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15 में से 12 साल बर्बाद:रोडवेज बस स्टैंड की दुकानें और बैंक नीलाम की प्रक्रिया अधूरी

15 में से 12 साल बर्बाद:रोडवेज बस स्टैंड की दुकानें और बैंक नीलाम की प्रक्रिया अधूरी

वृद्धिचंद जैन केंद्रीय बस स्टैंड पर 3 बार नीलामी के बाद नहीं मिले खरीदार शहर के वृद्धिचंद जैन केंद्रीय बस स्टैंड पर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने का सपना 12 साल बीत जाने के बाद अधूरा है। वर्ष 2014 में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम, नगर परिषद और कृषि उपज मंडी समिति के बीच 15 साल की अवधि के लिए, वर्ष 2029 तक, एक त्रिपक्षीय समझौता हस्ताक्षरित हुआ था। समझौते के तहत मंडी की 3.13 बीघा और परिषद की 4 बीघा जमीन की अदला-बदली कर बहुमंजिला जी+2 बस स्टैंड परिसर, दुकानें, बैंक, होटल व रेस्टोरेंट विकसित करने की जिम्मेदारी नगर परिषद बाड़मेर की थी। नगर परिषद ने इस एमओयू अवधि के 15 वर्षों में से 12 साल गंवा दिए हैं। अब केवल 3 साल शेष हैं। वर्ष 2016, 2018 और 2024 में नगर परिषद ने नीलामी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अत्यधिक एकमुश्त फीस, कठिन शर्तों और सुविधाओं का जिम्मा व्यापारियों पर डालने के कारण किसी ने रुचि नहीं दिखाई। एकमुश्त राशि व 30 दिन की समय सीमा नगर परिषद की तरफ से बस स्टैंड परिसर में कियोस्क के लिए करीब 25 हजार रुपए, दुकानों के लिए 10 लाख रुपए और 20 कमरों के होटल, रेस्टोरेंट के लिए 4 लाख रुपए से अधिक की एकमुश्त फीस तय की गई थी। साथ ही शर्त रखी गई कि बोली लगते ही 30 दिनों के भीतर पूरी राशि जमा करवानी होगी। खुद के खर्चे पर सुविधाएं विकसित करने की मजबूरी सफल बोलीदाता को एकमुश्त फीस देने के बाद अपने स्तर पर बिजली व पानी के कनेक्शन करवाने, राज्य सरकार की लाइसेंस फीस जमा कराने, निर्माण करने की शर्त रखी गई। व्यापारियों का कहना है कि बस स्टैंड पर उतनी ग्राहकी की उम्मीद नहीं है। इससे यह भारी-भरकम निवेश वापस नहीं निकलता। दूसरी मंजिल पर बैंक का प्रस्ताव, नियमों में अटका परिषद ने राजस्व जुटाने के लिए पहली व दूसरी मंजिल पर दो बैंक शाखाएं खोलने की योजना बनाई। बैंकिंग गाइडलाइन के अनुसार दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों की सुगमता के लिए बैंक शाखाएं ग्राउंड फ्लोर पर होना अनिवार्य है। इस तकनीकी चूक के कारण बैंकों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे समझे एमओयू व नीलामी की प्रक्रिया को 15 साल का अनुबंध: 17 जुलाई 2014 को आरएसआरटीसी, नगर परिषद व मंडी समिति के बीच एमओयू हुआ। यह वर्ष 2029 तक प्रभावी है। 12 साल का नुकसान: 2014 से 2026 तक 12 साल का समय बीत चुका है। अब केवल 3 साल शेष हैं। 3 बार नीलामी फेल: वर्ष 2016, 2018 और 2024 में निविदाएं जारी हुईं। अव्यावहारिक दरों के कारण व्यापारियों ने रुचि नहीं ली। 18 हजार यात्री प्रभावित: प्रतिदिन बाड़मेर बस स्टैंड से 66 रूटों पर 66 बसों का संचालन होता है। रोज 15 से 18 हजार यात्रियों की आवाजाही रहती है। 15 साल बाद स्वामित्व परिवर्तन: एमओयू की शर्त के अनुसार 15 साल की अवधि पूर्ण होने पर बस स्टैंड की पूरी संपत्ति, जमीन व निर्मित भवन, स्वतः आरएसआरटीसी के पास चली जाएगी। रोडवेज व नगर परिषद के एमओयू का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। इनमें क्या शर्तें रखी थीं, क्या नियम बनाए हैं, इस संबंध में फाइलों की जांच की जाएगी। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विवेक व्यास, आयुक्त, नगरपरिषद बाड़मेर

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