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लोकार्पण के 3 महीने बाद ही दरकने लगा गंगा एक्सप्रेसवे, बारिश से धंसी सड़क

लोकार्पण के 3 महीने बाद ही दरकने लगा गंगा एक्सप्रेसवे, बारिश से धंसी सड़क

मॉनसूनी बारिश ने गंगा एक्सप्रेसवे की पोल खोल दी है।मंगलवार हुई बारिश से उन्नाव के सोनिक स्थित इंटरचेंज करीब 10 मीटर तक दरक गया। एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी लगते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।

Ganga Expressway: गंगा एक्सप्रेसवे मॉनसूनी बारिश में ही दगा देने लगा है। मंगलवार को पूरे दिन और रात में हुई बारिश से उन्नाव के सोनिक स्थित इंटरचेंज करीब 10 मीटर तक दरक गया। एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी लगते ही बुधवार दोपहर कार्यदायी संस्था के अफसर मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में मरम्मत का कार्य शुरू कराया।मेरठ से प्रयागराज तक बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण इसी साल 29 अप्रैल को हुआ था। मंगलवार को हुई कई घंटे तक रिमझिम बारिश के कारण प्रयागराज से मेरठ की ओर जाने वाले मार्ग पर सोनिक के पास लखनऊ-कानपुर हाईवे से जुड़े उतराव (इंटरचेंज) पर सड़क की परत करीब 10 मीटर तक दरक गई। जानकारी पर कार्यदायी संस्था ने तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराया। दरकी सड़क के डामर को जेसीबी से उखाड़कर मिट्टी को ठीक से बैठाने के बाद गिट्टी डालते हुए दोबारा बिटुमेन की लेयर चढ़ाई जाएगी। सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग भी की गई। पटेल इंफ्रास्टक्चर के प्रोजेक्टर मैनेजर सतीश सिंह ने बताया कि बरसात के समय कुछ खामियां आती हैं। मिट्टी की कटान को सही कराया जा रहा है।पहले भी धंस चुकी है सड़कसोनिक के पास गंगा एक्सप्रेस-वे के 421.2 किलोमीटर बिंदु पर कानपुर-लखनऊ हाईवे से जुड़ी उतराव सड़क इससे पहले भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसी साल 29 मई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें करीब 100 मीटर तक सड़क का डामर उखड़ा हुआ दिखाई दिया था। उस समय भी कार्यदायी संस्था ने मरम्मत कराई थी। अब उसी स्थान से कुछ दूरी पर सड़क की परत दोबारा उखड़ने के बाद फिर से मरम्मत का काम कराया गया।गंगा एक्सप्रेसवे की चाहरदीवारी गिरीकुछ दिन पहले गंगा एक्सप्रेसवे सड़क पर मवेशियों के प्रवेश से रोकने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर चारदीवारी बनाई गई। मार्च में सड़क पर वाहनों का संचालन शुरू हुआ, लेकिन जुलाई में ही चारदीवारी ध्वस्त हो गई। जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।दरअसल, मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेसवे पर मवेशियों को हाईवे पर आने से रोकने के लिए विभाग ने सड़क के दोनों ओर सीमेंट की पट्टी से चारदीवारी बनाई थी। सीमेंट से बनी चारदीवारी छह महीने भी नहीं चल पाई। प्रतापगढ़ के महेशगंज के आईटीडी कैंप कार्यालय आजाद नगर से पुरमई सुल्तानपुर की ओर जा रही सड़क पर प्रीतमपुर पुल के पास चारदीवारी ध्वस्त हो गई। जिससे लोग निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगे हैं। मामले को लेकर प्रोजेक्ट मैनेजर विजय इग्गले ने बताया कि जांच करवाकर शिकायत भेजी जाएगी। निजी कंपनी की टीम लगातार मॉनीटरिंग कर रही है।

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