इंदौर में फिर पर्चियों पर जमीनों के सौदे:कर्मचारी बोला- प्रूफ तो कुछ नहीं देंगे, लोन भी नहीं होगा, कच्ची पर्ची लिख देंगे, किस्त में कैश देते रहना
शहर में एक बार फिर डायरी पर जमीन के सौदों का खेल शुरू हो गया है। रेरा की मंजूरी मिलने से पहले ही कॉलोनाइजर प्लॉट बेच रहे हैं। कई प्रोजेक्ट्स में सरकारी एजेंसियों की मंजूरियां अधूरी होने के बावजूद निवेशकों को यह कहकर फंसाया जा रहा है कि अभी खरीदेंगे तो सस्ता मिलेगा। मंजूरी आते ही रेट बढ़ जाएंगे। एडवांस के तौर पर कैश में मोटी रकम ली जा रही है और इसके बदले में न कोई वैध एग्रीमेंट किया जा रहा है न कोई पक्की रसीद दी जा रही है। यह वही मॉडल है, जिसमें शहर के सैकड़ों परिवारों की जिंदगीभर की पूंजी डूब चुकी है। गृह निर्माण संस्थाओं और अवैध कॉलोनियों के नाम पर हुए घोटालों में लोग आज भी डायरी और पर्चियां लेकर कभी जनसुनवाई तो कभी थानों के चक्कर काट रहे हैं। अब वही कहानी नए नामों और नए प्रोजेक्ट्स के साथ दोहराई जा रही है। भास्कर स्टिंग - अनिल सैनी, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव रेरा के लिए अप्लाई कर रखा है... रिपोर्टर: कोई प्लॉट है क्या इन्वेस्टमेंट के हिसाब से। अनिल सैनी (मार्केटिंग प्रतिनिधि): क्या बजट है? रिपोर्टर: आइरिस का उज्जैन रोड वाला प्रोजेक्ट देखा था, लेकिन बजट थोड़ा कम है। अनिल: उज्जैन रोड पर तो नहीं। सनावदिया में आइरिस प्रीमियम लैंडमार्क का सेकंड फेज शुरू किया है। इसमें आपको लॉन्ग टर्म पेमेंट का ऑप्शन दे सकते हैं। इसमें सारी परमिशन आ गई हैं क्या? डेवलपमेंट की परमिशन है। रेरा के लिए अप्लाई किया हुआ है। एक-दो महीने में प्रोसेस हो जाएगा। रेट क्या रहेगा और शर्त क्या होगी? रेट 4400 रुपए रहेगा। बाकी बैठकर नेगोशिएट कर लेंगे। आपको शुरुआत में 10 प्रतिशत पेमेंट करना होगा। 10 प्रतिशत भुगतान का कोई प्रूफ मिलेगा? प्रूफ तो कुछ नहीं होगा। हम कच्ची पर्ची पर लिखकर दे देंगे। लोन भी नहीं होगा। इसलिए किस्तें भी कैश में देनी होंगी। दो साल में पूरा पेमेंट जमा करना होगा भास्कर रिपोर्टर ने निवेशक बनकर सनावदिया स्थित आइरिस प्रीमियम लैंडमार्क फेज-2 में प्लॉट खरीदने के लिए डेवलपर से संपर्क किया। बातचीत में कंपनी के मार्केटिंग प्रतिनिधि ने स्वीकारा कि प्रोजेक्ट के लिए रेरा पंजीयन अभी नहीं हुआ है। प्रक्रिया जारी है। हालांकि प्लॉट बुकिंग की जा रही है। खरीदार को 10 प्रतिशत राशि जमा करानी होगी। बैंक लोन उपलब्ध नहीं होने के कारण बाकी किस्तें भी दो साल में नकद जमा करने की बात कही गई। कानूनी सुरक्षा नहीं... रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी प्रोजेक्ट का रेरा पंजीयन नहीं हुआ है और खरीदार केवल कच्ची पर्ची पर भुगतान कर रहा है, तो उसका पैसा जोखिम में है। भविष्य में प्रोजेक्ट अटकने, लेआउट बदलने या मंजूरी नहीं मिलने पर कानूनी सुरक्षा सीमित रह जाती है। इन इलाकों में ज्यादा खेल सूत्रों के अनुसार कनाड़िया, सुपर कॉरिडोर से लगे इलाके और राऊ-महू बायपास के आसपास बड़ी संख्या में ऐसे सौदे किए जा रहे हैं। कम दरों का लालच देकर पैसा जुटाया जा रहा है, जबकि कई प्रोजेक्ट्स पूरी तरह वैधानिक मंजूरियों का इंतजार कर रहे हैं। अभी हमने फेज 2 में कोई प्लॉट नहीं बेच रहे हैं। रेरा अप्रूवल अभी नहीं आया है सिर्फ डेवलपमेंट परमिशन मिली है। -भरत जैन, डायरेक्टर, आइरिस ग्रुप
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