Journalist Pension Scheme: वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन योजना लागू करे UP सरकार, उपजा अध्यक्ष जी.सी. श्रीवास्तव ने सीएम योगी को लिखा खुला पत्र

Journalist Pension Scheme: UP Government should implement a pension scheme for senior journalists; UPJA President G.C. Srivastava writes an open letter to CM Yogi.
Journalist Pension Scheme: वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन योजना लागू करे UP सरकार, उपजा अध्यक्ष जी.सी. श्रीवास्तव ने सीएम योगी को लिखा खुला पत्र पत्र में उठाई गईं प्रमुख मांगें और मुद्दे डॉ. जी.सी. श्रीवास्तव ने अपने पत्र के जरिए उत्तर प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों की मौजूदा स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर निम्नलिखित मुख्य बिंदु रेखांकित किए: 1. लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और आर्थिक तंगी पत्रकार समाज और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हुए शासन की नीतियों और जनसमस्याओं को सामने लाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जीवनभर निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले कई वरिष्ठ पत्रकार अपने जीवन के उत्तरार्ध में आर्थिक संकट, गंभीर बीमारियों और सामाजिक असुरक्षा से जूझने के लिए मजबूर हैं। 2. अन्य राज्यों के 'पेंशन मॉडल' का दिया हवाला पत्र में उल्लेख किया गया है कि देश के कई राज्य जैसे—बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तराखंड अपने राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों को नियमित पेंशन का लाभ दे रहे हैं। बिहार सरकार द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को ₹15,000 प्रति माह पेंशन और उनके निधन के बाद जीवनसंगिनी (पत्नी) को ₹10,000 प्रति माह पारिवारिक पेंशन दी जा रही है। उपजा ने उत्तर प्रदेश में भी इसी तर्ज पर नीति बनाने का आग्रह किया है। 3. संवाद के जरिए समाधान की अपील उपजा लंबे समय से इस विषय पर ज्ञापन देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करती रही है। डॉ. श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वरिष्ठ पत्रकारों की समस्याओं के निस्तारण के लिए पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ शीघ्र एक उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की जाए। मांग न पूरी होने पर आंदोलन की दी चेतावनी उपजा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पत्रकार समाज टकराव का रास्ता नहीं चुनना चाहता, बल्कि संवाद से समाधान की ओर बढ़ना चाहता है। हालांकि, यदि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो प्रदेशभर के पत्रकार लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। संभावित प्रदर्शन स्थल मांगें न माने जाने की स्थिति में लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में धरना-प्रदर्शन और मुख्यमंत्री आवास घेराव (कूच) जैसी रणनीतियां बनाई जा सकती हैं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सम्मान और सामाजिक सुरक्षा देना सरकार का नैतिक दायित्व है। अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार उपजा की इन जायज मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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