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तिरुमाला मंदिर के गर्भगृह में क्यों नहीं है छोटी घंटी? भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी सदियों पुरानी रहस्यमयी कथा और शास्त्रीय मान्यता

तिरुमाला मंदिर के गर्भगृह में क्यों नहीं है छोटी घंटी? भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी सदियों पुरानी रहस्यमयी कथा और शास्त्रीय मान्यता

तिरुमाला मंदिर के गर्भगृह में क्यों नहीं है छोटी घंटी? भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी सदियों पुरानी रहस्यमयी कथा और शास्त्रीय मान्यता

तिरुमाला मंदिर के गर्भगृह में क्यों नहीं है छोटी घंटी? भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी सदियों पुरानी रहस्यमयी कथा और शास्त्रीय मान्यता भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल आंध्र प्रदेश का तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर अपनी भव्यता, परंपराओं और अनगिनत रहस्यों के लिए जाना जाता है। यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर की कई परंपराएं ऐसी हैं, जिनके पीछे धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन नियमों की गहरी कहानी छिपी हुई है। इन्हीं में से एक है—मुख्य गर्भगृह में छोटी घंटी का न होना। आमतौर पर हिंदू मंदिरों में गर्भगृह के आसपास घंटियां लगी होती हैं, जिन्हें भक्त पूजा के दौरान बजाते हैं। लेकिन तिरुमाला मंदिर के मुख्य गर्भगृह में छोटी घंटी नहीं दिखाई देती। इसके पीछे एक प्रसिद्ध लोककथा और आगम शास्त्र से जुड़ी मान्यताएं बताई जाती हैं। घंटी से जुड़ी है एक प्राचीन लोककथा धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर ने एक बार अपनी दिव्य घंटी एक निःसंतान दंपत्ति को आशीर्वाद के रूप में प्रदान की थी। कहा जाता है कि भगवान के आदेश से उस दंपत्ति ने घंटी को दिव्य प्रसाद मानकर ग्रहण किया। मान्यता है कि इसके बाद उनके घर एक महान आत्मा ने जन्म लिया, जो आगे चलकर समाज और धर्म के क्षेत्र में विशेष स्थान रखने वाले महापुरुष बने। इसी कथा के आधार पर कई श्रद्धालु मानते हैं कि तिरुमाला के गर्भगृह में छोटी घंटी न रखने की परंपरा भगवान वेंकटेश्वर की इसी लीला से जुड़ी हुई है। क्या सिर्फ लोककथा ही है वजह? हालांकि, धार्मिक जानकारों के अनुसार मंदिर की परंपराओं को केवल लोककथाओं के आधार पर नहीं समझा जा सकता। तिरुमाला मंदिर में पूजा-पद्धति और सभी धार्मिक अनुष्ठान वैखानस आगम परंपरा के अनुसार किए जाते हैं। आगम शास्त्रों में भगवान की पूजा, गर्भगृह की व्यवस्था और मंदिर के नियमों का विस्तार से वर्णन मिलता है। कई मान्यताओं के अनुसार, गर्भगृह को अत्यंत शांत और दिव्य स्थान माना जाता है, जहां पूजा के दौरान बाहरी बाधाओं को कम रखा जाता है। गर्भगृह की मर्यादा से जुड़ी मान्यता हिंदू परंपरा में गर्भगृह को भगवान का निवास स्थान माना जाता है। इसलिए यहां हर वस्तु को विशेष नियमों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रखा जाता है। तिरुमाला मंदिर में भी कई ऐसी परंपराएं हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं और जिनका पालन आज भी किया जाता है। मंदिर प्रशासन और पुजारी परंपरा के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर की सेवा में निर्धारित विधियों का ही पालन किया जाता है। तिरुमाला की परंपराएं आज भी आकर्षण का केंद्र तिरुमाला मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। गर्भगृह में घंटी न होने की यह परंपरा भी श्रद्धालुओं के लिए जिज्ञासा और श्रद्धा का विषय बनी हुई है। चाहे इसे भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी लोककथा माना जाए या आगम शास्त्रों की परंपरा, यह तथ्य जरूर है कि तिरुमाला मंदिर की हर व्यवस्था के पीछे सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताएं और गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

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