आप आटा खा रहे हैं या सफेद पत्थर:यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई, मजदूर बनकर रिपोर्टर का खुलासा
‘ये सफेद पत्थर का चूरा है, इसे आटे में मिलाते हैं, जिससे ज्यादा मुनाफा हो। आने वाले समय में यह लोगों को इतनी बीमारियां करेगा कि डॉक्टर भी कहने लगेंगे- भाई तेरा इलाज नहीं है।’ यह कहना है आगरा के पास आटा फैक्ट्री में काम करने वाले ऑपरेटर सोनू कुमार का। वह बताता है कि फैक्ट्री मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं। ये मिलावटी आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा है। दैनिक भास्कर के अंडरकवर रिपोर्टर ने मजदूर बनकर आटे की फैक्ट्री में 25 दिन गुजारे। हम फैक्ट्री के उस हिस्से तक पहुंचे, जहां आटे में पत्थर का चूरा मिलाया जाता है। अंदर ऐसा सेटअप लगा है कि बटन दबाते ही पत्थर का चूरा आटे में मिक्स होने लगता है। मजदूर बने भास्कर रिपोर्टर ने अपने खुफिया कैमरे में पूरा सेटअप और प्रोसेस कैद की। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन... फिरोजाबाद, बुलंदशहर और अलीगढ़ में पिछले दिनों अफसरों ने ब्रांडेड आटे में पत्थर की मिलावट पकड़ी। हमने पड़ताल की तो पता चला कि कई फैक्ट्रियों में मिलावट का यह काला खेल चल रहा है। हाथरस और फिरोजाबाद की फैक्ट्रियों में अब भी आटे में पत्थर का चूरा मिलाया जा रहा है। हाथरस और फिरोजाबाद की 2 फैक्ट्रियों में हम मजदूर बनकर पहुंचे। दूसरे मजदूरों से मेलजोल बढ़ाया। ठेकेदारों से काम मांगा। 3 दिन भटकने पर हमें काम मिल गया। पहले दिन गेहूं की बोरियां उठाईं। दूसरे दिन गेहूं की निगरानी में ड्यूटी लगी। फिर बोरियों में भूसा भरने का काम मिला। पहले-दूसरे सप्ताह ऐसे ही मजदूरी करते रहे। तीसरे सप्ताह तक सुपरवाइजर का भरोसा जीत लिया। आखिरकार, जिसके लिए हम 2 सप्ताह से मजदूरी कर रहे थे, उस सीक्रेट जगह हमारी ड्यूटी लग गई। यह एक कमरा था, जहां अलग-अलग मशीनें लगी थीं। एक मशीन में पत्थर का चूरा भरा था, जो आटे में मिक्स हो रहा था। ऑपरेटर और मजदूर स्टोन पाउडर मिलाने का परसेंटेज सेट करने और निगरानी करने का काम करते हैं। हमने यह तो एक्सपोज कर दिया कि आटे में पत्थर मिला रहे हैं। लेकिन, इस खेल में कौन शामिल है? यह काम किस पैमाने पर हो रहा है? यह जानने के लिए अब हम आटा कारोबारी बने। हमारी मुलाकात टूंडला में फैक्ट्री ऑपरेटर सोनू कुमार से हुई। सोनू आटे में स्टोन पाउडर मिलाने की बारीकियां समझता है। हमने सोनू को बताया कि राजस्थान में आटा सप्लाई का टेंडर मिला है। हमें फैक्ट्री का सेटअप कराना है, जो आपसे करवाएंगे। सोनू ने मिलावटखोरी का पूरा खेल समझाया- रिपोर्टर : आटे में पत्थर का चूरा कितना मिलाएं... 