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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू, सिर्फ 5 रुपये में मिलेगा सफर का मौका

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू, सिर्फ 5 रुपये में मिलेगा सफर का मौका

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर शुरू। 5 से 25 रुपये किराया, जीरो-एमिशन तकनीक और 2600 यात्रियों की क्षमता इसकी खासियत है।

जींद : भारतीय रेलवे ने हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली यात्री ट्रेन की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर चलने वाली यह ट्रेन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बेहद कम किराए के कारण भी चर्चा का विषय बनी हुई है।इस ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि इसमें यात्रा का न्यूनतम किराया केवल 5 रुपये रखा गया है, जबकि अधिकतम किराया 25 रुपये होगा। किराया विभिन्न स्टेशनों के बीच की दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह राशि कई रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले प्लेटफॉर्म टिकट से भी कम है। Also Read | बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सात सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुखों ने क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा13 स्टेशनों पर रुकेगी, 2600 यात्री कर सकेंगे सफर करीब 90 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर यह ट्रेन लगभग दो घंटे में अपनी यात्रा पूरी करेगी। रास्ते में यह ट्रेन जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भाम्भेवां, बुटाना, खंदराई, रबराह, लाठ, मोहाना और बरवासनी समेत कुल 13 स्टेशनों पर रुकेगी।10 डिब्बों वाली इस ट्रेन में एक साथ लगभग 2,600 यात्री यात्रा कर सकेंगे। भारतीय रेलवे के अनुसार इसमें 2,400 किलोवाट क्षमता का इंजन लगाया गया है। ट्रेन सामान्य संचालन के दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि इसकी अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। ट्रेन के लिए ईंधन की आपूर्ति जींद में स्थापित हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन से की जाएगी।जीरो-एमिशन तकनीक से चलेगी ट्रेन, जींद में बना बड़ा हाइड्रोजन केंद्रइस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह न तो डीजल पर निर्भर है और न ही ओवरहेड बिजली लाइन पर। ट्रेन में लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है।इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। केवल जलवाष्प और ऊष्मा उत्पन्न होती है। यही कारण है कि इसे पूरी तरह जीरो-एमिशन और पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली माना जा रहा है।इस परियोजना के लिए जींद में भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग केंद्र विकसित किया गया है। यहां करीब 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए गए इस केंद्र में हाइड्रोजन रिसाव, आग और अत्यधिक तापमान का पता लगाने के लिए आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी स्थापित की गई है। इस नई सेवा के शुरू होने के साथ भारत अब जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, जान, चीन और अमेरिका जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत में ग्रीन एनर्जी आधारित रेल परिवहन को नई दिशा देगी।

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