गुरुग्राम में बुलडोजर ऐक्शन, डीएलएफ में सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई

गुरुग्राम के डीएलएफ में भारी विरोध के बीच शुक्रवार को प्रशासन का बुलडोजर चला। हालांकि, मौके पर पुलिस बल के मौजूद होने से तोड़फोड़ की कार्रवाई में कोई रुकावट नहीं आई। इस दौरान 10 मकानों में सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।
नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने शुक्रवार को विरोध के बीच गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-तीन के एस और टी ब्लॉक में 10 मकानों में सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई हुई। मौके पर पुलिस बल मौजूद था, जिसके चलते तोड़फोड़ अभियान में किसी तरह की रुकावट नहीं आई। यह अभियान डीटीपीई अमित मधोलिया के नेतृत्व में चलाया गया।दोपहर करीब एक बजे तोड़फोड़ अभियान की शुरुआत डीएलएफ फेज-तीन के एस ब्लॉक से हुई। इस ब्लॉक में चार मकानों पर कार्रवाई की गई। एक मकान में स्टिल्ट पार्किंग में अवैध रूप से कमरे और शौचालय का निर्माण किया हुआ था। छोटे बुलडोजर ने मकान के अंदर घुसकर इन अवैध निर्माण को मलबे में मिला दिया।10 मिनट का समय दियाइसके बाद डीटीपीई एस ब्लॉक में मकान नंबर 9/21-22 पर पहुंच गए। स्टिल्ट के साथ यह मकान चार मंजिल का बना हुआ था। बेसमेंट में आर्किटेक्ट संजय टंडन का कार्यालय अवैध रूप से चल रहा था। डीटीपीई जब बेसमेंट में पहुंचें तो करीब 10 से 12 कर्मचारी काम कर रहे थे। डीटीपीई ने बेसमेंट खाली करने के लिए 10 मिनट का समय दिया। सभी कर्मचारियों के बाहर जाने के बाद बेसमेंट को सील कर दिया। एस ब्लॉक के एक मकान की स्टिल्ट पार्किंग में ड्राइंग रूम और शौचालय बनाया हुआ था।महिला ने विरोध कियाटी ब्लॉक में स्टिल्ट के साथ चार मंजिला एक मकान में डीटीपीई अमित मधोलिया पहुंच गए। यहां एक बुजुर्ग महिला ने डीटीपीई की तरफ से स्टिल्ट पार्किंग में अवैध रूप से निर्मित कमरों को तोड़ने का विरोध किया। बुजुर्ग महिला ने उसे बताया कि वह इनमें से एक कमरे में रहती है। उसके लिए अभी सामान निकालना संभव नहीं है। डीटीपीई के आदेश पर स्टिल्ट पार्किंग में अवैध निर्माण को सील कर दिया। डीटीपीई ने करीब साढ़े चार किमी लंबी सड़कों से अतिक्रमण हटवाया। लोगों ने अपने मकानों के बाहर ग्रिल लगाकर अतिक्रमण किया हुआ था।नोटिस पर विरोध जतायाफरीदाबाद के सीटू जिला कमेटी ने सेक्टर-22 स्थित शिवाजी नगर (मछली मार्केट के पास) में करीब 800 मकानों को अवैध निर्माण बताते हुए उन्हें खाली करने के लिए जारी किए गए नोटिस का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे गरीब परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।सीटू के जिला महासचिव जय भगवान और जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि भूमि एवं विकास कार्यालय , भारत सरकार के अभियंता अधिकारी ने 8 जुलाई को नोटिस जारी किया था, जिसकी जानकारी स्थानीय लोगों को 14 जुलाई को मिली। नोटिस में 15 दिन के भीतर भूमि खाली करने और सभी निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर 26 जुलाई से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।सीटू नेताओं का कहना है कि इस कॉलोनी में हजारों लोग पिछले करीब 45 वर्षों से रह रहे हैं। पूर्व सरकारों ने उन्हें यहां बसाया था और मकान नहीं तोड़े जाने का आश्वासन भी दिया था। बावजूद इसके अब बिना पुनर्वास और मुआवजे का उल्लेख किए बेदखली के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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