20% या 30% तक? सोनू : 10% से कम रखो, नहीं तो आटे में कम्प्लेन आने लगती है। रिपोर्टर : मैक्सिमम कितने परसेंट तक मिला सकते हैं? सोनू : मार्केट में इस समय 10% चल रहा है। अगर वापसी नहीं होना है, तो 15% से 20% तक मिलावट कर सकते हैं। रिपोर्टर : पाउडर कौन-सा है? सोनू : सनसिल्क, सेलखड़ी (पत्थर के चूरे के प्रकार) है। जब आप उस पाउडर को लेने जाओ, तो खाकर देखना कि किरकिरा न हो। दूसरा, वह व्हाइट हो क्योंकि कुछ पीलेपन पर भी आते हैं। रिपोर्टर : पत्थर मिलाने के बाद आटे की रोटी में क्या फर्क आता है? सोनू : नहीं, कोई फर्क नहीं आता। रिपोर्टर : स्वाद में? सोनू : स्वाद में भी कोई फर्क नहीं, मैंने चेक की है रोटी इसकी। रिपोर्टर : आपने खाई है? सोनू : हां, खानी पड़ती है भाई। माल डालने पर देखते हैं न कि मार्केट में क्या रिजल्ट आएगा? वैसे मैं आपको एक बात बताऊं, यह जहर है। अगर चावल का आटा मिक्स करते हैं, तो कम से कम अन्न तो है। इससे आने वाले समय में लोगों में इतनी बीमारियां हो जाएंगी कि डॉक्टर मना करने लगेंगे, भाई तेरा इलाज नहीं है। मुनाफाखोरी का गणित क्या है? यह जानने के लिए हमने आटा फैक्ट्री के मालिक से मिलने की इच्छा जताई। ऑपरेटर सोनू ने हमें फिरोजाबाद के टूंडला में महाराजा भोग आटा नाम का ब्रांड चलाने वाले आटा फैक्ट्री मालिक रमन कुमार से मिलवाया- रमन : 9-10% पाउडर मिलाया तो एक किलो आटे पर 70-80 पैसे तुम्हारी जेब में आते रहेंगे। रिपोर्टर : 70-80 पैसे या इससे भी ज्यादा। रमन : हां, एक रुपए का प्रॉफिट आपको आता रहेगा। रिपोर्टर : मतलब, एक क्विंटल पर 100 रुपए प्रॉफिट। रमन : हां, और क्या? अगर 70-80 क्विंटल माल (स्टोन पाउडर मिला आटा) रोज निकल गया तो 7-8 हजार रुपए प्रॉफिट हो जाएगा। (आटा फैक्ट्री मालिक रमन ने मिलावटी आटा दिखाया) रमन : मेरा ये माल है, ये एक नंबर चल रहा है, 28 रुपए किलो जा रहा है। ऑपरेटर सोनू : मेरे पिताजी मशीन चला रहे हैं, कोई दिक्कत नहीं। रमन : मिक्सिंग (आटे में पत्थर की मिलावट) तो सब करते हैं। नहीं तो प्रॉफिट नहीं होता। तुम ही बताओ- गेहूं 25 रुपए किलो आ रहा है और 26.50 रुपए किलो में आटा बिक रहा है। केवल 1.50 रुपए का अंतर, जबकि इसमें 1.70 रुपए किलो का खर्च हो गया। ऐसे तो 20 पैसे और जा रहे हैं हमारे। इसलिए 10% पाउडर मिला रहे। रिपोर्टर : क्या पाउडर फैक्ट्री में रख सकते हैं? रमन : प्राइवेसी तो रखनी पड़ती है। पता नहीं कब, कौन अधिकारी आ जाए? हालांकि जो आते हैं, पैसे लेने आते हैं। हर महीने 5 हजार रुपए लेकर जाते हैं। अब जानिए, पत्थर का चूरा मिलाकर मुनाफाखोरी का गणित गेहूं का रेट : 2500 रुपए क्विंटल सफेद पत्थर के चूरे का रेट : 1400 रुपए क्विंटल पिसाई और लेबर खर्च : 170 रुपए क्विंटल 10% मिलावट पर लागत : 2560 रुपए क्विंटल बाजार में आटा बिकेगा : 2700 रुपए क्विंटल मुनाफा : 140 रुपए क्विंटल बाजार में उपलब्ध : ज्यादातर कंपनियां इतनी मिलावट कर रही है। 