अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले 4 आरोपी लखनऊ में गिरफ्तार, डिजिटल अरेस्ट कर हड़पे थे 150 करोड़

लखनऊ में एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर 150 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। शहर में एक बार फिर साइबर ठगी के बड़े अड्डे का राजफाश किया। विभूतिखंड स्थित साइबर हाइट भवन में संचालित एक और फर्जी साइबर संपर्क केंद्र पर पुलिस ने छापा मारकर ऐसे गिरोह को पकड़ा, जो अमेरिका के नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर डॉलर में करोड़ों की ठगी करते थे। लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। गिरोह का सरगना समेत चार मुख्य आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि मौके पर 35 युवक-युवतियां लोगों से बातचीत करते मिले। गिरोह ने बीचे छह महीने में डेढ़ सौ करोड़ की ठगी कर चुके हैं। पुलिस उपायुक्त पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि 22 जुलाई की रात जलवा बार के सामने पुलिस टीम जांच कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि साइबर हाइट भवन की चौथी मंजिल स्थित फ्लैट संख्या 420ए में विदेशी नागरिकों को ठगने वाला साइबर संपर्क केंद्र चल रहा है। सूचना मिलते ही अपराध शाखा और विभूतिखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने रात करीब तीन बजे छापा मारा। अंदर बड़ी संख्या में कंप्यूटर पर युवक-युवतियां विदेशों में फोन कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान प्रतापगढ़ निवासी सूरज त्रिपाठी, उसके मामा राहुल त्रिपाठी, बुआ के बेटे विवेक पांडेय और मुंबई निवासी तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार सूरज पूरे गिरोह का सरगना था, जबकि आकाश फर्जी वेबसाइट और इंटरनेट आधारित दूरभाष व्यवस्था संभालता था। विवेक और राहुल कर्मचारियों की भर्ती, संचालन और प्रबंधन का काम देखते थे। पूछताछ में पता चला कि सूरज त्रिपाठी वर्ष 2012-13 में अहमदाबाद में इसी तरह के केंद्र में काम कर चुका था। वहीं से उसने इस धंधे की बारीकियां सीखीं और बाद में रिश्तेदारों व तकनीकी विशेषज्ञ की मदद से राजधानी में पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया। ठगी की रकम पहले अमेरिका में मौजूद गिरोह के सदस्य इकट्ठा करते थे। बाद में हवाला के जरिए पैसा लखनऊ भेजा जाता था। कर्मचारियों को भी नकद भुगतान किया जाता था, ताकि लेन-देन का कोई रिकॉर्ड न मिले। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह प्रतिदिन चार से पांच हजार अमेरिकी डालर तक की ठगी करता था। सरकारी अधिकारी बनकर डराते थे जांच में सामने आया कि गिरोह ने एप्पल ग्राहक सहायता के नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इंटरनेट पर विज्ञापन के जरिए इसे ऊपर दिखाया जाता था। अमेरिका से मदद के लिए फोन करने वाले लोगों की काल सीधे लखनऊ पहुंचती थी। पहले कर्मचारी खुद को ग्राहक सहायता अधिकारी बताते थे, फिर दूसरे सदस्य अमेरिकी सरकारी एजेंसी या सर्वोच्च न्यायालय का अधिकारी बनकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। कई बार इनाम या तकनीकी सहायता का झांसा देकर भी लोगों को फंसाया जाता था। इसके बाद गिफ्ट कार्ड, सोना या नकदी के रूप में रकम ऐंठ ली जाती थी। देशभर और नेपाल से बुलाए गए कर्मचारी छापे के दौरान 35 कार्यस्थल संचालित मिले, जहां 35 कर्मचारी(चार युवती और 31 युवक) काम कर रहे थे। इनमें सबसे अधिक उत्तराखंड और महाराष्ट्र के युवक-युवतियां थे। इसके अलावा गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल के लोग भी यहां कार्यरत मिले। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन कर्मचारियों को ठगी की जानकारी थी या उन्हें सामान्य नौकरी बताकर रखा गया था। इन सभी लोगों के पुलिस ने बयान दर्ज कर लिए हैं। इन सभी लोगों को आरोपितों के खिलाफ गवाह के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। 31 लैपटॉप और 18.50 लाख रुपये बरामद छापेमारी में 31 लैपटाप, 14 मोबाइल फोन, दो राउटर, बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सूरज त्रिपाठी की कार से 18.50 लाख रुपये नकद बरामद हुए। फर्जी वेबसाइट से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस का मानना है कि बरामद सामग्री से गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेश में बैठे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलेगी। यह भी पढ़ें- कई राज्यों में छात्रों का प्रदर्शन, लखनऊ में वकील सड़क पर उतरे; बिहार में लाठीचार्ज व हवाई फायरिंग
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