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30 वर्ष से अधिक उम्र के अमेरिकी सैनिकों की होगी सालाना टेस्टोस्टेरोन जांच, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बड़ा ऐलान

30 वर्ष से अधिक उम्र के अमेरिकी सैनिकों की होगी सालाना टेस्टोस्टेरोन जांच, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बड़ा ऐलान

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 30 वर्ष से अधिक उम्र के सैनिकों के लिए वार्षिक टेस्टोस्टेरोन जांच की घोषणा की। जरूरत पड़ने पर टीआरटी उपचार भी मिलेगा।

वॉशिंगटन डी.सी. : अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सैनिकों के लिए हर वर्ष टेस्टोस्टेरोन जांच कराने की नई पहल की घोषणा की है। उनका कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना है, ताकि वे हर परिस्थिति में सर्वोत्तम प्रदर्शन कर सकें। 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मी चाहें तो स्वेच्छा से यह जांच करा सकेंगे।वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण में शामिल होगी जांच, जरूरत पड़ने पर मिलेगा उपचारद हिल की रिपोर्ट के अनुसार 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सैनिकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण (पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट) में टेस्टोस्टेरोन स्क्रीनिंग को शामिल किया जाएगा। वहीं 30 वर्ष से कम आयु के सैनिकों के लिए यह जांच वैकल्पिक होगी। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी वीडियो संदेश में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका अपने हथियारों, सैन्य प्लेटफॉर्म और उपकरणों पर भारी निवेश करता है, लेकिन सेना की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसका सैनिक ही होता है। Also Read | भारतीय मूल की 17 साल की ऋद्धि चौहान बनीं 300 कैडेट्स की कमांडर, अमेरिकी नौसेना में अधिकारी बनने की तैयारी उन्होंने वीडियो का शीर्षक “द हाई-टी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर” रखा। उन्होंने कहा कि सैनिकों की क्षमता, मानसिक दृढ़ता और लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के नए उपाय लगातार अपनाए जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम हो सकता है। इसलिए यह जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की जाएगी कि सैनिक अपने सर्वश्रेष्ठ शारीरिक स्तर पर कार्य कर सकें।जरूरतमंद सैनिकों को मिलेगी टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपीजांच में यदि किसी सैनिक में टेस्टोस्टेरोन की कमी पाई जाती है, तो उसे टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (टीआरटी) का विकल्प दिया जाएगा।पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम रूप से क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि शरीर की प्राकृतिक क्षमता को बहाल करना और उसे बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि इससे सैनिकों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य की रक्षा होगी और उन्हें प्रभावी ढंग से सेवा देने के लिए आवश्यक जैविक आधार मिलेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का दायित्व निभाना चाहता है और यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।द हिल के अनुसार यह पहल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की पारंपरिक पुरुषत्व और शारीरिक फिटनेस पर आधारित व्यापक नीति के अनुरूप मानी जा रही है। अप्रैल में अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने भी टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की उपलब्धता का दायरा बढ़ाया था। इससे पहले यह उपचार मुख्य रूप से उन पुरुषों तक सीमित था, जिनमें चिकित्सकीय कारणों से टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन प्रभावित होता था।रिपोर्ट के मुताबिक पीट हेगसेथ ने सेना में पहले ही अधिक सख्त शारीरिक फिटनेस मानक लागू किए हैं। इन मानकों के तहत सैन्यकर्मियों को एक समान “पुरुष मानक” के अनुरूप फिटनेस आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। वह कई बार सैनिकों के साथ व्यायाम करते हुए भी दिखाई दिए हैं। पिछले वर्ष सितंबर में उन्होंने कहा था कि वह सेना में अधिक वजन वाले सैनिक या “मोटे जनरल और एडमिरल” नहीं देखना चाहते। रिपोर्ट के अनुसार 30 से 79 वर्ष की आयु के लगभग 5.6 प्रतिशत पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी पाई जाती है। इससे मांसपेशियों की कमजोरी, थकान, वजन बढ़ना और यौन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा यह मधुमेह, हृदय संबंधी रोग, ऑस्टियोपोरोसिस और अवसाद जैसी बीमारियों से भी जुड़ी हो सकती है।रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इन स्वास्थ्य संकेतकों की समय रहते पहचान कर सैनिकों को वही स्तर की चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जैसा वे देश की सेवा करते समय अपने सर्वोत्तम प्रदर्शन से राष्ट्र को देते हैं।

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