20% मिलावट पर - लागत : 2450 रुपए क्विंटल बाजार में आटा बिकेगा : 2700 रुपए क्विंटल मुनाफा : 250 रुपए क्विंटल बाजार में उपलब्ध : बड़े आयोजन, भंडारे, मिड डे मिल में इस तरह का आटा खपा रहे हैं। अब जानिए, मुनाफाखोरी कितनी है? एक फ्लोर मिल में 4 चक्की होती है। ये 10 घंटे में 100 क्विंटल गेहूं पीसती हैं। तब एक दिन का मुनाफा- 10% मिलावट पर: 14 हजार रुपए 20% मिलावट पर: 25 हजार रुपए एक साल में 90 लाख रुपए तक का मुनाफा एक फ्लोर मिल से कमा रहे हैं। स्टोन पाउडर का सेटअप कैसे लगाते हैं? इस सवाल के जवाब के लिए हम सोर्स के जरिए मैकेनिक सुनील कुमार से मिले। सुनील आटा फैक्ट्रियों में पत्थर का चूरा मिलाने का सेटअप लगाता है। सुनील ने हमें आगरा में शाहदरा पुलिस चौकी के पास बुलाया- रिपोर्टर : प्लांट लगाना है, मिलावट का सेटअप लगा देंगे? सुनील : ऐसी व्यवस्था कर दूंगा कि कोई फ्लाइंग टीम आ जाए, कोई फूड प्रोडक्ट वाले आ जाएं। उनको कुछ नहीं मिलेगा। रिपोर्टर : पत्थर का चूरा क्या भाव मिल जाएगा? सुनील : ये मिलेगा 12 से 14 रुपए किलो। पत्थर का चूरा राजस्थान से यहां कैसे आता है? इसके जवाब के लिए हमने हाथरस के डीलर विमल अग्रवाल से बात की। उसने हमको बताया कि वो हमें आटे में मिलाने के लिए जितना पाउडर चाहिए, दिला देंगे - रिपोर्टर : हमें आटे में मिलाने के लिए चाहिए, आटे में चल रहा है ये पाउडर? विमल : हां, आटे में चल रहा है अपना पाउडर। हर जगह (पैसे का इशारा करते हुए) ये चलता है। बहुत फ्लोर मिल वाले मिला रहे हैं। ये मिट्टी है पहाड़ों की, आप भी जानते हैं। कारोबारी विमल ने हमें पत्थर के पाउडर के सैंपल दिखाए। उसने दावा किया कि इसकी कोई कमी नहीं है। विमल हमें गोदाम ले गया, जहां पाउडर का स्टॉक भरा था। अब जानिए, पत्थर का सफेद चूरा क्या है? इस पाउडर को सेलखड़ी या सोपस्टोन बोला जाता है। ये राजस्थान के कुछ जिलों की माइंस से आता है। इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक आइटम्स, फेस क्रीम, प्लास्टिक दाना, पेंट, कागज और मूर्ति बनाने में होता है। इसे खाया नहीं जा सकता, लेकिन मुनाफे के लिए आटे में मिला रहे हैं। डॉक्टर बोले- स्टोन पाउडर खाने से लिवर-किडनी खराब हो सकती है लखनऊ के सीनियर फिजीशियन डॉ. ज्ञान तिवारी ने बताया- स्टोन पाउडर में कैल्शियम कार्बोनेट ज्यादा होता है। इस आटे से बनी रोटी खाएंगे, तो ये आंतों में जाकर फंस जाएगा। इससे पाचन तंत्र खराब हो जाता है। जैसा कि आजकल ज्यादातर लोगों को ऐसी समस्या आ रही है। मंत्री आशीष पटेल को सवाल भेजे, उन्होंने जवाब नहीं दिया इस मामले में हमने उपभोक्ता संरक्षण मंत्री आशीष पटेल से बात करने की कोशिश की। पहले दिन उनका फोन उठा और प्रतिनिधि ने सवाल पूछे तो हमने बता दिए। इसके बाद हमने 7 दिनों में 12 बार कॉल किया, लेकिन हर बार मंत्री पटेल के व्यस्त होने का बहाना बनाकर बात नहीं कराई