जलभराव के कारण पांच और मकानों पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है। नाले के किनारे की मिट्टी लगातार कट रही है, जिससे मकानों में दरारें पड़ने लगी हैं। लोगों का कहना है कि अगर नगर निगम ने समय रहते नाले की सफाई करा दी होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। हादसे के बाद हरकत में आया नगर निगम बुधवार सुबह नगर निगम की 10 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची और नाले की सफाई के साथ मलबा हटाने का काम शुरू किया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई हादसे के बाद हुई। यदि पहले ही नाले की सफाई कर दी जाती तो बस्ती को इतनी बड़ी तबाही का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों का आरोप है कि नाले पर कबाड़ियों ने कब्जा कर रखा है, जिससे पानी की निकासी नहीं हो पाती। हर बारिश में आसपास की हासमी लाइन और छीलन बस्ती भी जलभराव की चपेट में आ जाती है। ऐसे में इन इलाकों के लोगों में भी डर का माहौल है। पांच मकानों पर अब भी खतरा बरकरार नाले के किनारे की मिट्टी लगातार धंसने से बुच्चू, नदीम, रहमान, लाला और राजेश के मकानों का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए परिवारों ने अपना सामान बाहर निकाल लिया है। स्थानीय लोगों ने एहतियात के तौर पर रस्सियां बांधकर खतरे वाले हिस्से को घेर दिया है। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो ये मकान कभी भी नाले में समा सकते हैं। राहत के लिए समाजसेवी बने सहारा क्षेत्रवासियों का कहना है कि हादसे की रात प्रशासन की ओर से तत्काल कोई राहत नहीं पहुंची। ऐसे में समाजसेवी नावेद आलम और यासीन ने आगे आकर पीड़ित परिवारों के लिए टेंट और तख्त की व्यवस्था कराई। महिलाओं और बच्चों ने पूरी रात टेंट में गुजारी, जबकि पुरुष घरों और सामान की रखवाली करते रहे। कई परिवारों को सड़क किनारे रात बितानी पड़ी। पीड़ित शाहिद ने बताया कि घर से सामान निकालने की अफरा-तफरी के दौरान उनकी पत्नी की पायल और टॉप्स चोरी हो गए। वहीं उनकी मां के 25 हजार रुपए तेज बहाव में बह गए। इसके अलावा मोहल्ले के दो अन्य घरों से भी सामान चोरी होने की बात सामने आई है। आपदा के बीच चोरी की घटनाओं ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। 20 से 25 परिवार छोड़ चुके हैं बस्ती स्थानीय निवासी विकास जायसवाल ने बताया कि यह बस्ती करीब 40 साल पुरानी है, लेकिन उन्होंने पहले कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। भारी नुकसान के बाद 20 से 25 परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से पीड़ितों को मुआवजा देने और सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की। पीड़िता तनीषा ने बताया कि बारिश का पानी घर में घुसने से उनका पूरा सामान खराब हो गया। मंगलवार रात से ही वह घर से पानी निकालने में लगी हैं। तीन छोटे बच्चों के साथ उन्हें पूरी रात सड़क पर गुजारनी पड़ी। बिजली गुल, पानी की भी किल्लत सुनीता ने बताया कि हादसे के बाद एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। घरों में कपड़े और जरूरी सामान मलबे में दबे हैं। पीने और नहाने के पानी तक की समस्या खड़ी हो गई है। छोटे-छोटे बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं। हनीफ ने अपने टूटे मकान की ओर इशारा करते हुए कहा कि मंगलवार दोपहर तक यहीं मेरा घर था, आज सिर्फ मलबा बचा है। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान उनकी पत्नी और तीन बच्चे घर में थे। समय रहते सभी को बाहर निकाल लिया गया, जिससे उनकी जान बच गई। हादसे में सभी को मामूली चोटें आईं और निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। ऑपरेशन के आठ दिन बाद बेटे को गोद में उठाकर बचाया विमला देवी ने बताया कि उनके बेटे का आठ दिन पहले ऑपरेशन हुआ था और उसके टांके भी नहीं कटे थे। अचानक पानी भरने लगा तो पड़ोसियों ने उसे गोद में उठाकर सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान उनकी बहू भी पानी की चपेट में आ गई, जिससे उसके शरीर पर कई जगह चोटें आईं। परिवार का राशन, कपड़े और घरेलू सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया।

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