दुनिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा, जिसके सामने कई मुल्कों का आकार भी है छोटा; जहां रनवे से ज्यादा नजर आती है खाली जमीन

World Largest Airport: क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा कहां हैं. वह एक ऐसा एयरपोर्ट है, जिसके सामने कई मुल्कों का कुल आकार भी छोटा नजर आता है. दिल्ली-मुंबई जैसे शहर भी उस एयरपोर्ट के सामने छोटे नजर आते हैं.
Where is World Largest Airport Located? दूसरे देश या राज्यों-शहरों में कम समय में आने-जाने का बढ़िया साधन हवाई मार्ग माना जाता है. इसके लिए भारत समेत दुनिया भर में हवाई अड्डे बने हुए हैं, जहां से आप फ्लाइट पकड़ सकते हैं. सभी हवाई अड्डे अपने साथ कोई न कोई खासियत समेटे हुए होते हैं. लेकिन क्या आप दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डे के बारे में जानते हैं, जो अपने आकार के हिसाब से छोटा शहर नजर आता है. यह हवाई अड्डा इतना बड़ा है कि दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता जैसे शहर भी इसके सामने छोटे दिखाई देते हैं. अपने विशाकल आकार की वजह से इस हवाई अड्डे को दुनिया का 'विमानन का जाइंट' (Aviation Giant) भी कहा जाता है. आइए जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा कहां है. हम जिस हवाई अड्डे की बात कर रहे हैं, वह सऊदी अरब के ईस्टर्न प्रोविंस में दम्मम के पास स्थित है. इस एयरपोर्ट का नाम किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. यह हवाई अड्डा लगभग 776 वर्ग किलोमीटर में फैला है और कुल ज़मीन के क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है. यह एयरपोर्ट 1999 में कमर्शियल ऑपरेशन्स के लिए खुला था. इसे ऐसे बड़े पैमाने पर प्लान किया गया था जो मॉडर्न एविएशन में शायद ही कभी देखने को मिलता है. यह एयरपोर्ट इतना विशाल है कि इसमें बहरीन जैसा पूरा देश (727 वर्ग किमी) समा सकता है. इतना ही नहीं, अगर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई (603 वर्ग किमी) को भी इस एयरपोर्ट के परिसर के भीतर रख दिया जाए, तो भी काफी जगह खाली बच जाएगी! अपनी विशालता की वजह से इस हवाई अड्डे का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल है. दिलचस्प बात यह भी है कि दुनिया के हवाई अड्डों का किंग होने के बावजूद, यह यात्रियों की आवाजाही के मामले में दुनिया के टॉप हवाई अड्डों में शुमार नहीं है. इसके 776 वर्ग किमी के विशाल दायरे का एक बहुत ही छोटा हिस्सा यात्री टर्मिनल्स, रनवे और नियमित सेवाओं के लिए इस्तेमाल होता है. बाकी हिस्सा आज भी भविष्य के विकास और सुरक्षा बफर जोन के रूप में खाली रेगिस्तानी जमीन के रूप में रखा गया है. अब सवाल आता है कि आखिर इस हवाई अड्डे को इतने विशाल पैमाने पर क्यों बनाया गया? असल में दुनिया भर में एयरपोर्ट्स का निर्माण जरूरत के हिसाब से किस्तों में होता है, लेकिन 1999 में व्यावसायिक परिचालन शुरू करने वाले इस एयरपोर्ट की योजना ही कुछ अलग थी. इसे शुरुआत से ही भविष्य के कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था. यही वजह थी कि इस हवाई अड्डे के लिए 776 वर्ग किमी की जमीन सुरक्षित की गई, जिससे भविष्य में अतिरिक्त रनवे, विशाल कार्गो हब, टर्मिनल विस्तार और उड्डयन से जुड़ी लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विकसित की जा सकें. यही वजह है कि यह एयरपोर्ट इतना विशाल बन गया. अगर इस हवाई अड्डे को आसमान से देखा जाए, तो यह विशालकाय मरुस्थल के बीच बसा एक 'छोटा शहर' प्रतीत होता है. अमेरिका का डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट माना जाता है, वह भी इसके आकार के आगे काफी छोटा नजर आता है. सबसे बड़ा एयरपोर्ट होने के बावजूद इस हवाई पर यात्रियों की भीड़भाड़ नहीं दिखाई देती. अपनी विशालता की वजह से यह हवाई अ्डा दुनिया भर के एविएशन प्रेमियों के लिए एक रहस्य और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
This is a summary. Read the full article at the original source.
Read full article at zeenews
