मुरैना में किसान परेशान: खाद का ऑनलाइन सिस्टम बना मुसीबत, 80 किमी दूर से लेना पड़ रहा यूरिया

Morena Urea Distribution Issue : मुरैना में ऑनलाइन खाद टोकन व्यवस्था किसानों की परेशानी बन गई है। यूरिया लेने के लिए मजबूर किसानों को 80km दूर जाना पड़ रहा है। किसानों ने कई शिकायतें की हैं।
Morena Online Fertilizer Token Problem : मुरैना में किसानों को खाद वितरण में होने वाली धक्का-मुक्की और लंबी कतारों से राहत देने के लिए शुरू की गई ऑनलाइन टोकन व्यवस्था अब उनके लिए नई परेशानी बन गई है। जिले में कई किसानों को अपने गांव या नजदीकी केंद्र की बजाय दूसरे शहरों के गोदामों और दुकानों के टोकन मिल रहे हैं। हालात यह हैं कि यूरिया लेने के लिए किसानों को 70 से 80 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ रहा है। वहीं जरूरत न होने के बावजूद दूसरी खाद भी जबरन आवंटित किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार सरकार ने इस सीजन में खाद वितरण के लिए ऑनलाइन टोकन प्रणाली लागू की है। किसान मोबाइल या कंप्यूटर सेंटर के जरिए टोकन बुक करा रहे हैं। लेकिन सिस्टम में स्थानीय गोदामों पर स्टॉक उपलब्ध नहीं दिखने के कारण उन्हें दूसरे शहरों की दुकानों और गोदामों के टोकन मिल रहे हैं। बाजरा बोने वाले किसान को थमा दी दूसरी खाद हिंगोना निवासी किसान रामवीर कुशवाह ने अपनी चार बीघा बाजरे की फसल के लिए चार बोरी यूरिया की मांग की थी। लेकिन सिस्टम से उन्हें दो बोरी यूरिया और दो बोरी एनपीके खाद का आवंटन मिला। इतना ही नहीं, यूरिया लेने के लिए सबलगढ़ और एनपीके खाद के लिए अंबाह जाने का टोकन जारी किया गया। किसान का कहना है कि बाजरे की फसल में फिलहाल एनपीके की जरूरत नहीं है, फिर भी सिस्टम ने उसे जोड़ दिया। सैकड़ों किसान इसी समस्या से परेशान यह समस्या केवल एक किसान तक सीमित नहीं है। सबलगढ़ के किसानों को पोरसा, अंबाह के किसानों को जौरा और कई अन्य गांवों के किसानों को दूरस्थ केंद्रों के टोकन मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में रिश्तेदारों के जरिए खाद मंगवानी पड़ रही है या फिर टोकन निरस्त कर दोबारा शुल्क देकर नया टोकन बुक कराना पड़ रहा है। अधिकारी और कियोस्क संचालक आमने-सामने कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या कियोस्क और कंप्यूटर सेंटर संचालकों की गलती से हो रही है। वहीं कंप्यूटर सेंटर संचालकों का दावा है कि स्थानीय स्तर पर स्टॉक उपलब्ध नहीं दिखता, इसलिए जहां खाद उपलब्ध दिखाई देती है, वहीं का टोकन जारी करना पड़ता है। ये भी पढ़ें : मुरैना : कहीं आप भी तो नहीं खा रहे ये टोस्ट, पैकेट में मिली मरी हुई छिपकली! खाद्य विभाग ने बिक्री पर लगाई रोक तकनीकी खामी दूर करने की मांग सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की थी, लेकिन मुरैना में यही सिस्टम अब किसानों की सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। किसानों का सवाल है कि जब स्थानीय गोदामों में खाद उपलब्ध है, तो उन्हें दूसरे शहरों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं। अब किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द इस तकनीकी खामी को दूर करेगा।
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