गई। पीआरओ अमरेश को भी हमने सवाल भेजकर जवाब मांगे, लेकिन उन्होंने भी जवाब नहीं दिलवाए। क्या आपके आटे में स्टोन पाउडर है? ऐसे करें पहचान मिड-डे मील में खिला रहे घटिया आटा हमने पश्चिमी यूपी के 3 स्कूलों के मिड-डे मील के आटे की जांच की। हमने एक गिलास में पानी भरा और उसका थोड़ा आटा मिलाया। ऐसा करने पर शुद्ध आटा पानी में घुल जाता है और स्टोन वाला आटा तली में बैठ जाता है। यहां तीनों जगह आटा पानी के तली में बैठ गया। इससे ये साफ था कि बच्चों के मिड-डे में यूज किए जा रहे इस आटे में स्टोन पाउडर है। इसी स्टोन पाउडर मिले आटे की रोटियां बच्चों को खिलाई जा रही हैं। मिड-डे मील के लिए आटा 28 रुपए किलो में खरीदा जा रहा है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी बोर्ड ऑफिस में फेल स्टूडेंट को बना रहे टॉपर, 20 हजार में 95% मार्क्स, वॉट्सएप पर भेजी मार्कशीट यूपी बोर्ड के पेपर में नंबर बढ़ाने के गिरोह को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर की महिला रिपोर्टर छात्रा की मौसी बनी। नंबर बढ़ाने वालों से बात कर इस खेल की तह तक गए। प्रयागराज बोर्ड ऑफिस और गोरखपुर रीजनल ऑफिस के दलालों और कर्मचारियों से मिलकर डील की। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन...
- Hindi News - Local - Uttar pradesh - Wheat Flour White Stone Adulteration Exposed; UP Factories Investigation | Ground Report भास्कर इन्वेस्टिगेशनआप आटा खा रहे हैं या सफेद पत्थर:यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई, मजदूर बनकर रिपोर्टर का खुलासा - कॉपी लिंक ‘ये सफेद पत्थर का चूरा है, इसे आटे में मिलाते हैं, जिससे ज्यादा मुनाफा हो। आने वाले समय में यह लोगों को इतनी बीमारियां करेगा कि डॉक्टर भी कहने लगेंगे- भाई तेरा इलाज नहीं है।’ यह कहना है आगरा के पास आटा फैक्ट्री में काम करने वाले ऑपरेटर सोनू कुमार का। वह बताता है कि फैक्ट्री मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं। ये मिलावटी आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा है। दैनिक भास्कर के अंडरकवर रिपोर्टर ने मजदूर बनकर आटे की फैक्ट्री में 25 दिन गुजारे। हम फैक्ट्री के उस हिस्से तक पहुंचे, जहां आटे में पत्थर का चूरा मिलाया जाता है। अंदर ऐसा सेटअप लगा है कि बटन दबाते ही पत्थर का चूरा आटे में मिक्स होने लगता है। मजदूर बने भास्कर रिपोर्टर ने अपने खुफिया कैमरे में पूरा सेटअप और प्रोसेस कैद की। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन... फिरोजाबाद, बुलंदशहर और अलीगढ़ में पिछले दिनों अफसरों ने ब्रांडेड आटे में पत्थर की मिलावट पकड़ी। हमने पड़ताल की तो पता चला कि कई फैक्ट्रियों में मिलावट का यह काला खेल चल रहा है। हाथरस और फिरोजाबाद की फैक्ट्रियों में अब भी आटे में पत्थर का चूरा मिलाया जा रहा है। हाथरस और फिरोजाबाद की 2 फैक्ट्रियों में हम मजदूर बनकर पहुंचे। दूसरे मजदूरों से मेलजोल बढ़ाया। ठेकेदारों से काम मांगा। 