आपकी बात.............................. संसद मार्च, लाठीचार्ज और न्याय की उम्मीद में लाखों छात्र ......................रंजन श्रीवास्तव

नीट पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा...
आपकी बात.............................. संसद मार्च, लाठीचार्ज और न्याय की उम्मीद में लाखों छात्र ......................रंजन श्रीवास्तव नीट पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस और आंदोलनकारियों के दावे एक-दूसरे के विपरीत हैं, जिससे अविश्वास और गहरा गया है। सत्ता पक्ष इसे अराजक तत्वों की साज़िश बता रहा है, जबकि आंदोलनकारी पुलिस पर दमन का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करेगी और पेपर लीक से प्रभावित छात्रों तथा उनके परिजनों को न्याय मिल सकेगा। आपकी बात संसद मार्च, लाठीचार्ज और न्याय की उम्मीद में लाखों छात्र - रंजन श्रीवास्तव नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किया जा रहा आंदोलन अब एक बड़ा स्वरूप लेकर पूरे शिक्षा तंत्र की बात कर रहा है। युवाओं द्वारा संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज तथा आँसू गैस के गोलों ने उनके आक्रोश को और भड़का दिया है। दिल्ली के नए पुलिस आयुक्त को लाकर सरकार ने जिस परिणाम की आशा की थी, वह तो नहीं आया। उल्टा, जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं, उनसे तो पुलिस ही कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। अगर संसद मार्च के दौरान आंदोलनकारियों में शामिल किसी समूह ने हिंसा का सहारा लिया, तो वह भी उतना ही निंदनीय है। पर क्या यह सत्य सामने आ पाएगा कि हिंसा के लिए छात्र जिम्मेदार हैं या पुलिस? दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। दिल्ली पुलिस का आधिकारिक दावा है कि 118 से अधिक पुलिसकर्मी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान घायल हुए, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, घायल अधिकारियों में स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, पत्थर और अन्य वस्तुएँ फेंकीं, 15 से 20 सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया। पुलिस ने यह भी कहा कि लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और प्रदर्शन के बाद दंगा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने तथा अन्य धाराओं के तहत कई एफआईआर दर्ज की गईं। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी और प्रदर्शनकारियों का दावा इससे बिल्कुल अलग है। उनका आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त उकसावे के लाठीचार्ज, आँसू गैस और अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हुए। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है, जबकि पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है। हिंसा का दौर खत्म होने के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। सरकार और कॉकरोचों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी एक पैनल चर्चा के दौरान पूछते हैं कि ऐसा क्यों है कि जब भी संसद का सत्र शुरू होने वाला होता है, ऐसे आंदोलन सामने आ जाते हैं? उनका आरोप है कि इस बार जो दृश्य दिखाई दिए, उनसे यही लगता है कि बहुत से अराजक तत्व घुसपैठिए बनकर इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं। उनका कहना है कि कुछ ऐसे नारे हैं, जो पिछले पाँच-छह वर्षों से लगभग हर आंदोलन में सुनाई देते हैं। वह पूछते हैं कि "संसद को बर्बाद कर देंगे", "संसद को उखाड़ देंगे", "मोदी जी को पीटेंगे", गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपशब्द, "नाम रहेगा अल्लाह का", "मेरा जेंडर, मेरी आज़ादी" और "लेकर रहेंगे आज़ादी" जैसे नारों का शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के आंदोलन से क्या संबंध है? सुधांशु त्रिवेदी की बात से स्पष्ट है कि सत्ता पक्ष का मानना है कि बहुत से अराजक तत्व, जो सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं, तथा विपक्ष छात्रों के कंधों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहता है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी का जो प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने गया था, उसे एक तरह से हाउस अरेस्ट कर लिया गया था। उनका आरोप है कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के फोन जब्त कर लिए गए थे, ताकि वे (अभिजीत दिपके) अपने पदाधिकारियों से संपर्क न कर सकें और उन्हें (दिपके को) जंतर-मंतर पर अलग-थलग कर आंदोलन को समाप्त कराया जा सके। दिपके ने यह भी दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के फोन तभी लौटाए गए, जब उन्होंने जे.पी. नड्डा के आवास पर ही धरना देने की चेतावनी दी। दिपके ने कहा कि अब कॉकरोच जनता पार्टी का कोई भी प्रतिनिधिमंडल सरकार से बातचीत करने नहीं जाएगा और अब सरकार को ही जंतर-मंतर आकर आंदोलनकारियों से बात करनी होगी। दोनों पक्षों के बयानों से स्पष्ट है कि अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि फिलहाल कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार दिखाई नहीं देता। इन परिस्थितियों के बीच मुख्य प्रश्न अभी भी वही है कि क्या सरकार संसद में केवल नीट ही नहीं, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए तैयार होगी? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेंगे या परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान स्वयं इस्तीफा देंगे? क्या सरकार पूरे शिक्षा तंत्र की समीक्षा कर उसमें व्यापक सुधार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी ? इन सबसे जुड़ा एक और अत्यंत गंभीर मुद्दा यह है कि नीट पेपर लीक के बाद अपना भविष्य अंधकारमय मानकर 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या कर ली। जंतर-मंतर स्थित आंदोलन स्थल पर उनकी तस्वीरें लगी हुई हैं। वे दिवंगत बच्चे, जो अब केवल तस्वीरों में सिमट गए हैं और उनके परिजन आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। क्या सरकार उन्हें न्याय देना सुनिश्चित करेगी ? (चित्र चेट जीपीटी से) ***************************** श्री रंजन श्रीवास्तव वरिष्ठ पत्रकार हैं। अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाईम्स और फ्री प्रेस, भोपाल के साथ अन्य प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में ब्यूरो प्रमुख और वरिष्ठ पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद इन दिनों भोपाल में निवास और सामयिक मुद्दों व राजनीति पर नियमित स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। सम्पर्क.. 94253-51688, ईमेल - ranjansrivastava1@gmail.com
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