'पुलिस हमें फंसा रही है': मीडिया को देख चिल्लाईं युवतियां, फर्जी कॉल सेंटर से हुई थीं गिरफ्तार; कई चीजें बरामद

महमूरगंज स्थित शाही टॉवर में संचालित फर्जी कॉल सेंटर एनकेडी एसोसिएट्स में यूपी और बिहार के विभिन्न जिलों के 21 युवतियों समेत 32 लोग कार्यरत थे। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया।
युवतियों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मीडिया में पेश करने से पहले बताया ही नहीं गया। पुलिस ने धोखे से गिरफ्तारी की है। बृहस्पतिवार की रात में सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए और कहा गया कि सुबह छोड़ दिया जाएगा। फिर उन्हें मीडिया के सामने क्यों पेश किया गया है। यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान पांच अन्य लोगों को छोड़ दिया और 21 में से केवल 15 युवतियों को ही मीडिया के सामने क्यों पेश किया गया। युवतियों ने मीडिया को बताया कि वे 8 से 10 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम कर रही थीं। कॉल करने के लिए मोबाइल नंबरों की सूची संचालक की ओर से उपलब्ध कराई जाती थी। उनके अनुसार, उनके खातों में केवल वेतन आता था और ठगी की रकम सीधे उनके खातों में नहीं आती थी। उन्हें बताया गया था कि संस्था सेबी में पंजीकृत है। बताया कि एचआर हेड अर्चना सिंह ने उनकी नियुक्ति कराई थी, लेकिन ऑफर लेटर मांगने पर भी नहीं दिया गया। युवतियों को शांत कराने के बाद डीसीपी क्राइम नीतू ने दोबारा प्रेसवार्ता शुरू की। डीसीपी क्राइम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, मिर्जापुर तथा बिहार के रोहतास जिले के निवासी शामिल हैं। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि गिरोह सबसे पहले शेयर बाजार, व्यापार और निवेश में रुचि रखने वाले लोगों के डेटा जुटाता था। इसके बाद कॉल सेंटर में कार्यरत युवक-युवतियां खुद को सेबी में पंजीकृत संस्था 'एनकेडी एसोसिएट्स' का प्रतिनिधि बताकर संपर्क करते थे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने और निवेश संबंधी सलाह देने के नाम पर सदस्यता शुल्क तथा खाता प्रबंधन शुल्क विभिन्न बैंकों के क्यूआर कोड और यूपीआई आईडी के माध्यम से जमा कराया जाता था। इस संबंध में भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि गिरोह के सरगना चंदौली के सकलडीहा स्थित तुलसी आश्रम निवासी अंबर सिंह मौर्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश में भी टीमें गठित की गई हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार दिल्ली या गुरुग्राम से भी जुड़े हो सकते हैं। फर्जी कॉल सेंटर पिछले तीन महीने से संचालित हो रहा था। भवन की दूसरी और तीसरी मंजिल पर इसका संचालन किया जा रहा था। ये हैं गिरफ्तार आरोपी चंदौली सकलडीहा के तुलसी आश्रम निवासी सतीश मौर्या, विनय कुमार मौर्य, चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र के संघती निवासी संदीप कुमार मौर्य, भेलूपुर के खोजवा निवासी शिवम सिंह, सौरभ गुप्ता, अंशु मौर्य आरोपी हैं। इनके अलावा रोहनिया थाना क्षेत्र के काशीपुर निवासी अभिषेक मौर्य, मिर्जापुर के चुनार शिल्पी सीखड़ निवासी अमन गुप्ता, भेलूपुर के गौरीगंज निवासी पियूष जायसवाल, कैंट फुलवरिया निवासी अंकित राय, लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र के संकठा नगर कॉलोनी निवासी शरद सिंह भी पकड़े गए हैं। चंदौली बलुआ थाना क्षेत्र के हरधनजूड़ा निवासी जागृति, खोजवा निवासी पूजा मौर्या, गाजीपुर गहमर के सेवराई निवासी प्रीति मौर्या, बिहार के रोहतास दिनारा निवासी खुशी राज, सारनाथ के सराय मोहाना निवासी बंधन, चौबेपुर के कादीपुर निवासी तनु यादव, मंडुवाडीह की गरिमा माथुर, मिर्जापुर के चुनार निवासी अंजनी मौर्या भी गिरफ्तार की गईं हैं। साथ ही कोतवाली के हरतीरथ निवासी आकांक्षा गुप्ता, मऊ के कोतवाली थाना क्षेत्र के भीटी निवासी सुरभि श्रीवास्तव, खोजवा की रहने वाली आस्था जायसवाल, सिगरा निवासी प्रतिभा राय, महमूरगंज निवासी खुशबू यादव, महमूरगंज शिवाजीनगर निवासी छाया कुमारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके आलावा अन्य आरोपियों में जौनपुर के भदेवरा निवासी मधु चौहान, गायघाट मैदागिन निवासी सृष्टि सिंह, चौक थाना क्षेत्र के छोटी पियरी निवासी सिमरन कुमारी, चौक के शीतला गली निवासी सेजल यादव, गाजीपुर के बरियाबाद थाना क्षेत्र के सरसोली निवासी श्रुति, गाजीपुर मोहम्मदाबाद पठानटोली निवासी सुमन यादव, चौकाघाट जेल रोड निवासी यशोदा गांधी हैं। फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। तभी उनकी गिरफ्तारी हुई। वे फर्जी कंपनी में काम करती थीं, उनके पास जॉब लेटर भी नहीं था। युवतियों के आरोप निराधार हैं। - नीतू, डीसीपी क्राइम विज्ञापन के जरिये हुई थी नियुक्ति डीसीपी क्राइम नीतू ने बताया कि युवतियों की नियुक्ति विज्ञापन के माध्यम से की गई थी। उन्हें बताया गया था कि कंपनी सेबी में पंजीकृत है, जबकि जांच में ऐसा नहीं पाया गया। किसी भी युवती के पास शेयर ट्रेडिंग का अनुभव या उससे संबंधित कोई प्रमाणपत्र नहीं मिला। बिना नियुक्ति पत्र के ही यह युवतियां काम कर रही थीं। युवक-युवतियों को मोबाइल नंबरों की सूची और कॉल करने के लिए एक स्क्रिप्ट दी जाती थी। कॉल सेंटर बिना लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था।
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