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घटा अमेरिका का रुतबा... प्रतिशोध पर अडिग मुज्तबा, पूरे अरब में फैला ईरान का खौफ

घटा अमेरिका का रुतबा... प्रतिशोध पर अडिग मुज्तबा, पूरे अरब में फैला ईरान का खौफ

ऑपरेशन नस्र 2 के तहत ईरान ने एक ऐसी 'मल्टी-टैप' रणनीति अपनाई है, जिसने अमेरिकी एयर डिफेंस की धज्जियां उड़ा दी हैं. दरअसल, मुज्तबा खामेनेई का प्रतिशोध शुरू हो गया है. साफ संदेश दे दिया है कि नया नेतृत्व पीछे हटने के लिए नहीं, बल्कि जवाब देने और बदला लेने आया है.

ऑपरेशन नस्र 2 के तहत ईरान ने एक ऐसी ‘मल्टी-टैप’ रणनीति अपनाई है, जिसने अमेरिकी एयर डिफेंस की धज्जियां उड़ा दी हैं. जॉर्डन से लेकर बहरीन, कुवैत और कतर तक फैले अमेरिकी ठिकानों पर हुए इन घातक हमलों में न सिर्फ 100 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, बल्कि अमेरिका के सैन्य रुतबे को भी करारा झटका लगा है. हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि 1,400 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें गंवाने के बाद अब पेंटागन को 30 साल पुरानी और आउटडेटेड PAC-2 मिसाइलों का सहारा लेना पड़ रहा है. मुज्तबा का प्रतिशोध, अमेरिका की मिसाइलों का अकाल और पश्चिम एशिया में टूटते सुरक्षा चक्र पर पढ़ें ये खास रिपोर्ट. मुज्तबा खामेनेई का प्रतिशोध शुरू हो गया है. साफ संदेश दे दिया है कि नया नेतृत्व पीछे हटने के लिए नहीं, बल्कि जवाब देने और बदला लेने आया है. इस लहर में इस बार ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, कतर और UAE जैसे अरब के देशों में अमेरिका से जु़ड़े ठिकानों और कंपनियों पर एक साथ ड्रोन, मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियारों से हमला कर दिया. ईरानी आईआरजीसी ने एमाद, खैबर शिकन, जिल्फिकार, फतह मिसाइल और शाहेद ड्रोन के हमले दिखाई दे रहे हैं. ईरान ने इस बार पारंपरिक युद्ध की बजाय ‘मल्टी-टैप’ रणनीति अपनाई है. यानी हमला एक साथ कई मोर्चों पर. कई अलग अलग हथियारों से और कई स्तर पर हो रहा है. मुज्तबा खामेनेई के नेतृत्व में शुरू हुआ ऑपरेशन नस्र 2 अब ऐसे चरण में पहुंच गया है. जहां हर नए हमले के साथ अमेरिका की साख और अरब में उसकी सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठ रहे हैं. इस बार ईरान ने केवल मिसाइलें नहीं दागीं. बल्कि पूरी युद्ध रणनीति बदल दी. एक साथ कई दिशाओं से और कई तरह के हथियारों से किए गए हमलों का मकसद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के एयर डिफेंस पर इतना दबाव बनाना था कि वो कन्फ्यूज हो जाए. कि हमला करना कहां हैं और रोकना कहां है? अमेरिका के एयर डिफेंस कन्फ्यूज अरब देशों में अमेरिका के एयर डिफेंस को कन्फ्यूज करने वाली ईरान की इस बदली हुई रणनीति में स्वॉर्म और मल्टी-टैप अटैक दोनों शामिल हैं. और इसका नतीजा ये रहा कि बीती रात अरब के तकरीबन हर अमेरिकी बेस के आस पास सायरन गूंजते रहे. और एयर डिफेंस सिस्टम लगातार सक्रिय रहे. लेकिन अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ये है कि ऑपरेशन नस्र 2 की 26वीं लहर में ईरान ने न सिर्फ मल्टी टैप हमले किए, बल्कि ये हमले अमेरिका को चौंकाने वाली हद तक सटीक थे. बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेज के सर्वर परिसर पर हमला बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेज के सर्वर परिसर को बेहद सटीक तरीके से निशाना बनाया. ईरान ने दावा किया कि उसके ड्रोन ने अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह चकमा देते हुए इस डेटा सेंटर को सीधे निशाना बनाया. इसके बाद जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों और विजुअल एनालिसिस में साफ देखा जा सकता है कि इरानी वारहेड ने कंक्रीट के बेहद मजबूत ढांचे को चीरते हुए लगभग 19 मीटर चौड़ा भीषण क्रेटर बना दिया. जिससे सीधे अंदरूनी सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया. ईरान को रूस और चीन से खुफिया या तकनीकी सहयोग ईरान ने हमले से पहले और बाद की तस्वीरें जारी करके दावा किया है कि CENTCOM यहां से क्लाउड डेटा नेटवर्क का इस्तेमाल करके ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा था. अब अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता अब हमलों की बढ़ती सटीकता को लेकर है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन और CIA को खबर मिली है कि ईरान को रूस और चीन से खुफिया या तकनीकी सहयोग मिल रहा है. अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि रूस और चीन किसी स्तर पर ईरान की मदद कर रहे हैं. यानी ऑपरेशन नस्र 2 की ‘मल्टी-टैप’ लहर अरब देशों और वहां मौजूद अमेरिकी एयर डिफेंस पर बहुत भारी पड़ रही है. 