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बालाघाट में नाली में फंसा मिला दुर्लभ पेंगोलिन, रेस्क्यू के बाद वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

बालाघाट में नाली में फंसा मिला दुर्लभ पेंगोलिन, रेस्क्यू के बाद वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल

बालाघाट में नाली में फंसे एक दुर्लभ पेंगोलिन को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। हालांकि, इस बचाव अभियान के बाद वन विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, ...

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के हट्टा वन परिक्षेत्र अंतर्गत परासपानी गांव में एक दुर्लभ और संरक्षित पेंगोलिन नाली में फंसा मिला। स्थानीय युवक की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से वन्यजीव को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, रेस्क्यू के बाद उसे वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। बिल्ली के व्यवहार से हुआ पेंगोलिन का पता जानकारी के अनुसार, परासपानी निवासी ऋषभ चौधरी, पिता शक्तिमान चौधरी, ने देर रात अपने घर के पास एक बिल्ली को लगातार गुर्राते देखा। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो नाली में एक अजीब दिखने वाला वन्यजीव फंसा हुआ था। इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। रात्रि गश्त पर मौजूद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर पेंगोलिन को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई। दो घंटे बाद मौके पर पहुंचा वन विभाग स्थानीय लोगों के अनुसार, सूचना मिलने के करीब दो घंटे बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। विभागीय अमले ने पेंगोलिन को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। हालांकि, इसके बाद वन्यजीव को कहां ले जाया गया और उसकी चिकित्सकीय जांच हुई या नहीं, इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। वन्यजीव प्रेमियों ने उठाए सवाल रेस्क्यू के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पेंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 (Schedule-I) में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। ऐसे वन्यजीव को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण, उपयुक्त स्थान का चयन और पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया जाना जरूरी माना जाता है। वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि इस मामले में इन प्रक्रियाओं को लेकर कोई सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अवैध तस्करी के कारण सबसे ज्यादा खतरे में है पेंगोलिन पेंगोलिन दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल है। इसके शल्कों (Scales) की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध तस्करी होती है, जिसके कारण इसकी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील वन्यजीवों के रेस्क्यू और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार ही होनी चाहिए। इंद्रदेव को मनाने का अनोखा टोटका : भोपाल में गधों को खिलाए गए गुलाब जामुन, 44 जिलों में बारिश का अलर्ट 'पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए' वन्यजीव प्रेमी अभय कोचर ने कहा कि दुर्लभ वन्यजीवों को जंगल में छोड़ने की पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में और तय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि रेस्क्यू के बाद की कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है, तो वन विभाग को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि संरक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।

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