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दो सालों में ट्रेनों से चोरी हो गए 3 करोड़ के चादर-कंबल, संसद ने रेलवे से मांगा पाई-पाई का हिसाब

दो सालों में ट्रेनों से चोरी हो गए 3 करोड़ के चादर-कंबल, संसद ने रेलवे से मांगा पाई-पाई का हिसाब
Source:jagran

दो साल में वीआईपी ट्रेनों से 34 हजार लिनेन आइटम, जिनकी कीमत करीब तीन करोड़ रुपये है, चोरी हो गए हैं। संसद ने इस मामले में रेलवे से जवाब मांगा है।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। वीआईपी ट्रेन लखनऊ मेल में आउटसोर्स पर तैनात एक कोच अटेंडेंट को मार्च माह का वेतन जब अप्रैल में दिया गया तो ठेकेदार ने उसमें से तीन हजार रुपये की कटौती कर दी। करीब 10 हजार रुपये महीना पाने वाले कोच अटेंडेट के वेतन से यह कटौती तीन कंबल, सात चादरें और उसके अलावा तकिया कवर, फेस टॉवल की चोरी के कारण की गई। यह चोरी दो साल में करीब तीन करोड़ रुपये के लिनेन की हो गई है। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की मैकेनाइज्ड लांड्री से जुड़ी ट्रेनों के करीब 34 हजार लिनेन (कंबल, तकिया कवर, चादर, फेस टॉवल) दो साल में चोरी हो गए हैं। अब संसद ने लिनेन चोरी का हिसाब मांगा है। इस सवाल को मानसून सत्र के दौरान संसद में उठाया जा सकता है। रेल मंत्रालय ने संसद के सवाल को लखनऊ सहित देश के सभी रेल मंडलों को भेजकर लिनेन चोरी का हिसाब मांगा है। रेलवे अधिकारियों ने हिसाब तो तैयार कर दिया है, लेकिन कोच अटेंडेंट के वेतन से हो रही कटौती की जांच होने पर तय नियम की जगह उनके कम मानदेय का मामला भी सामने आ सकता है। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की लखनऊ, वाराणसी ओर अयोध्या लांड्री से प्रतिदिन 10 से 12 हजार लिनेन के पैकेट तैयार करके ट्रेनों की एसी श्रेणी में उपलब्ध कराए जाते हैं। एक लिनेन सेट तैयार करने में करीब एक हजार रुपये का खर्च आता है। लिनेन सेट में दो चादरें, एक कंबल, तकिया कवर, फेस टावल शामिल होता है। एसी सेकेंड और एसी थर्ड एक चादर करीब 250 रुपये की और एसी प्रथम की एक चादर लगभग 300 रुपये की खरीदी जाती है। फेस टॉवेल की लागत 100 से 110 रुपये, तकिया कवर 50 से 60 रुपये और कंबल की खरीद 400 से 430 रुपये के बीच होती है। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की लखनऊ और अयोध्या, वाराणसी प्रयागराज को मिलाकर 15 ट्रेनों में लिनेन की आपूर्ति होती है। सबसे अधिक दो हजार लिनेन लखनऊ-नई दिल्ली एसी एक्सप्रेस और लगभग एक हजार लिनेन लखनऊ मेल में यात्रियों को उपलब्ध कराए जाते हैं। इतना हुआ दो साल में नुकसान मंडल में वर्ष 2024-25 में करीब एक करोड़ रुपये से खरीदे गए कुल 10 हजार लिनेन की चोरी हुई है। वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 12 हजार लिनेन की हो गई है। इस वित्तीय वर्ष में रेलवे को 1.20 करोड़ रुपये का चूना लगा है। हांलाकि यह नुकसान रेलवे बिल बनाते समय गिनती के बाद ठेकेदार के वसूलता है। इस तरह दो साल में 2.20 करोड़ रुपये के लिनेन की चोरी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ट्रेनों से हुई है। यहां भी एक करोड़ के लिनेन चोरी पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की लांड्री से जुड़ी ट्रेनों के भी दो साल में करीब एक करोड़ रुपये के लिनेन चोरी हुए हैं। इस जोन में करीब आठ सौ रुपये में नया लिनेन सेट तैयार होता है। वर्ष 2024-25 में 59.71 लाख रुपये की लागत के करीब सात हजार लिनेन और 2025-26 में लगभग 37.18 लाख रुपये की लागत के करीब 4500 लिनेन आइटम की चोरी हुई है। यह भी पढ़ें- यूपी में एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन के 3 बैच पर लगी रोक, कंपनी 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट सबसे अधिक चोरी होने वाले आइटम बेडशीट - 52 प्रतिशत कंबल - 25 प्रतिशत तकिया कवर 13 प्रतिशत तौलियां 8.5 प्रतिशत तकिया 1.5 प्रतिशत

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