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देश में 2014 के बाद से दोगुनी से अधिक बढ़ीं मेडिकल कॉलेजों की संख्या, केंद्रीय मंत्री ने संसद में दी जानकारी

देश में 2014 के बाद से दोगुनी से अधिक बढ़ीं मेडिकल कॉलेजों की संख्या, केंद्रीय मंत्री ने संसद में दी जानकारी
Source:jagran

सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि देश में मेडिकल कालेजों की संख्या 2014 के बाद दोगुनी से अधिक बढ़कर अब 844 हो गई है। 2014 में 387 मेडिकल कॉलेज थे। सरकार ने यह भी बताया कि अंडरग्रेजुएट एमबीबीएस सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,39,489 हो गई है।

पीटीआई, नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि देश में मेडिकल कालेजों की संख्या 2014 के बाद दोगुनी से अधिक बढ़कर अब 844 हो गई है। 2014 में 387 मेडिकल कॉलेज थे। सरकार ने यह भी बताया कि अंडरग्रेजुएट एमबीबीएस सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,39,489 हो गई है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह भी कहा कि इसी दौरान पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,360 हो गई है। मंत्री ने कहा कि दूर-दराज के इलाकों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने और एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने से देशभर में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होने और स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होने की उम्मीद है। मंत्री ने 'फैमिली अडॉप्शन प्रोग्राम' (एफएपी) पर भी ज़ोर दिया, जिसे एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके तहत, मेडिकल कालेज गांवों को गोद लेते हैं, जबकि एमबीबीएस छात्र उन गांवों में परिवारों को गोद लेते हैं। वे टीकाकरण, माहवारी के दौरान साफ-सफाई, आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट, स्वस्थ जीवनशैली, और दवा लेने के नियमों का पालन करने के बारे में नियमित रूप से फालो-अप करते हैं। मंत्री ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम के तहत, पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के लिए उनकी ट्रेनिंग के हिस्से के तौर पर जिला अस्पतालों में तीन महीने की पोस्टिंग जरूरी है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी की कोई सूचना नहीं: नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अन्य प्रश्न के उत्तर में लोकसभा को बताया कि सरकार को देशभर में एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की कमी के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। हालांकि, मांग बढ़ने, खरीद में देरी या सप्लाई चेन की समस्याओं की वजह से कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर अस्थायी रूप से स्थानीय स्तर पर कमी हो सकती है। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें आपातकालीन खरीद करके और सप्लाई चेन मैनेजमेंट को मजबूत करके कदम उठाती हैं। केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के साथ समय-समय पर समीक्षा बैठकें करके 'नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम' के कार्यान्वयन की लगातार समीक्षा करती है। नड्डा ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एआरवी और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (आरआइजी) की खरीद, वितरण और इनकी लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की मुख्य ज़िम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों की है। अन्य प्रश्न के उत्तर में नड्डा ने कहा कि एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने वाले लोगों की संख्या का डाटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखा जाता है। मंत्री ने कहा कि दिल्ली, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और पुडुचेरी - में रेबीज हेल्पलाइन शुरू की गई है। सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों -- पुडुचेरी, राजस्थान, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, तमिलनाडु और कर्नाटक ने रेबीज खत्म करने के लिए राज्य कार्य योजना तैयार की है।

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