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दबंगों की मनमानी से 500 परिवार परेशान, रीवा में सड़क विवाद ने पकड़ा तूल

दबंगों की मनमानी से 500 परिवार परेशान, रीवा में सड़क विवाद ने पकड़ा तूल

रीवा: रीवा जिले के त्योंथर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत वरहट से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मुख्य सड़क को दो हिस्सों में बांटकर आवागमन...

दबंगों की मनमानी से 500 परिवार परेशान, रीवा में सड़क विवाद ने पकड़ा तूल रीवा: रीवा जिले के त्योंथर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत वरहट से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मुख्य सड़क को दो हिस्सों में बांटकर आवागमन ठप किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटनाक्रम ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है। मुख्य मार्ग पर इस प्रकार से घेराबंदी किए जाने के कारण स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष व्याप्त है और वे जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पाने की आस लगाए बैठे हैं। दबंगई के कारण 500 परिवारों का आवागमन पूरी तरह ठप ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही एक प्रभावशाली व्यक्ति सुग्रीव लोहार ने सार्वजनिक सड़क पर बाड़ और कटीले तार लगाकर गैरकानूनी तरीके से कब्जा कर लिया है। इस मनमानी के कारण गांव के लगभग 500 परिवारों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का गुजरना तो दूर, लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। गांव से बाहर निकलने का यह अकेला एकमात्र मुख्य रास्ता था, जिसे पूरी तरह बंद कर दिए जाने से पूरा गांव अलग-थलग पड़ गया है। बच्चों, मरीजों और किसानों पर पड़ा गहरा असर सड़क बंद होने की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी पर अत्यंत गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, किसानों और इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है। किसानों को अपने खेतों तक पहुँचने में दिक्कत हो रही है, वहीं आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने आपसी स्तर पर समझा-बुझाकर रास्ता खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता न मिलने पर अब पूरा गांव लामबंद होकर मदद की गुहार लगा रहा है। ग्रामीणों की चेतावनी के बाद भी प्रशासन मौन समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों से जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाने और मार्ग बहाल करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस संवेदनशील मुद्दे पर सख्त रुख नहीं अपनाया और रास्ता नहीं खुलवाया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, जनसमस्या से जुड़ी इस गंभीर शिकायत के बावजूद अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिससे गांव वालों में रोष बढ़ता जा रहा है।

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