गैंग कनेक्शन, जेल और सस्पेंशन... जानिए सिपाही शेर सिंह की क्राइम कुंडली, जंतर-मंतर पर दिया था इस्तीफा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए उत्तराखंड पुलिस के सस्पेंडेड कॉन्स्टेबल शेर सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, वह करोड़ों रुपए की जमीन हड़पने के मामले में कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग से जुड़े आरोप में जेल जा चुका है और फिलहाल सस्पेंड है.
Constable Sher Singh Crime kundali: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के कॉन्स्टेबल शेर सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था. वीडियो में शेर सिंह मंच पर पहुंचकर आंदोलन के समर्थन में अपना इस्तीफा देने की घोषणा करता नजर आया. इसके बाद वह अचानक चर्चा में आ गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उत्तराखंड पुलिस ने इस पूरे मामले की सच्चाई सामने रख दी. पुलिस ने बताया कि शेर सिंह पहले से ही सस्पेंड चल रहा है. उसका आपराधिक इतिहास भी रहा है. यही नहीं वह जेल भी जा चुका है. कुमाऊं रेंज की IG निवेदिता कुकरेती ने वीडियो जारी कर बताया कि कॉन्स्टेबल शेर सिंह कोई सक्रिय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी नहीं है. उसे 20 जुलाई 2026 को विभागीय कार्रवाई के तहत सस्पेंड किया जा चुका है. इतना ही नहीं, वह पहले भी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है. इसलिए जंतर-मंतर पर दिया गया उसका इस्तीफा केवल एक नाटक था. ये भी पढ़ें- CJP के मंच पर उत्तराखंड पुलिस के जवान ने दिया इस्तीफा, IG ने कहा- पहले से है सस्पेंड, जेल भी जा चुका कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग से जुड़े थे तार पुलिस के अनुसार, सितंबर 2025 में उत्तराखंड STF ने करोड़ों रुपए की जमीन हड़पने वाले चर्चित प्रवीण वाल्मीकि गैंग पर कार्रवाई की थी. इसी मामले में कॉन्स्टेबल शेर सिंह और एक अन्य पुलिसकर्मी हसन जैदी को गिरफ्तार किया गया था. जांच में सामने आया कि दोनों पुलिसकर्मियों के संबंध गैंग के सदस्य और प्रवीण वाल्मीकि के भतीजे मनीष बॉलर से थे. आरोप है कि दोनों ने गैंग के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपए की संपत्ति के अवैध सौदे कराने और आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई थी. करोड़ों की जमीन हड़पने का था पूरा खेल पुलिस जांच के मुताबिक, यह मामला रुड़की के ग्राम सुनेहरा की करोड़ों रुपए की संपत्ति से जुड़ा है. वर्ष 2014 में संपत्ति के मालिक श्याम बिहारी की मौत के बाद उनके भाई कृष्ण गोपाल इसकी देखभाल कर रहे थे. वर्ष 2018 में कृष्ण गोपाल की हत्या कर दी गई. इसके बाद संपत्ति की जिम्मेदारी श्याम बिहारी की पत्नी रेखा के पास आ गई. आरोप है कि प्रवीण वाल्मीकि गैंग ने रेखा पर संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया. विरोध करने पर वर्ष 2019 में उनके भाई सुभाष पर जानलेवा हमला कराया गया. डर के कारण पूरा परिवार रुड़की छोड़कर चला गया. इसी दौरान आरोपियों ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर करोड़ों रुपए की जमीन बेच दी. ये भी पढ़ें- मैडम जी ये कैसी सजा? अल्मोड़ा में महिला टीचर ने 5 छात्रों के बाल काटे, ब्लेड से फाड़ी ड्रेस; जमकर हंगामा संपत्ति घोटाले में पुलिसकर्मियों की भूमिका STC की जांच में सामने आया कि शेर सिंह और हसन जैदी ने गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर जमीन के सौदे कराने में मदद की. आरोप है कि एक बेशकीमती जमीन का एग्रीमेंट अपनी परिचित महिला के नाम कराया गया. फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और संपत्ति के अवैध लेन-देन में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच में सामने आई. इस मामले में हरिद्वार के गंगनहर थाने में शेर सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक षड्यंत्र और BNS की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया. गिरफ्तारी, जेल और फिर जमानत STF ने 15 सितंबर 2025 को शेर सिंह और हसन जैदी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बाद में 7 नवंबर 2025 को शेर सिंह को नैनीताल हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. हालांकि जमानत मिलने के बाद भी वह अपने तैनाती स्थल पिथौरागढ़ में बिना सूचना दिए लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहा. विभाग की ओर से कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने 20 जुलाई 2026 को उसे सस्पेंड कर दिया. ‘इस्तीफे’ के वीडियो के बाद फिर सुर्खियों में आया नाम जंतर-मंतर पर वायरल हुए वीडियो के बाद शेर सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गया, लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने साफ कर दिया कि वह पहले से ही निलंबित था और गंभीर आपराधिक मामलों का आरोपी रह चुका है. पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी, इसलिए शेर सिंह की पूरी जानकारी सार्वजनिक की गई. आईजी निवेदिता कुकरेती के मुताबिक, शेर सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड विभाग के पास पहले से मौजूद है. वह गंभीर मामलों में आरोपी रह चुका है, जेल भी जा चुका है और फिलहाल निलंबित है.
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