भगवान श्रीराम के दिव्य धनुष का नाम क्या था? जिस पर चढ़ा बाण लक्ष्य भेदे बिना नहीं लौटता था, जानिए इसकी कथा

Ramayana Katha: हिन्दू महाकाव्य रामायण में भगवान श्रीराम को केवल मर्यादा पुरुषोत्तम ही नहीं, बल्कि अद्वितीय धनुर्धर के रूप में भी जाने जाते हैं. उनके हाथों में जो दिव्य धनुष और बाण होते थे, उनका जिक्र कई ग्रंथों और लोककथाओं में मिलता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम के तरकश से निकला बाण अपने लक्ष्य को भेदे बिना कभी वापस नहीं लौटता था. यही कारण है कि श्रीराम के शौर्य, दिव्य अस्त्रों और धनुष को लेकर लोगों में आज भी गहरी जिज्ञासा बनी रहती है. हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव के धनुष का नाम ‘पिनाक’ था, जिसे श्री राम ने सीता स्वयंवर में तोड़ा था. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वयं श्री राम के पास जो दिव्य धनुष था, उसका अपना एक नाम था. ऐसे सवाल है कि आखिर, भगवान राम के दिव्य धनुष का नाम क्या था? श्रीराम के धनुष से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं क्या कहती हैं? आइए जानते हैं इस बारे में- श्रीराम के धनुष का नाम क्या था? रामायण और पुराणों की कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के पास ‘कोदंड’ (Kodanda) नाम का दिव्य धनुष था. इसी कारण उन्हें ‘कोदंड राम’ भी कहा जाता है. यह धनुष भगवान श्रीराम की पहचान माना जाता है और दक्षिण भारत के अनेक मंदिरों में उनकी प्रतिमाएं कोदंड धनुष धारण किए हुए दिखाई देती हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि जनकपुरी के स्वयंवर में जिस शिव धनुष (पिनाक) को श्रीराम ने तोड़ा था, वह उनका धनुष नहीं था. वह भगवान शिव का दिव्य धनुष था, जिसे प्रत्यंचा चढ़ाने के प्रयास में श्रीराम ने भंग कर दिया. इसके बाद वे अपने कोदंड धनुष के साथ ही हमेशा दिखाई दिए. श्रीराम के बाण को क्यों कहा जाता था अचूक? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के बाण केवल साधारण तीर नहीं थे, बल्कि दिव्य अस्त्रों की शक्ति से संपन्न थे. महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम को अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान दिया था. इन्हीं दिव्य अस्त्रों के प्रभाव से उनके बाण लक्ष्य का पीछा करते हुए उसे भेदते थे. लोकमान्यता है कि, दिव्य संकल्प और धर्म की शक्ति से युक्त श्रीराम का बाण व्यर्थ नहीं जाता था. हालांकि, ‘बाण लक्ष्य भेदकर वापस तरकश में लौट आता था’ जैसी बातें मुख्य रूप से लोककथाओं में प्रचलित हैं. वाल्मीकि रामायण में इसका स्पष्ट वर्णन तो नहीं है, लेकिन उनके बाणों को अचूक और दिव्य जरूर बताया गया है. महर्षि विश्वामित्र से मिली थी अस्त्रों की शिक्षा बालकांड के अनुसार, महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ वन में ले गए थे. वहीं, उन्होंने दोनों भाइयों को अनेक दिव्य अस्त्रों और शस्त्रों का ज्ञान दिया. इसके बाद श्रीराम ने ताड़का, सुबाहु जैसे राक्षसों का वध किया और आगे चलकर रावण सहित अनेक शक्तिशाली योद्धाओं को पराजित किया. कोदंड धनुष का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैष्णव परंपरा में कोदंड केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य की रक्षा का प्रतीक माना जाता है. जब भी अधर्म का नाश करने की बात आती है, भगवान श्रीराम अपने कोदंड धनुष के साथ स्मरण किए जाते हैं.
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