Politics·

‘हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला...’ ईरानी राष्ट्रपति को मिली धमकी, तख्तापलट के लगे आरोप

‘हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला...’ ईरानी राष्ट्रपति को मिली धमकी, तख्तापलट के लगे आरोप

ईरानी राष्ट्रपति को "हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला" जैसी खौफनाक धमकी मिली है, जिसने देश में तख्तापलट की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। इस गंभीर राजनीतिक ...

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम ने भले ही दोनों देशों के बीच कुछ समय के लिए सैन्य तनाव कम किया हो, लेकिन ईरान के भीतर अब एक नया राजनीतिक संकट तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ पर कट्टरपंथी गुटों ने सत्ता हथियाने और राजनीतिक तख्तापलट की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कट्टरपंथियों का आरोप है कि, अमेरिका के साथ युद्धविराम और बातचीत कर मौजूदा सरकार ने इस्लामिक क्रांति की मूल विचारधारा और सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों से समझौता किया है। हालात ऐसे हैं कि अब सत्ता के शीर्ष स्तर पर भी खुला टकराव सामने आने लगा है। खामेनेई के अंतिम संस्कार में फूटा गुस्सा सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान राजनीतिक नाराजगी खुलकर सामने आई। जब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अंतिम यात्रा में शामिल हुए, तब भीड़ के एक हिस्से ने उनके खिलाफ समझौतावादी मुर्दाबाद के नारे लगाए। वहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जिन्होंने अमेरिका के साथ युद्धविराम और प्रतिबंधों में राहत को लेकर बातचीत की थी, उन्हें भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें गद्दार, बिकाऊ और देशद्रोही कहकर निशाना बनाया। कुछ लोगों ने उन पर पत्थर भी फेंके, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा के बीच वहां से हटाया गया। राष्ट्रपति को मिली गला काटने की धमकी राजनीतिक विवाद अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। सरकार समर्थक माने जाने वाले कट्टरपंथी धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक सार्वजनिक सभा में राष्ट्रपति पेजेशकियान को खुली धमकी देते हुए कहा, अगर सर्वोच्च नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारे हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला होगा। हम आपके लिए नरक बना देंगे। हालांकि इस बयान की आलोचना हुई, लेकिन अब तक उनके खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी से बढ़ीं अटकलें ईरान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहा है। पिता अली खामेनेई के निधन के बाद उन्होंने अभी तक देश को संबोधित नहीं किया, सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया और किसी बड़े फैसले पर खुलकर बयान भी नहीं दिया। इस चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। कुछ लोगों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे, जबकि कुछ का दावा है कि स्वास्थ्य कारणों से वह सक्रिय नहीं हैं। कट्टरपंथियों ने लगाया 'तख्तापलट' का आरोप कट्टरपंथी संगठन जेभ-ए-पायदारी और उसके नेताओं का आरोप है कि नए सर्वोच्च नेता की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर राष्ट्रपति पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष गालिबफ और विदेश मंत्री अराघची मिलकर देश की सत्ता अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं। कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया, ईरान के लोगों के लिए चेतावनी... क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? उनका आरोप है कि सरकार संसद और सर्वोच्च नेतृत्व की भूमिका को कमजोर कर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के जरिए फैसले लेने की कोशिश कर रही है। अमेरिका से बातचीत बना सबसे बड़ा विवाद कट्टरपंथी नेताओं का मानना है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम और बातचीत करना ईरान की क्रांतिकारी नीति के खिलाफ है। उनका आरोप है कि, सरकार ने सर्वोच्च नेतृत्व की इच्छा के विपरीत अमेरिका से समझौता किया। युद्धविराम के जरिए ईरान की रणनीतिक स्थिति कमजोर हुई। प्रतिबंधों में राहत पाने के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया। इसी वजह से राष्ट्रपति और विदेश मंत्री सबसे ज्यादा निशाने पर हैं। सरकार ने शुरू की कार्रवाई, कट्टरपंथियों को किया किनारे दूसरी ओर मौजूदा नेतृत्व भी अब कट्टरपंथी नेताओं पर कार्रवाई करता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से हटा दिया गया। उनके साथ एक अन्य सांसद को भी समिति से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि नबावियान ने अमेरिका के साथ बातचीत से जुड़े गोपनीय दस्तावेज मीडिया में लीक कर युद्धविराम को विफल करने की कोशिश की थी। कट्टरपंथियों की मांग- युद्ध जारी रहना चाहिए ईरान के कट्टरपंथी गुट अमेरिका और इजरायल के साथ किसी भी तरह के समझौते के विरोध में हैं। पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मोत्तकी ने सरकारी टीवी पर कहा, हमें क्षेत्र में मौजूद किसी अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला करना चाहिए और वहां से कम से कम 100 अमेरिकी सैनिकों को बंधक बनाकर ईरान ले आना चाहिए। इस बयान ने साफ कर दिया कि कट्टरपंथी धड़ा युद्ध खत्म करने के बजाय और आक्रामक रुख अपनाने की मांग कर रहा है। ईरान के सामने अब दोहरी चुनौती ईरान इस समय दो बड़े मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। एक ओर सरकार अमेरिका के साथ तनाव कम कर प्रतिबंधों से राहत चाहती है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था संभल सके। दूसरी ओर कट्टरपंथी गुट किसी भी तरह के समझौते को इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों के खिलाफ मानते हुए पूर्ण युद्ध की वकालत कर रहे हैं। युद्धविराम के बाद शुरू हुआ यह सत्ता संघर्ष अब केवल राजनीतिक मतभेद नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रपति को मिली धमकियों, तख्तापलट के आरोपों और कट्टरपंथियों की खुली बगावत ने ईरान की आंतरिक स्थिरता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में नए सर्वोच्च नेता की भूमिका और सरकार की रणनीति इस संकट की दिशा तय करेगी।

This is a summary. Read the full article at the original source.

Read full article at peoplesupdate