26वीं लहर में ईरान ने तीन स्तरों वाले हमले किए ऑपरेशन नस्र 2 की 26वीं लहर में ईरान ने तीन स्तरों वाला हमला किया, जिसमें ड्रोन, बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक हथियारों के इस ‘त्रिशूल’ से एक साथ कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. हमले की शुरुआत शाहेद आत्मघाती ड्रोन के झुंड से हुई. इसकी रेंज 2000 किलोमीटर तक है इनका मकसद दुश्मन के एयर डिफेंस को उलझाना और उस पर दबाव बढ़ाना था. इसके बाद मैदान में उतारी गईं 1,700 किलोमीटर रेंज वाली इमाद बैलिस्टिक मिसाइल. MARV तकनीक के कारण अंतिम चरण में भी ये अपना रास्ता बदलकर सटीक निशाना साध सकती है. फिर आई जुल्फिकार बैलिस्टिक मिसाइल की बारी 700 किलोमीटर रेंज की जुल्फिकार कम दूरी की तेज प्रतिक्रिया वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. इसे बहुत तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. खैबर शिकन से भी हमले हुए. 1,450 किलोमीटर रेंज की ठोस ईंधन से चलने वाली आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल है. ईरान का दावा है कि इसे THAAD जैसी रक्षा प्रणालियों को चकमा देने के लिए विकसित किया गया है. ईरान ने 1,400 किलोमीटर तक रेंज वाली फतह हाइपरसोनिक मिसाइल से भी हमला किया. इसकी 18000 किलोमीटर/घंटा यानी 4 किलोमीटर/सेकंड की रफ्तार ही इसकी सबसे बड़ी खूबी है. इसी रफ्तार की वजह से इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल है. 100 अमेरिकी सैनिक घायल, 18 की मौत ईरान के ताजा हमलों का सबसे बड़ा असर अब अमेरिकी सेना पर दिखाई दे रहा है. पेंटागन के मुताबिक जुलाई की शुरुआत से अब तक करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. 18 सैनिकों के अब तक मारे जाने की भी खबर है. अमेरिका के गंभीर रूप से घायल सैनिकों को इलाज के लिए जर्मनी के अमेरिकी सैन्य अस्पताल भेजना पड़ा. यानी अब इस जंग में अमेरिकी सेना भी बड़ी कीमत चुका रहे हैं. ईरान का दावा है कि अब ऑपरेशन नस्र 2 के तहत हो रहे उसके जवाबी हमलों का मकसद केवल रनवे या इमारतों को नुकसान पहुंचाना नहीं है. बल्कि अमेरिकी सैन्य अभियानों की रीढ़ माने जाने वाले कमांड, संचार और लॉजिस्टिक नेटवर्क उसके टारगेट हैं. पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में बजते रहे सायरन बीती रात पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में सायरन बजते रहे. अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाएं लगातार अलर्ट पर रहीं. कई जगह इंटरसेप्टर दागे गए. कई जगह धमाकों की तस्वीरें सामने आईं. और अब पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, पहला हमला बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेज के सर्वर कॉम्प्लेक्स में हुआ. अमेरिकी HIMARS सिस्टम तबाह IRGC ने इसे अपने सबसे सटीक हमलों में से एक बताया. फिर ईरान ने कुवैत में हमला किया और अमेरिकी HIMARS सिस्टम को तबाह करने का दावा किया. हमलों के दौरान पूरे इलाके में सायरन गूंजते रहे और वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय रही. फिर हमला हुआ जॉर्डन के मुवफ्फक साल्ती एयर बेस पर हुआ. यहां के हथियार डिपो को निशाना बनाया गया. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की मिसाइलें यहां एयर डिफेंस को भेदते हुए लक्ष्य तक पहुंच गईं. कतर का अल-उदैद एयर बेस पर हमला पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा कतर का अल-उदैद एयर बेस भी 26वीं लहर के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहा. ईरान के लगातार प्रहारों ने अमेरिकी सैन्य औद्योगिक तंत्र की कमर तोड़ दी है. और वाशिंगटन का वो घमंड अब धूल में मिल चुका है, जो अपने हथियारों के असीम भंडार पर इतराता था. पेंटागन से आई खबर ने अमेरिकी सेना की लाचारी को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है. यूएस का PAC-3 मिसाइलों का स्टॉक पूरी तरह खत्म अनुमान है कि इरानी मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के चक्कर में अमेरिकी सेना अब तक 1,430 से भी ज्यादा अत्याधुनिक पैट्रियट मिसाइलें दाग चुकी है. इस अंधाधुंध इस्तेमाल का नतीजा ये हुआ है कि अमेरिका की नई और उन्नत PAC-3 मिसाइलों का स्टॉक पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अमेरिकी सेना को वो फैसला लेना पड़ा है. जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी. अब पुरानी मिसाइलें कर रहे उपयोग अमेरिकी सेना ने 30 से भी ज्यादा साल के इतिहास में पहली बार पुरानी और आउटडेटेड मानी जाने वाली PAC-2 GEM-T पैट्रियट मिसाइलों का नया इमरजेंसी ऑर्डर दिया है. PAC-2 मिसाइलें तकनीक और मारक क्षमता में PAC-3 के मुकाबले काफी पुरानी और कम क्षमता वाली हैं. लेकिन पेंटागन का भंडार इतना डिप्लीट हो चुका है कि अमेरिकी सेना को अब जिस भी हाल में मिसाइलें मिल जाएं... वो कम पड़ रही हैं. (ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष)

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