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स्टेशन पर पैदल पुल बंद, रोजाना यात्रियों को हो रही दिक्कत; जिम्मेदार बेपरवाह

स्टेशन पर पैदल पुल बंद, रोजाना यात्रियों को हो रही दिक्कत; जिम्मेदार बेपरवाह

जबलपुर — मदन महल रेलवे स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों और आम राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के...

स्टेशन पर पैदल पुल बंद, रोजाना यात्रियों को हो रही दिक्कत; जिम्मेदार बेपरवाह जबलपुर — मदन महल रेलवे स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों और आम राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के पैदल यात्रियों के लिए बने फुट ओवरब्रिज (FOB) पर ताला जड़ दिया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों और यात्रियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अचानक बंद किया गया फुट ओवरब्रिज मदन महल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 की तरफ आने-जाने वाले आम नागरिकों और यात्रियों के सुगम आवागमन के लिए फुट ओवरब्रिज का निर्माण किया गया था। इस मार्ग से लोग आसानी से एक तरफ से दूसरी तरफ और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर आते-जाते थे। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से इस पुल को पूरी तरह बंद कर दिए जाने के कारण राहगीरों की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं। टिकट चेकिंग के नाम पर हो रही अनचाही वसूली फुट ओवरब्रिज बंद होने के कारण अब स्थानीय लोगों और गैर-यात्रियों को मजबूरी में स्टेशन परिसर के अंदर वाले रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास तैनात टिकट कलेक्टर (TC) इन रास्तों से गुजरने वाले आम लोगों से वैध टिकट की मांग करते हैं। टिकट न होने पर कई मामलों में भारी जुर्माने की कार्रवाई की जाती है, जिससे आम जनता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बाद भी उदासीन बना प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों और यात्रियों द्वारा कई बार रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से स्थिति में सुधार के लिए कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जिससे जनमानस में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। उच्चाधिकारियों के दबाव में बंद किया गया मार्ग स्टेशन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही इस आवाजाही मार्ग को बंद किया गया है। रेलवे के स्थानीय अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि पैदल यात्रियों के लिए इस फुट ओवरब्रिज को बंद नहीं किया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक दबाव के चलते वे भी विवश हैं। आम जनता की बुनियादी समस्याओं के प्रति जिम्मेदारों की इस उदासीनता के कारण लोगों का गुस्सा फूट रहा है।

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