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अपहरण मामले में आरोपी दौलत केवट की जमानत याचिका खारिज

अपहरण मामले में आरोपी दौलत केवट की जमानत याचिका खारिज

Marwahi. मरवाही। मरवाही के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने अपहरण के गंभीर मामले में आरोपी दौलत केवट (46 वर्ष) की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज पुराने आपराधिक मामलों, जांच में सामने आए तथ्यों और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया है। आरोपी दौलत केवट मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम भाद का निवासी है। उसके खिलाफ मरवाही थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 110/2026 के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की थी। यह मामला एक व्यक्ति के कथित अपहरण से जुड़ा हुआ है।जानकारी के अनुसार, 20 जून 2026 को दुर्गा यादव ने मरवाही थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि उनके पति गिरीश यादव का घर से अपहरण कर लिया गया है। शिकायत के मुताबिक, दो अज्ञात व्यक्ति खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनके घर पहुंचे थे और पिस्तौल दिखाकर गिरीश यादव को जबरदस्ती अपने साथ ले गए थे। पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने गिरीश यादव को नीले रंग की कार में बैठाया और वहां से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अपहरण से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की।जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी दौलत केवट को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी और अपहृत गिरीश यादव के बीच पुरानी दुश्मनी थी। पुलिस का कहना है कि गिरीश यादव ने पहले गांजा से जुड़े एक मामले में सूचना देकर दौलत केवट को पकड़वाने में मदद की थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद और रंजिश चल रही थी। आरोप है कि इसी पुरानी दुश्मनी के चलते दौलत केवट ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर गिरीश यादव के अपहरण की साजिश में सहयोग किया।जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए कहा कि दौलत केवट को पुरानी रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। अधिवक्ता ने अदालत के सामने तर्क रखा कि आरोपी का अपहरण की घटना में कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं है और उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी सामान्य जीवन जीने वाला व्यक्ति है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने अदालत से मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत मंजूर करने का अनुरोध किया।वहीं, राज्य शासन की ओर से लोक अभियोजक और मरवाही थाना पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दौलत केवट के खिलाफ भालूमाड़ा और पेंड्रा थाना क्षेत्रों में आबकारी एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, जुआ एक्ट और एसटी/एससी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज हैं। अभियोजन ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकता है।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केस डायरी और आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि आरोपी की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता रही है और उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के बाहर आने पर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने आरोपी द्वारा भविष्य में दोबारा अपराध किए जाने की आशंका को भी गंभीरता से लिया।इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने आरोपी दौलत केवट की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। आरोपी की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद अपहरण मामले में आरोपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस अब मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और अपहरण की पूरी घटना से जुड़े तथ्यों की जांच आगे बढ़ा रही है।

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