66 केवी बिजली लाइन में बड़ा तकनीकी दोष, गुरुग्राम में जांच के दौरान हुआ चौंकाने वाला खुलासा

गुरुग्राम में 66 केवी बिजली लाइन के कंडक्टर में आई तकनीकी खराबी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है।
HARYANA: गुरुग्राम में 66 केवी बिजली लाइन में आई तकनीकी खराबी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच के दौरान पता चला कि बिजली लाइन का कंडक्टर अंदर से क्षतिग्रस्त और टूटा हुआ था, जबकि बाहरी परत सामान्य और सुरक्षित नजर आ रही थी। इस वजह से शुरुआती निरीक्षण में खराबी का सही कारण सामने नहीं आ सका।बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विस्तृत तकनीकी जांच के बाद यह स्थिति सामने आई। फिलहाल संबंधित लाइन की मरम्मत और तकनीकी परीक्षण का काम पूरा किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो।कैसे सामने आई तकनीकी खराबी?जानकारी के मुताबिक, बिजली आपूर्ति में रुकावट और लाइन में असामान्य संकेत मिलने के बाद तकनीकी टीम ने 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन का निरीक्षण शुरू किया। शुरुआत में कंडक्टर की बाहरी सतह सामान्य दिखाई दी, लेकिन विस्तृत जांच और परीक्षण के दौरान पता चला कि उसके अंदर का धातु भाग क्षतिग्रस्त हो चुका था।विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की आंतरिक क्षति सामान्य दृश्य निरीक्षण से हमेशा पकड़ में नहीं आती और इसके लिए विशेष परीक्षण तकनीकों का सहारा लेना पड़ता है।बाहर से ठीक, अंदर से खराब कैसे?बिजली ट्रांसमिशन लाइनों में उपयोग होने वाले कंडक्टर कई परतों से बने होते हैं। समय के साथ—लगातार यांत्रिक दबाव,मौसम का प्रभाव,कंपन,अत्यधिक लोड,धातु की थकान (Metal Fatigue),या अन्य तकनीकी कारणों सेभीतरी तार कमजोर हो सकते हैं, जबकि बाहरी एल्यूमिनियम परत सामान्य दिखाई देती है। यही वजह है कि कई बार खराबी केवल विशेष जांच उपकरणों से ही सामने आती है।बिजली आपूर्ति पर क्या पड़ा असर?तकनीकी खराबी के कारण संबंधित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से सप्लाई बहाल करने का प्रयास किया और प्रभावित लाइन की मरम्मत शुरू की।अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अन्य महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनों का भी निरीक्षण किया जाएगा।जांच में किन पहलुओं पर दिया गया जोर?तकनीकी टीम ने कई बिंदुओं की जांच की, जिनमें शामिल हैं—कंडक्टर की आंतरिक स्थिति।धातु की मजबूती और टूट-फूट।लोड क्षमता।लाइन पर मौसम का प्रभाव।कनेक्शन और जॉइंट की स्थिति।भविष्य में जोखिम की संभावना।जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत और रखरखाव की योजना तैयार की जा रही है।विशेषज्ञों की रायऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइनों की केवल बाहरी जांच पर्याप्त नहीं होती। आधुनिक उपकरणों जैसे थर्मल स्कैनिंग, अल्ट्रासोनिक परीक्षण और अन्य तकनीकी निरीक्षण विधियों का उपयोग समय-समय पर किया जाना चाहिए, ताकि छिपी हुई खराबियों का समय रहते पता लगाया जा सके।इस तरह की नियमित निगरानी से बड़े बिजली व्यवधान और दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सकती है।भविष्य में क्या कदम उठाए जाएंगे?बिजली विभाग के अनुसार—संवेदनशील ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा।आधुनिक जांच तकनीकों का अधिक उपयोग किया जाएगा।पुराने कंडक्टरों की स्थिति का मूल्यांकन होगा।आवश्यक स्थानों पर लाइन और उपकरण बदले जाएंगे।रखरखाव की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाएगा।इन कदमों से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
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