19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दिया बयान

19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन ने कहा कि किसी लेखक या कलाकार को विचारों के कारण देश छोड़ने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
कोलकाता: बांग्लादेश की चर्चित लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन लगभग 19 वर्षों बाद कोलकाता पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए कहा कि किसी भी लेखक या कलाकार को केवल अलग विचार रखने के कारण अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपनी इस यात्रा के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराने पर सेक्युलर मिशन ट्रस्ट और पश्चिम बंगाल सरकार का आभार भी जताया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बताया लोकतंत्र की बुनियाद समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में तस्लीमा नसरीन ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार यदि अभिव्यक्ति की आजादी नहीं होगी तो लोकतंत्र भी मजबूत नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पूरी तरह संरक्षित और मजबूत किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी लेखक या कलाकार को केवल उसके विचारों या मतभेदों के कारण अपना देश छोड़ने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। Read Also : नोआपाड़ा में मंत्री अर्जुन सिंह के फर्जी हस्ताक्षर मामले में दो आरोपी गिरफ्तार 19 साल बाद कोलकाता लौटने पर जताई खुशी तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि वह दोबारा कोलकाता लौट पाएंगी। उन्होंने बताया कि सेक्युलर मिशन ट्रस्ट के प्रमुख उस्मान गनी मलिक के प्रयासों से उनकी यह यात्रा संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस यात्रा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई गई, जिसके कारण वह इतने लंबे अंतराल के बाद शहर आ सकीं। उन्होंने इस सहयोग के लिए उस्मान गनी मलिक और पश्चिम बंगाल सरकार का धन्यवाद किया। पुस्तक मेले और साहित्यिक आयोजनों में आने की जताई इच्छा तस्लीमा नसरीन ने कहा कि यदि भविष्य में भी उन्हें सुरक्षा मिलती रही तो वह कोलकाता के पुस्तक मेले और साहित्यिक महोत्सवों में नियमित रूप से शामिल होना चाहेंगी। वर्षों तक सुरक्षा और आवश्यक सहयोग नहीं मिलने के कारण उनका कोलकाता आना संभव नहीं हो सका। अब वह उम्मीद करती हैं कि समय-समय पर इस शहर का दौरा कर सकेंगी और साहित्यिक गतिविधियों का हिस्सा बनेंगी। निर्वासन के वर्षों का किया उल्लेख तस्लीमा नसरीन वर्ष 1994 से निर्वासन का जीवन जी रही हैं। उन्होंने पहले भी बताया था कि उन्हें कोलकाता आने का निमंत्रण सेक्युलर मिशन संस्था की ओर से मिला था, जिसका नेतृत्व उस्मान गनी मलिक करते हैं। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि दुनिया भर के लेखक और कलाकार बिना किसी भय के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आनंद ले सकें और अपने विचार खुलकर रख सकें।
This is a summary. Read the full article at the original source.
Read full article at samachareisamay
