विदेशी स्टैंडर्ड बनाम भारतीय फूड इंडस्ट्री

नई दिल्ली। पैकेज्ड फूड, स्नैक्स, बिस्कुट और नमकीन जैसे खाद्य उत्पादों में पाम ऑयल के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर संसद में सवाल उठाए गए हैं। कुछ सांसदों ने विकसित देशों और भारत में खाद्य तेलों के इस्तेमाल...
नई दिल्ली। पैकेज्ड फूड, स्नैक्स, बिस्कुट और नमकीन जैसे खाद्य उत्पादों में पाम ऑयल के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर संसद में सवाल उठाए गए हैं। कुछ सांसदों ने विकसित देशों और भारत में खाद्य तेलों के इस्तेमाल में अंतर का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि आखिर भारत में बड़ी कंपनियां पाम ऑयल का ज्यादा उपयोग क्यों करती हैं, जबकि कई विकसित देशों में इन्हीं उत्पादों के लिए सूरजमुखी तेल या अन्य बेहतर गुणवत्ता वाले तेलों का इस्तेमाल किया जाता है। इस मामले पर केंद्र सरकार ने लोकसभा में जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि पाम ऑयल एक मानकीकृत खाद्य तेल है और देश में इसके इस्तेमाल की अनुमति खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत दी गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) वैज्ञानिक आधार पर खाद्य पदार्थों के लिए मानक तय करता है। इसके तहत खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात की निगरानी की जाती है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। सरकार ने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन, 2011 के तहत विभिन्न खाद्य पदार्थों, खाद्य तेलों और पैकेज्ड फूड के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों में पाम ऑयल को भी एक मानकीकृत खाद्य तेल के रूप में मान्यता दी गई है। यानी यदि कोई कंपनी तय सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पाम ऑयल का इस्तेमाल करती है तो वह नियमों के अनुरूप माना जाता है। संसद में उठाए गए सवालों में यह भी कहा गया कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां विकसित देशों में अपने उत्पादों के लिए अलग तरह के खाद्य तेलों का इस्तेमाल करती हैं, जबकि भारत जैसे देशों में पाम ऑयल का प्रयोग अधिक होता है। इस पर सरकार ने कहा कि खाद्य तेलों का चयन कंपनियां बाजार, उपलब्धता और नियमों के आधार पर करती हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना कंपनियों की जिम्मेदारी है। सरकार ने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लेबलिंग एंड डिस्प्ले) रेगुलेशन, 2020 के तहत सभी कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने उत्पादों में इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल का नाम स्पष्ट रूप से पैकेट पर लिखें। अगर किसी स्नैक, बिस्कुट या अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थ में पाम ऑयल का इस्तेमाल किया गया है तो इसकी जानकारी सामग्री सूची में देना जरूरी है। इस नियम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को जागरूक बनाना है, ताकि वे खरीदारी करते समय उत्पाद की सामग्री को देखकर अपनी पसंद का फैसला कर सकें। सरकार ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानूनों को लागू करने और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की साझा जिम्मेदारी है। पाम ऑयल दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेलों में से एक है। इसका उपयोग खाद्य उद्योग में इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि यह अन्य कई तेलों की तुलना में सस्ता, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला और खाद्य उत्पादों की बनावट को बेहतर बनाने वाला माना जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तेल का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलित आहार जरूरी है। भारत में पैकेज्ड फूड बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का कहना है कि FSSAI लगातार खाद्य मानकों को मजबूत कर रहा है और कंपनियों को नियमों के अनुसार काम करना होगा। पाम ऑयल के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने साफ किया है कि यह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन कंपनियों को पारदर्शिता के साथ इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को देनी होगी।
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