3 दिन भटकने पर हमें काम मिल गया। पहले दिन गेहूं की बोरियां उठाईं। दूसरे दिन गेहूं की निगरानी में ड्यूटी लगी। फिर बोरियों में भूसा भरने का काम मिला। पहले-दूसरे सप्ताह ऐसे ही मजदूरी करते रहे। तीसरे सप्ताह तक सुपरवाइजर का भरोसा जीत लिया। आखिरकार, जिसके लिए हम 2 सप्ताह से मजदूरी कर रहे थे, उस सीक्रेट जगह हमारी ड्यूटी लग गई। यह एक कमरा था, जहां अलग-अलग मशीनें लगी थीं। एक मशीन में पत्थर का चूरा भरा था, जो आटे में मिक्स हो रहा था। ऑपरेटर और मजदूर स्टोन पाउडर मिलाने का परसेंटेज सेट करने और निगरानी करने का काम करते हैं। हमने यह तो एक्सपोज कर दिया कि आटे में पत्थर मिला रहे हैं। लेकिन, इस खेल में कौन शामिल है? यह काम किस पैमाने पर हो रहा है? यह जानने के लिए अब हम आटा कारोबारी बने। हमारी मुलाकात टूंडला में फैक्ट्री ऑपरेटर सोनू कुमार से हुई। सोनू आटे में स्टोन पाउडर मिलाने की बारीकियां समझता है। हमने सोनू को बताया कि राजस्थान में आटा सप्लाई का टेंडर मिला है। हमें फैक्ट्री का सेटअप कराना है, जो आपसे करवाएंगे। सोनू ने मिलावटखोरी का पूरा खेल समझाया- रिपोर्टर : आटे में पत्थर का चूरा कितना मिलाएं... 20% या 30% तक? सोनू : 10% से कम रखो, नहीं तो आटे में कम्प्लेन आने लगती है। रिपोर्टर : मैक्सिमम कितने परसेंट तक मिला सकते हैं? सोनू : मार्केट में इस समय 10% चल रहा है। अगर वापसी नहीं होना है, तो 15% से 20% तक मिलावट कर सकते हैं। रिपोर्टर : पाउडर कौन-सा है? सोनू : सनसिल्क, सेलखड़ी (पत्थर के चूरे के प्रकार) है। जब आप उस पाउडर को लेने जाओ, तो खाकर देखना कि किरकिरा न हो। दूसरा, वह व्हाइट हो क्योंकि कुछ पीलेपन पर भी आते हैं। रिपोर्टर : पत्थर मिलाने के बाद आटे की रोटी में क्या फर्क आता है? सोनू : नहीं, कोई फर्क नहीं आता। रिपोर्टर : स्वाद में? सोनू : स्वाद में भी कोई फर्क नहीं, मैंने चेक की है रोटी इसकी। रिपोर्टर : आपने खाई है? सोनू : हां, खानी पड़ती है भाई। माल डालने पर देखते हैं न कि मार्केट में क्या रिजल्ट आएगा? वैसे मैं आपको एक बात बताऊं, यह जहर है। अगर चावल का आटा मिक्स करते हैं, तो कम से कम अन्न तो है। इससे आने वाले समय में लोगों में इतनी बीमारियां हो जाएंगी कि डॉक्टर मना करने लगेंगे, भाई तेरा इलाज नहीं है। मुनाफाखोरी का गणित क्या है? यह जानने के लिए हमने आटा फैक्ट्री के मालिक से मिलने की इच्छा जताई। ऑपरेटर सोनू ने हमें फिरोजाबाद के टूंडला में महाराजा भोग आटा नाम का ब्रांड चलाने वाले आटा फैक्ट्री मालिक रमन कुमार से मिलवाया- रमन : 9-10% पाउडर मिलाया तो एक किलो आटे पर 70-80 पैसे तुम्हारी जेब में आते रहेंगे। रिपोर्टर : 70-80 पैसे या