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आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का समन्वय ही बनाएगा संस्कारवान और आत्मनिर्भर भारत

आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का समन्वय ही बनाएगा संस्कारवान और आत्मनिर्भर भारत

शिक्षा मनुष्य के जीवन को दिशा देने वाली ऐसी शक्ति है, जो उसके व्यक्तित्व का निर्माण करने के साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना, परीक्षा उत्तीर्ण करना और प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति को विवेकशील, जिम्मेदार, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनाना भी है। शिक्षित व्यक्ति ज्ञान के माध्यम से अपनी क्षमताओं का विकास करता है, जबकि संस्कार उसे उस ज्ञान का सदुपयोग करना सिखाते हैं। शिक्षा और संस्कार एक-दूसरे के पूरक हैं। ज्ञान के बिना जीवन की अनेक संभावनाएं सीमित रह जाती हैं और संस्कारों के बिना ...

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