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जड़ी-बूटियों से इलाज करने वाले 'देसी वैद्य' बनेंगे मास्ट्रर ट्रेनर, AIIMS डॉक्टरों और आदिवासी मरीजों के बीच बनेंगे 'सेतु'

जड़ी-बूटियों से इलाज करने वाले 'देसी वैद्य' बनेंगे मास्ट्रर ट्रेनर, AIIMS डॉक्टरों और आदिवासी मरीजों के बीच बनेंगे 'सेतु'
Source:jagran

राजस्थान सरकार आदिवासी अंचलों में पारंपरिक देसी वैद्यों और जनजाति गुणीजनों को 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ रही है।

नरेंद्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों विशेषकर आदिवासी अंचल में जड़ी-बूटियों और पारंपरिक तरीके से उपचार करने वाले 'देसी वैद्यों' और 'जनजाति गुणीजनों' को 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में जोड़कर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार ने आदिवासी अंचल के 'जनजाति गुणजनों' की पहचान कर इन्हें अब आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सूचकांक सुधारने के लिए इस योजना के तहत आयुर्वेद एवं योग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें पारंपरिक तरीकों से शहरों से दूर रह रहे लोगों को स्वस्थ रखने पर जोर दिया जा रहा है। देसी वैद्यों को मास्टर ट्रेनर के रूप में जोड़ा जा रहा मास्टर ट्रेनर स्वयं उपचार करने के साथ ही मरीजों का एम्स के चिकित्सकों से फोन और टेलीमेडिसिन के जरिए इलाज करवा रहे हैं। जड़ी-बूटियों से उपचार करने वालों का राजस्थान देशीय चिकित्सा अधिनियम, 1953 के मान्यता दी जा रही है। साथ ही देसी वैद्यों एवं जनजाति गुणीजनों का बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन, राजस्थान के माध्यम से पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है। प्रारंभिक चरण में जोधपुर एम्स के सहयोग से सिरोही के सैटेलाइट आदिवासी सेंटर के माध्यम से टेलीमेडिसिन की सुविधा शुरू की गई है। शुरूआती दौर में दो दर्जन को मास्टर ट्रेनर के रूप में चुना गया है। ऐसे करेंगे काम प्रारंभिक चरण में आदिवासी अंचल में यह योजना प्रारंभ की गई है। मास्टर ट्रेनर आदिवासियों के रोग की पहचान कर स्वंय के स्तर पर प्रारंभिक उपचार करने के साथ ही सैटेलाइट आदिवासी सेंटर के चिकित्सकों को मरीज के बारे में पूरा विवरण देते हैं। वीडियो कॉल के जरिए मरीज की बीमारी और लक्षण शेयर करते हैं। चिकित्सक दवा लिखकर मास्ट्रर ट्रेनरों को भेजने के साथ ही उपचार की प्रक्रिया के बारे में बताते हैं। आवश्यक्ता होने पर जोधपुर एम्स के चिकित्सकों से समय दिलवाते हैं। जोधपुर एम्स के चिकित्सक डॉ. प्रदीप द्विवेदी का कहना है कि प्रारंभिक दौर में सिरोही जिले को लेकर एक माडल तैयार किया गया है। बाद में अन्य क्षेत्रों में भी यह प्रक्रिया प्रारंभ होगी।

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