कैलादेवी अभयारण्य में बढ़े बाघ, 4 साल से पर्यटक नहीं:सफारी योजना ठप, रणथम्भौर पर दबाव कम करने की उम्मीद
करौली में कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे इसका महत्व बढ़ा है। हालांकि, पर्यटन विकास की योजनाएं अभी तक सफल नहीं हो पाई हैं। अक्टूबर 2022 में शुरू की गई सफारी योजना चार साल बाद भी पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पाई है। इस अवधि में एक भी पर्यटक सफारी के लिए यहां नहीं पहुंचा। विशेषज्ञों का मानना है कि कैलादेवी और नवगठित धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व का उचित विकास होने से रणथम्भौर पर बाघों का दबाव कम होगा। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्यटन सफारी 1 अक्टूबर 2022 को शुरू हुई थी, लेकिन पर्याप्त प्रचार-प्रसार, पर्यटन सुविधाओं की कमी और अधूरी व्यवस्थाओं के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। विभागीय स्तर पर भी इसके प्रभावी संचालन और विस्तार में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में कैलादेवी अभयारण्य को टाइगर हैबिटेट घोषित किया था। तब यहां बसे 44 गांवों के विस्थापन की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब तक केवल एक गांव का ही पूर्ण विस्थापन हो पाया है। पर्यटन गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पर्यटकों की कमी के कारण यह अपेक्षा पूरी नहीं हो सकी। लगभग 774 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कैलादेवी अभयारण्य में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। रणथम्भौर से निकलकर कई बाघों ने इस क्षेत्र को अपना स्थायी ठिकाना बनाया है। वर्तमान में 9 बाघ-बाघिन मौजूद वर्तमान में यहां नौ बाघ-बाघिन मौजूद हैं, जिनमें दो नर, दो मादा और पांच शावक शामिल हैं। टी-80, टी-135 और टी-2303 जैसे बाघों का इस क्षेत्र में नियमित आवागमन देखा जाता है। उप वन संरक्षक संजीव शर्मा ने बताया कि कोर क्षेत्र में गांवों के बसे होने से कुछ चुनौतियां हैं। विस्थापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि सफारी रूट जल्द शुरू किए जाएं, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और क्षेत्र की संभावनाओं का बेहतर उपयोग हो सके।
कैलादेवी अभयारण्य में बढ़े बाघ, 4 साल से पर्यटक नहीं:सफारी योजना ठप, रणथम्भौर पर दबाव कम करने की उम्मीद - कॉपी लिंक करौली में कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे इसका महत्व बढ़ा है। हालांकि, पर्यटन विकास की योजनाएं अभी तक सफल नहीं हो पाई हैं। अक्टूबर 2022 में शुरू की गई सफारी योजना चार साल बाद भी पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पाई है। इस अवधि में एक भी पर्यटक सफारी के लिए यहां नहीं पहुंचा। विशेषज्ञों का मानना है कि कैलादेवी और नवगठित धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व का उचित विकास होने से रणथम्भौर पर बाघों का दबाव कम होगा। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्यटन सफारी 1 अक्टूबर 2022 को शुरू हुई थी, लेकिन पर्याप्त प्रचार-प्रसार, पर्यटन सुविधाओं की कमी और अधूरी व्यवस्थाओं के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। विभागीय स्तर पर भी इसके प्रभावी संचालन और विस्तार में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में कैलादेवी अभयारण्य को टाइगर हैबिटेट घोषित किया था। तब यहां बसे 44 गांवों के विस्थापन की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब तक केवल एक गांव का ही पूर्ण विस्थापन हो पाया है। पर्यटन गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पर्यटकों की कमी के कारण यह अपेक्षा पूरी नहीं हो सकी। लगभग 774 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कैलादेवी अभयारण्य में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। रणथम्भौर से निकलकर कई बाघों ने इस क्षेत्र को अपना स्थायी ठिकाना बनाया है। वर्तमान में 9 बाघ-बाघिन मौजूद वर्तमान में यहां नौ बाघ-बाघिन मौजूद हैं, जिनमें दो नर, दो मादा और पांच शावक शामिल हैं। टी-80, टी-135 और टी-2303 जैसे बाघों का इस क्षेत्र में नियमित आवागमन देखा जाता है। उप वन संरक्षक संजीव शर्मा ने बताया कि कोर क्षेत्र में गांवों के बसे होने से कुछ चुनौतियां हैं। विस्थापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि सफारी रूट जल्द शुरू किए जाएं, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और क्षेत्र की संभावनाओं का बेहतर उपयोग हो सके।
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