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जहाजों को गुमराह कर असुरक्ष‍ित रास्‍ते पर भेज रही अमेर‍िकी सेना, दो तेल टैंकर में हुए धमाके

जहाजों को गुमराह कर असुरक्ष‍ित रास्‍ते पर भेज रही अमेर‍िकी सेना, दो तेल टैंकर में हुए धमाके

Delhi द‍िल्‍ली। होर्मुज स्‍ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को दावा किया क‍ि अमेर‍िकी सेना ने दो तेल टैंकरों के गुमराह कर गलत रास्‍ते पर भेजा, ज‍िस कारण उन्‍हें धमाकों का सामना करना पड़ा। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि दो तेल टैंकरों को रोका गया है। ये टैंकर असुरक्षित रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। धमाकों के बाद टैंकरों में बड़े स्तर पर आग लग गई थी।ईरान की एक प्रमुख समाचार एजेंसी 'फार्स' न्‍यूज की र‍िपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने इन जहाजों को गलत जानकारी दी, जिस कारण वे खतरनाक रास्ते पर जाने लगे। आईआरजीसी ने बयान में कहा कि 'बच्चों को मारने वाली अमेरिकी सेना' के बहकावे में आकर दोनों तेल टैंकर होर्मुज स्‍ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में मौजूद जोखिम भरे रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद उनमें विस्फोट हुए, जिससे भीषण आग लग गई और उन्हें रुकना पड़ा।समाचार एजेंसी 'फार्स' न्‍यूज की र‍िपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को एक बार फिर चेतावनी दी है कि वे इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरते समय अमेरिकी सेना की दिशा-निर्देशों पर भरोसा न करें और खतरनाक रास्तों से बचें। यह घटना तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है। अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले किए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया है। वहीं ईरान ने जवाब में पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।'फार्स' न्‍यूज के अनुसार, ईरान लगातार कहता रहा है कि होर्मुज स्‍ट्रेट की सुरक्षा करना उसका अधिकार है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के ऊर्जा परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आवाजाही होती है। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में आक्रामक कार्रवाई करता रहेगा, तब तक होर्मुज स्‍ट्रेट बंद रहेगा। बयान में कहा गया, "यह साफ है कि जब तक अमेरिका के हमले जारी रहेंगे, तब तक होर्मुज स्‍ट्रेट बंद रहेगा। इस क्षेत्र से न तो गैस और तेल की एक बूंद बाहर जाएगी और न ही रासायनिक खाद का एक भी बैग निर्यात किया जाएगा।"

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