राजस्थान में मानसून की रफ्तार धीमी, पश्चिमी जिलों में बारिश का अलर्ट

जयपुर : राजस्थान में मानसून की गतिविधियों में फिलहाल कमी देखने को मिल रही है। शनिवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने के कारण तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं उमस ने लोगों की परेशानी...
जयपुर : राजस्थान में मानसून की गतिविधियों में फिलहाल कमी देखने को मिल रही है। शनिवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने के कारण तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। हालांकि पश्चिमी राजस्थान के कुछ जिलों में बादलों की सक्रियता बनी रही और कई स्थानों पर अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने रविवार को पश्चिमी राजस्थान के तीन जिलों के लिए बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।मौसम विभाग के अनुसार, रविवार 26 जुलाई को जैसलमेर, बाड़मेर और जालोर जिलों में बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। विभाग ने इन जिलों के लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी है।पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में मानसून की चाल कमजोर बनी हुई है। प्रदेश के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही तो हो रही है, लेकिन व्यापक स्तर पर बारिश नहीं हो रही। इसके चलते दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई है और वातावरण में नमी के कारण उमस का असर बढ़ गया है।शनिवार को राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में मौसम सामान्य रूप से साफ रहा। सुबह से ही धूप निकलने के कारण गर्मी का असर महसूस किया गया। हालांकि बीच-बीच में बादलों की हल्की आवाजाही भी देखने को मिली। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की गतिविधियां कमजोर होने के कारण तापमान में यह उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है।वहीं, पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में मानसूनी बादलों ने सक्रियता दिखाई। जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के कारण मौसम सुहावना हुआ। किसानों के लिए भी यह बारिश राहत लेकर आई है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए इस समय अच्छी बारिश की आवश्यकता होती है।मौसम विभाग ने बताया कि प्रदेश में मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल बारिश का प्रभाव कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही रहने की संभावना है, लेकिन आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।28 जुलाई से फिर सक्रिय होगा मानसूनमौसम विभाग के अनुसार, 28 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए लो-प्रेशर सिस्टम के प्रभाव से राजस्थान में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। इस सिस्टम के कारण पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है।मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए सिस्टम के प्रभाव से कोटा, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग के कई इलाकों में बारिश हो सकती है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर तेज बारिश की स्थिति भी बन सकती है।राजस्थान में मानसून का प्रदर्शन अब तक कई क्षेत्रों में सामान्य रहा है, लेकिन कुछ इलाकों में बारिश का वितरण असमान बना हुआ है। कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कई क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त वर्षा का इंतजार है। ऐसे में किसानों और आम लोगों की नजरें आगामी मानसूनी सिस्टम पर टिकी हुई हैं।किसानों को बारिश का इंतजारराजस्थान की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। खरीफ सीजन में बाजरा, मक्का, मूंगफली, कपास और दलहन जैसी फसलों के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी होती है। मानसून की धीमी रफ्तार से कुछ क्षेत्रों के किसानों की चिंता बढ़ी है।हालांकि कृषि विभाग और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि मानसून दोबारा सक्रिय होता है तो फसलों को इसका लाभ मिलेगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।प्रशासन ने जारी की सतर्कता की अपीलमौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सतर्क है। बारिश के दौरान जलभराव, बिजली गिरने और तेज हवाओं जैसी स्थितियों से बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान मौसम में तेजी से बदलाव आता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए और अनावश्यक जोखिम से बचना चाहिए।फिलहाल राजस्थान में मानसून कमजोर जरूर पड़ा है, लेकिन 28 जुलाई के बाद नए मौसम तंत्र के प्रभाव से एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने की उम्मीद है। पश्चिमी जिलों में रविवार को बारिश की संभावना के बीच अब सभी की निगाहें बंगाल की खाड़ी से बनने वाले नए सिस्टम पर टिकी हैं, जो प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों को गति दे सकता है।
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