इससे भी ज्यादा। रमन : हां, एक रुपए का प्रॉफिट आपको आता रहेगा। रिपोर्टर : मतलब, एक क्विंटल पर 100 रुपए प्रॉफिट। रमन : हां, और क्या? अगर 70-80 क्विंटल माल (स्टोन पाउडर मिला आटा) रोज निकल गया तो 7-8 हजार रुपए प्रॉफिट हो जाएगा। (आटा फैक्ट्री मालिक रमन ने मिलावटी आटा दिखाया) रमन : मेरा ये माल है, ये एक नंबर चल रहा है, 28 रुपए किलो जा रहा है। ऑपरेटर सोनू : मेरे पिताजी मशीन चला रहे हैं, कोई दिक्कत नहीं। रमन : मिक्सिंग (आटे में पत्थर की मिलावट) तो सब करते हैं। नहीं तो प्रॉफिट नहीं होता। तुम ही बताओ- गेहूं 25 रुपए किलो आ रहा है और 26.50 रुपए किलो में आटा बिक रहा है। केवल 1.50 रुपए का अंतर, जबकि इसमें 1.70 रुपए किलो का खर्च हो गया। ऐसे तो 20 पैसे और जा रहे हैं हमारे। इसलिए 10% पाउडर मिला रहे। रिपोर्टर : क्या पाउडर फैक्ट्री में रख सकते हैं? रमन : प्राइवेसी तो रखनी पड़ती है। पता नहीं कब, कौन अधिकारी आ जाए? हालांकि जो आते हैं, पैसे लेने आते हैं। हर महीने 5 हजार रुपए लेकर जाते हैं। अब जानिए, पत्थर का चूरा मिलाकर मुनाफाखोरी का गणित गेहूं का रेट : 2500 रुपए क्विंटल सफेद पत्थर के चूरे का रेट : 1400 रुपए क्विंटल पिसाई और लेबर खर्च : 170 रुपए क्विंटल 10% मिलावट पर लागत : 2560 रुपए क्विंटल बाजार में आटा बिकेगा : 2700 रुपए क्विंटल मुनाफा : 140 रुपए क्विंटल बाजार में उपलब्ध : ज्यादातर कंपनियां इतनी मिलावट कर रही है। 20% मिलावट पर - लागत : 2450 रुपए क्विंटल बाजार में आटा बिकेगा : 2700 रुपए क्विंटल मुनाफा : 250 रुपए क्विंटल बाजार में उपलब्ध : बड़े आयोजन, भंडारे, मिड डे मिल में इस तरह का आटा खपा रहे हैं। अब जानिए, मुनाफाखोरी कितनी है? एक फ्लोर मिल में 4 चक्की होती है। ये 10 घंटे में 100 क्विंटल गेहूं पीसती हैं। तब एक दिन का मुनाफा- 10% मिलावट पर: 14 हजार रुपए 20% मिलावट पर: 25 हजार रुपए एक साल में 90 लाख रुपए तक का मुनाफा एक फ्लोर मिल से कमा रहे हैं। स्टोन पाउडर का सेटअप कैसे लगाते हैं? इस सवाल के जवाब के लिए हम सोर्स के जरिए मैकेनिक सुनील कुमार से मिले। सुनील आटा फैक्ट्रियों में पत्थर का चूरा मिलाने का सेटअप लगाता है। सुनील ने हमें आगरा में शाहदरा पुलिस चौकी के पास बुलाया- रिपोर्टर : प्लांट लगाना है, मिलावट का सेटअप लगा देंगे? सुनील : ऐसी व्यवस्था कर दूंगा कि कोई फ्लाइंग टीम आ जाए, कोई फूड प्रोडक्ट वाले आ जाएं। उनको कुछ नहीं मिलेगा। रिपोर्टर : पत्थर का चूरा क्या भाव मिल जाएगा? सुनील : ये मिलेगा 12 से 14 रुपए किलो। पत्थर का चूरा राजस्थान से यहां कैसे आता है? इसके जवाब के लिए हमने हाथरस के डीलर विमल अग्रवाल से बात की। उसने हमको बताया कि वो हमें आटे में मिलाने के लिए जितना पाउडर चाहिए, दिला देंगे - रिपोर्टर : हमें आटे में मिलाने के लिए चाहिए, आटे में चल रहा है ये पाउडर? विमल : हां, आटे में चल रहा है अपना पाउडर। हर जगह (पैसे का इशारा करते हुए) ये चलता है। बहुत फ्लोर मिल वाले मिला रहे हैं। ये मिट्टी है पहाड़ों की, आप भी जानते हैं। कारोबारी विमल ने हमें पत्थर के पाउडर के सैंपल दिखाए। उसने दावा किया कि इसकी कोई कमी नहीं है। विमल हमें गोदाम ले गया, जहां पाउडर का स्टॉक भरा था। अब जानिए, पत्थर का सफेद चूरा क्या है? इस पाउडर को सेलखड़ी या सोपस्टोन बोला जाता है। ये राजस्थान के कुछ जिलों की माइंस से आता है। इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक आइटम्स, फेस क्रीम, प्लास्टिक दाना, पेंट, कागज और मूर्ति बनाने में होता है। इसे खाया नहीं जा सकता, लेकिन मुनाफे के लिए आटे में मिला रहे हैं। डॉक्टर बोले- स्टोन पाउडर खाने से लिवर-किडनी खराब हो सकती है लखनऊ के सीनियर फिजीशियन डॉ. ज्ञान तिवारी ने बताया- स्टोन पाउडर में कैल्शियम कार्बोनेट ज्यादा होता है। इस आटे से बनी रोटी खाएंगे, तो ये आंतों में जाकर फंस जाएगा। इससे पाचन तंत्र खराब हो जाता है। जैसा कि आजकल ज्यादातर लोगों को ऐसी समस्या आ रही है। मंत्री आशीष पटेल को सवाल भेजे, उन्होंने जवाब नहीं दिया इस मामले में हमने उपभोक्ता संरक्षण मंत्री आशीष पटेल से बात करने की कोशिश की। पहले दिन उनका फोन उठा और प्रतिनिधि ने सवाल पूछे तो हमने बता दिए। इसके बाद हमने 7 दिनों में 12 बार कॉल किया, लेकिन हर बार मंत्री पटेल के व्यस्त होने का बहाना बनाकर बात नहीं कराई गई। पीआरओ अमरेश को भी हमने सवाल भेजकर जवाब मांगे, लेकिन उन्होंने भी जवाब नहीं दिलवाए। क्या आपके आटे में स्टोन पाउडर है? ऐसे करें पहचान मिड-डे मील में खिला रहे घटिया आटा हमने पश्चिमी यूपी के 3 स्कूलों के मिड-डे मील के आटे की जांच की। हमने एक गिलास में पानी भरा और उसका थोड़ा आटा मिलाया। ऐसा करने पर शुद्ध आटा पानी में घुल जाता है और स्टोन वाला आटा तली में बैठ जाता है। यहां तीनों जगह आटा पानी के तली में बैठ गया। इससे ये साफ था कि बच्चों के मिड-डे में यूज किए जा रहे इस आटे में स्टोन पाउडर है। इसी स्टोन पाउडर मिले आटे की रोटियां बच्चों को खिलाई जा रही हैं। मिड-डे मील के लिए आटा 28 रुपए किलो में खरीदा जा रहा है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी बोर्ड ऑफिस में फेल स्टूडेंट को बना रहे टॉपर, 20 हजार में 95% मार्क्स, वॉट्सएप पर भेजी मार्कशीट यूपी बोर्ड के पेपर में नंबर बढ़ाने के गिरोह को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर की महिला रिपोर्टर छात्रा की मौसी बनी। नंबर बढ़ाने वालों से बात कर इस खेल की तह तक गए। प्रयागराज बोर्ड ऑफिस और गोरखपुर रीजनल ऑफिस के दलालों और कर्मचारियों से मिलकर डील की। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन...
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