Chandigarh: आयुर्वेदिक चिकित्सकों की गरिमा पर फैसला, अपमानजनक संबोधन पर रोक

अब आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर रोक
चंडीगढ़: हरियाणा के किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सकों को अब ‘झोलाछाप’ या ‘फर्जी डाक्टर’ आदि जैसे नामों से संबोधित नहीं किया जाएगा। यह पेशा उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ा और लाखों लोगों की आयुर्वेद के प्रति विश्वास और भावनाओं से संबंधित है। जिसके चलते केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश जारी करके इस तरह के अपमानित करने वाले शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। हरियाणा समेत देश के कई हिस्सों में आयुर्वेदिक चिकित्सकों को लेकर कई तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। प्रदेश के अधिकतर कस्बों तथा ग्रामीण अंचल में भारी संख्या में आयुर्वेदिक चिकित्सक कार्य कर रहे हैं। दूसरी तरफ भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा देश में आयुर्वेद को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। युवाओं में आयुर्वेद से संबंधित कोर्स तथा उच्च शिक्षा हासिल करने को लेकर रूझान बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा जयपुर व पंचकूला में संचालित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थानों में विदेशी विद्यार्थी भी आयुर्वेद की पढ़ाई पढऩे लगे हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक चिकित्सकों के प्रति अभद्र शब्दावली पर सरकार गंभीर हो गई है। भारत सरकार के निर्देशानुसार कार्य कर रहे भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस), बैचलर ऑफर यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (बीयूएमएस), बैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएसएमएस) तथा बैचलर ऑफ सोवा-रिम्पा मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएसआरएमएस) जैसी मान्यता प्राप्त उपलब्धियां प्राप्त, विधिवत प्रशिक्षित एवं पंजीकृत चिकित्सकों को सार्वजनिक सूचनाओं, प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफार्म तथा अन्य सार्वजनिक माध्यमों में ‘झोलाछाप’ या ‘फर्जी डाक्टर’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जा रहा है। जिससे उनकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुंच रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय चिकित्सा राष्ट्रीय परिषद अधिनियम 1970 तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत मान्यता प्राप्त तथा संबंधित राज्य भारतीय चिकित्सा प्रणाली परिषदों में विधिवत पंजीकृत चिकित्सक विधिक रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा व्यवसायी हैं। एनसीआईएसएम अधिनियम 2020 के माध्यम से व्यावसायिक अभ्यास के विनियमन हेतु़ वैधानिक ढांचा प्रदान किया गया है। पंजीकृत चिकित्सक प्रचलित विधियों के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों एवं दायित्वों का निर्वहन करने के अधिकारी हैं। ऐसे विधिवत पंजीकृत चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ या ‘फर्जी डाक्टर’ कहना किसी प्रकार से विधिसम्मत नहीं है। किसी भी व्यक्ति, संस्था, मीडिया संगठन आदि द्वारा इस तरह के शब्दों का प्रयोग नियमों के विपरीत तथा संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा। भारतीय चिकित्सा पद्धति से जुड़े सभी प्रकार के चिकित्सकों को सम्मान देना अनिवार्य होगा।
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