NEET की तैयारी कर रहे छात्र की मौत, पिता को भेजा आखिरी वॉयस मैसेज बना भावुक पल

मुरादाबाद : एक बेहद दुखद घटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रहे एक छात्र ने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना से पहले छात्र ने अपने पिता को एक भावुक वॉयस मैसेज भेजा था, जिसमें उसने पूछा था— "पापा, तुम घर कब आओगे?" यह संदेश अब परिवार के लिए आखिरी याद बन गया है। घटना ने न केवल परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी उस समय मिली जब परिवार के सदस्य छात्र के कमरे में पहुंचे। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर दरवाजा तोड़ा गया, जहां छात्र फंदे से लटका मिला। परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।प्रारंभिक जांच में पता चला है कि छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी कर रहा था। घटना से कुछ समय पहले उसने अपने पिता को वॉयस मैसेज भेजा था। मैसेज में उसने सामान्य बातचीत के दौरान पिता से घर लौटने के बारे में पूछा था। परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि यह बातचीत उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा अन्य साक्ष्यों को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था।परिजनों के अनुसार, छात्र पढ़ाई को लेकर गंभीर था और डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह किसी प्रकार के मानसिक तनाव, परीक्षा के दबाव या अन्य व्यक्तिगत कारणों से परेशान था या नहीं। पुलिस परिजनों, दोस्तों और शिक्षकों से पूछताछ कर घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर अक्सर बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहता है। ऐसे समय में परिवार, शिक्षकों और दोस्तों का भावनात्मक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। नियमित संवाद, मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा और समय रहते सहायता उपलब्ध कराना कई कठिन परिस्थितियों को टाल सकता है।मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यदि किसी छात्र के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार उदासी, सामाजिक दूरी, निराशा या असामान्य चुप्पी जैसे संकेत दिखाई दें, तो उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे मामलों में परिवार और करीबी लोगों को संवेदनशीलता के साथ बातचीत करनी चाहिए और आवश्यकता होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। फिलहाल पूरे परिवार में शोक का माहौल है और इलाके में भी इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया जा रहा है।यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक विद्यार्थियों का मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी है। परिवार, स्कूल, कोचिंग संस्थानों और समाज की साझा जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को ऐसा माहौल दें, जहां वे बिना डर और संकोच के अपनी भावनाएं साझा कर सकें।
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