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पानी मांगने के बहाने भरोसा जीता और फिर... Kulgam में एक आतंकवादी ने कैसे दो मजदूरों की जान ले ली

पानी मांगने के बहाने भरोसा जीता और फिर... Kulgam में एक आतंकवादी ने कैसे दो मजदूरों की जान ले ली

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार रात आतंकियों ने छत्तीसगढ़ से रोजी-रोटी कमाने आए दो बेकसूर मजदूरों को निशाना बनाया। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी लतीफ बट ने ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले इन श्रमिकों के बीच करीब 15-20 मिनट तक बैठा रहा। उसने उनसे बातचीत की, उनके नाम पूछे और उन्हें यकीन दिलाया कि वह उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। उसके पास एक काला बैग था, जिसमें उसने अपनी असॉल्ट राइफल छिपा रखी थी। पानी मांगने के बहाने चलाई गोली जब श्रमिकों को उस पर पूरा भरोसा हो गया, तब उसने अपना असली और खौफनाक चेहरा दिखाया। उसने मजदूरों को सुरक्षा का आश्वासन दिया और कमरे से बाहर निकलने का नाटक किया। तभी उसने कहा कि उसे प्यास लगी है। जैसे ही एक श्रमिक की पत्नी उसके लिए पानी लेने गई, आतंकी ने पास से ही दोनों निर्दोष मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। वारदात के वक्त वहां करीब डेढ़ से दो साल का एक छोटा बच्चा भी मौजूद था। हत्या को अंजाम देने के बाद आतंकी अपने एक साथी के साथ, जो पास में ही खड़ा था, वहां से फरार हो गया। इसे भी पढ़ें: आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में PM Modi से माफी मिलने पर भावुक हुई लड़की, बोली- मुझे नया जीवन मिला पहलगाम जैसी खौफनाक रणनीति इससे पहले पहलगाम में भी आतंकियों ने पर्यटकों से उनका नाम और धर्म पूछकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। दोनों घटनाओं का तरीका एक जैसा होना यह साफ दर्शाता है कि आतंकी संगठन अब सिर्फ हत्याएं नहीं कर रहे, बल्कि खौफ, डर और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की एक सोची-समझी रणनीति पर काम कर रहे हैं।

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार रात आतंकियों ने छत्तीसगढ़ से रोजी-रोटी कमाने आए दो बेकसूर मजदूरों को निशाना बनाया। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी लतीफ बट ने ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले इन श्रमिकों के बीच करीब 15-20 मिनट तक बैठा रहा। उसने उनसे बातचीत की, उनके नाम पूछे और उन्हें यकीन दिलाया कि वह उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। उसके पास एक काला बैग था, जिसमें उसने अपनी असॉल्ट राइफल छिपा रखी थी। पानी मांगने के बहाने चलाई गोली जब श्रमिकों को उस पर पूरा भरोसा हो गया, तब उसने अपना असली और खौफनाक चेहरा दिखाया। उसने मजदूरों को सुरक्षा का आश्वासन दिया और कमरे से बाहर निकलने का नाटक किया। तभी उसने कहा कि उसे प्यास लगी है। जैसे ही एक श्रमिक की पत्नी उसके लिए पानी लेने गई, आतंकी ने पास से ही दोनों निर्दोष मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। वारदात के वक्त वहां करीब डेढ़ से दो साल का एक छोटा बच्चा भी मौजूद था। हत्या को अंजाम देने के बाद आतंकी अपने एक साथी के साथ, जो पास में ही खड़ा था, वहां से फरार हो गया। पहलगाम जैसी खौफनाक रणनीति इससे पहले पहलगाम में भी आतंकियों ने पर्यटकों से उनका नाम और धर्म पूछकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। दोनों घटनाओं का तरीका एक जैसा होना यह साफ दर्शाता है कि आतंकी संगठन अब सिर्फ हत्याएं नहीं कर रहे, बल्कि खौफ, डर और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की एक सोची-समझी रणनीति पर काम कर रहे हैं।

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