Delhi: पटरी पर लौटी UER-1 परियोजना, NHAI ने शुरू की DPR तैयार कराने की प्रक्रिया; चार खंड में करने की योजना

दिल्ली-एनसीआर की सबसे महत्वाकांक्षी लेकिन वर्षों से अधूरी पड़ी शहरी सड़क परियोजनाओं में शामिल अर्बन एक्सटेंशन रोड-1 (यूईआर-1) को पूरा करने की कवायद तेज हो गई है।
दिल्ली-एनसीआर की सबसे महत्वाकांक्षी लेकिन वर्षों से अधूरी पड़ी शहरी सड़क परियोजनाओं में शामिल अर्बन एक्सटेंशन रोड-1 (यूईआर-1) को पूरा करने की कवायद तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने यूईआर-1 के करीब 50 किलोमीटर लंबे शेष हिस्सों के विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना का उद्देश्य दिल्ली के अधूरे शहरी बाईपास नेटवर्क को पूरा करना और इसे गुरुग्राम में अपर द्वारका एक्सप्रेसवे तथा 75 मीटर रोड से जोड़ना है। दिल्ली के मास्टर प्लान में यूईआर-1 की परिकल्पना राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी हिस्से में एक उच्च क्षमता वाले शहरी कॉरिडोर के रूप में की गई थी। यह कॉरिडोर एनएच-44 (पुराना जीटी करनाल रोड) की दिशा से शुरू होकर भविष्य में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली होते हुए गुरुग्राम की ओर बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। अब तक इसका बड़ा हिस्सा अधूरा होने के कारण यह नेटवर्क अपनी पूरी क्षमता से विकसित नहीं हो सका था। अब एनएचएआई पहली बार शेष हिस्सों को एकीकृत रूप से विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा है। एनएचएआई ने परियोजना के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट पर पूरा राइट ऑफ वे सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। दस्तावेज के अनुसार, प्रारंभिक चरण में चार लेन का मुख्य कैरिजवे विकसित किया जाएगा लेकिन भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित करने की संभावना को ध्यान में रखते हुए भूमि और मध्य भाग (मीडियन) का प्रावधान रखा जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को बिना बड़े पुनर्निर्माण के संभाला जा सकेगा। चार खंड में तैयार होगी परियोजना परियोजना चार प्रमुख हिस्सों में विभाजित है। इनमें पहला खंड लगभग 14 किलोमीटर, दूसरा खंड 20 किलोमीटर, तीसरा खंड 10 किलोमीटर और लगभग पांच किलोमीटर का कनेक्टिविटी लिंक विकसित किया जाएगा, जो गुरुग्राम के अपर द्वारका एक्सप्रेसवे और 75 मीटर रोड तक पहुंचेगा। अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर तैयार करने के लिए ट्रैफिक सर्वे, ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे, भू-तकनीकी जांच, पुल एवं इंटरसेक्शन डिजाइन, ड्रेनेज, सड़क सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत का विस्तृत अध्ययन करना होगा। डीपीआर में यह भी तय किया जाएगा कि किन स्थानों पर फ्लाईओवर, ग्रेड सेपरेटेड इंटरचेंज, अंडरपास, पुल और प्रमुख जंक्शन बनाए जाने की आवश्यकता होगी। इनकी संख्या डीपीआर तैयार होने के बाद तय होगी लेकिन इसके लिए विस्तृत इंजीनियरिंग अध्ययन अनिवार्य किया गया है। डीडीए वहन कर सकता है परियाेजना की लागत परियोजना की कुल लागत दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा वहन किए जाने का मॉडल प्रस्तावित है, जबकि एनएचएआई परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी निभाएगा। हालांकि अंतिम वित्तीय व्यवस्था डीपीआर और स्वीकृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। चयनित एजेंसी को सात माह के भीतर डीपीआर तैयार करनी होगी, जिसके बाद निर्माण कार्य के लिए अलग से निविदा प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों का मानना है कि डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होगा। इसके पूरा होने पर दिल्ली के बाहरी हिस्सों में वैकल्पिक यातायात गलियारा विकसित होगा और गुरुग्राम की ओर संपर्क भी बेहतर होने की उम्मीद है।
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