पांढुर्ना - सौसर रेल लाइन की स्वीकृति के लिए जनआंदोलन तेज

पांढुर्ना - सौसर रेल लाइन की स्वीकृति के लिए जनआंदोलन तेज 600 नागरिकों व 45 ग्राम पंचायतों ने सांसद को सौंपा ज्ञापन पांढुर्ना। विदर्भ के सीमावर्ती और छिंदवाड़ा जिले का...
पांढुर्ना - सौसर रेल लाइन की स्वीकृति के लिए जनआंदोलन तेज पांढुर्ना - सौसर रेल लाइन की स्वीकृति के लिए जनआंदोलन तेज 600 नागरिकों व 45 ग्राम पंचायतों ने सांसद को सौंपा ज्ञापन पांढुर्ना। विदर्भ के सीमावर्ती और छिंदवाड़ा जिले का एक प्रमुख हिस्सा रहा पांढुर्ना जिले में वर्षों से रेल सुविधाओं के विस्तार की मांग लगातार उठती रही है, लेकिन अपेक्षित विकास अब तक नहीं हो पाया है। रेल सेवाओं की कमी के कारण जिले के हजारों यात्रियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और किसानों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं के स्थायी समाधान के उद्देश्य से अब पीड़ित नागरिकों ने "जागरूकता और एकजुटता" को आधार बनाकर एक संगठित अभियान प्रारंभ किया है। इस अभियान का सबसे प्रमुख उद्देश्य पांढुर्ना–सौसर नई रेल लाइन की स्वीकृति प्राप्त कर राले लाइन का निर्माण करवाना है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इस रेल परियोजना के ेस्वीकृति के लिए विभिन्न स्तरोँ पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं तथा रेलवे स्तर पर भी इस रेल लिंक के महत्व को स्वीकार किया जा चुका है। संबंधित दस्तावेज भी अभियान समिति के पास उपलब्ध हैं। पदाधिकारियों का मानना है कि यदि यह रेल लाइन स्वीकृत हो जाती है तो पांढुर्ना का रेलवे नेटवर्क में महत्व बढ़ेगा और इसके साथ ही जिले की अन्य लंबित रेल मांगों के पूरा होने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। जिले की प्रमुख रेल समस्याएं पांढुर्ना जिले के नागरिक लंबे समय से अनेक रेल संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रमुख समस्याओं में— पांढुर्ना–सौसर नई रेल लाइन का अभाव। क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप नई ट्रेनों का संचालन न होना। कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं मिलना। यात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप रेल सुविधाओं का विस्तार न होना। क्षेत्रीय विकास एवं उद्योग-व्यापार को गति देने वाले रेल संपर्कों का अभाव। आसपास के जिलों से बेहतर रेल कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण यात्रियों को लंबी दूरी सड़क मार्ग से तय करनी पड़ती है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इन सभी समस्याओं का मूल समाधान पांढुर्ना–सौसर रेल लाइन की स्वीकृति से संभव हो सकता है। कई जिलों को मिलेगा सीधा लाभ प्रस्तावित रेल लिंक केवल पांढुर्ना और छिंदवाड़ा जिले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सिवनी, नैनपुर और मंडला जैसे क्षेत्रों के लाखों लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस रेल संपर्क के विकसित होने पर भविष्य में मंडला से मुंबई तक नई रेल सेवा प्रारंभ होने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। इसी कारण अभियान के तहत इन क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों एवं सांसदों का समर्थन प्राप्त करने की रणनीति भी बनाई जा रही है। स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए सभी सदस्यों से स्वयंसेवक के रूप में सहयोग करने की अपील की गई है। इसके तहत नागरिक अपने-अपने क्षेत्रों से ई-मेल, एसएमएस, आरटीआई और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली ( सीपीजीआरएएमएस) जैसे माध्यमों से रेलवे अधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर पांढुर्ना, भोपाल, नागपुर, मुंबई, छिंदवाड़ा, सौसर तथा जबलपुर में संबंधित अधिकारियों से व्यक्तिगत मुलाकात कर भी मांग को प्रभावी ढंग से रखा जाएगा। रेलवे विषयों तक सीमित रहेगा समूह अभियान को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए व्हाट्सएप समूह में केवल रेलवे से संबंधित संदेश ही साझा किए जाएंगे। अन्य प्रकार के फॉरवर्ड संदेश, फोटो अथवा मनोरंजन संबंधी सामग्री स्वीकार नहीं की जाएगी। समूह के प्रशासक सभी संदेशों की समीक्षा कर अनावश्यक सामग्री हटाएंगे, जिससे अभियान पूरी तरह अपने उद्देश्य पर केंद्रित रह सके। सांसद को सौंपा गया जनसमर्थन युक्त ज्ञापन अभियान के तहत 17 जुलाई 2026 को सांसद विवेक साहू को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन पर पांढुर्ना और सौसर तहसील की लगभग 25 संस्थाओं, 45 ग्राम पंचायतों, करीब 600 नागरिकों तथा पूर्व नगराध्यक्ष प्रविण पालीवाल के हस्ताक्षर शामिल थे। सांसद ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस विषय को रेल मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे। इस पहल को स्थानीय छिंदवाड़ा के एक दैनिक समाचार पत्र ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया। जनभागीदारी की अपील अभियान से जुड़े लोगों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे पांढुर्ना और आसपास के क्षेत्रों के रेल विकास के इस प्रयास में सहभागी बनना चाहते हैं तो समूह से जुड़े रहें तथा अपने ऐसे मित्रों और नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ें जो क्षेत्र के रेल विकास के लिए सकारात्मक योगदान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि व्यापक जनसमर्थन, निरंतर जनजागरण और एकजुट प्रयासों से ही पांढुर्ना की वर्षों पुरानी रेल समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
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