Kanpur-Lucknow Toll Tax: कानपुर-लखनऊ का सफर हुआ महंगा, आज रात 12 बजे से ज्यादा कटेंगे टोल, देख लें नई रेट लिस्ट

New Toll Tax Rate: कानपुर-लखनऊ हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक झटके वाली खबर है. आज रात 12 बजे से (NH-27) नवाबगंज टोल प्लाजा से गुजरना महंगा हो जाएगा. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने टोल की नई दरें लागू करने का ऐलान कर दिया है. नई दरों के मुताबिक कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों का टोल 95 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है. भारी वाहनों के टोल में भी 10 से 15 रुपये तक का इजाफा हुआ है.
उन्नाव: अगर आप अक्सर कानपुर से लखनऊ या लखनऊ से कानपुर की यात्रा करते हैं, तो यह खबर आपकी जेब पर सीधा असर डालने वाली है. कानपुर-लखनऊ हाईवे (NH-27) पर सफर करना अब और महंगा हो गया है. उन्नाव जिले में पड़ने वाले नवाबगंज टोल प्लाजा पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने टोल टैक्स की दरों में बढ़ोतरी कर दी है. बढ़ी हुई ये नई दरें आज रात 12 बजे से लागू हो जाएंगी. कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद NH-27 पर टोल शुल्क में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है. नई रेट लिस्ट के अनुसार, हल्के वाहनों से लेकर भारी कमर्शियल वाहनों तक, सभी श्रेणियों में टोल टैक्स बढ़ाया गया है. नवाबगंज टोल प्लाजा की नई रेट लिस्ट एक नजर में: कार, जीप, वैन (हल्के मोटर वाहन): पहले 95 रुपये लगते थे, अब इसे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है. हल्के कमर्शियल वाहन/मिनी बस: इनका टोल 155 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये हो गया है. दो एक्सल वाली बस या ट्रक: ऐसे वाहनों को अब 330 रुपये की जगह 340 रुपये टोल टैक्स चुकाना होगा. तीन एक्सल वाले वाहन: इनका टोल 360 रुपये से बढ़ाकर 370 रुपये कर दिया गया है. 4 से 6 एक्सल वाले भारी वाहन: इन वाहनों का टोल 520 रुपये से बढ़कर अब 535 रुपये हो गया है. 7 या उससे अधिक एक्सल वाले वाहन: इनके लिए सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, अब इन्हें 635 रुपये की जगह 650 रुपये देने होंगे. स्थानीय लोगों के लिए पास की सुविधा जो लोग स्थानीय निवासी हैं और जिनका रोजाना इस टोल प्लाजा से आना-जाना होता है, उनके लिए NHAI ने राहत देते हुए पास की सुविधा निर्धारित की है. स्थानीय गैर-व्यावसायिक वाहनों (निजी वाहनों) के लिए मासिक पास की कीमत 360 रुपये तय की गई है, जबकि वार्षिक पास (सालाना) 3,075 रुपये में बनेगा. टोल टैक्स कैसे तय होता है तय की गई दूरी: टोल टैक्स तय करने का सबसे बुनियादी आधार सड़क की लंबाई है. टोल की दर ‘प्रति किलोमीटर’ के हिसाब से तय की जाती है. आप हाईवे के जितने हिस्से का इस्तेमाल करते हैं, उसके अनुसार आधार दर तय होती है. वाहन की श्रेणी: वाहनों के आकार और वजन के हिसाब से अलग-अलग दरें तय होती हैं. इसे पैसेंजर कार यूनिट (PCU) के आधार पर मापा जाता है. – कार, जीप, वैन जैसे हल्के वाहनों का टोल सबसे कम होता है. – बस और 2-एक्सल वाले ट्रकों का टोल मध्यम होता है. – भारी और मल्टी-एक्सल (4, 6 या अधिक एक्सल) वाले कमर्शियल वाहनों का टोल सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि भारी होने के कारण वे सड़क को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. सड़क का प्रकार: टोल की दर इस बात पर भी निर्भर करती है कि सड़क कैसी है. 4-लेन, 6-लेन हाईवे या अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए प्रति किलोमीटर टोल की दरें अलग-अलग और सामान्य सड़कों से ज्यादा होती हैं. बड़े पुल, सुरंग और बाईपास: अगर आपके सफर के दौरान रास्ते में कोई बड़ा पुल, सुरंग या बाईपास आता है (जिसके निर्माण की लागत 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक रही हो), तो उसकी लागत वसूलने के लिए बेस रेट में अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिया जाता है. सालाना महंगाई दर: NHAI हर साल 1 अप्रैल को टोल दरों को संशोधित करता है. यह संशोधन थोक मूल्य सूचकांक (WPI) यानी महंगाई दर पर आधारित होता है. इसी वजह से लगभग हर साल टोल टैक्स में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
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