मौसमी संक्रमण:सर्दी, सिरदर्द और गले में दर्द के साथ इन्फ्लूएंजा-कोविड जैसे लक्षण बढ़े
राजधानी में वायरल संक्रमण का स्वरूप बदलता दिख रहा है। पिछले 10 दिनों में अस्पतालों की ओपीडी में तेज बुखार, गले में दर्द, सूखी खांसी और सांस संबंधी शिकायतों वाले मरीज लगातार बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीजों में इन्फ्लूएंजा, कोविड-19 और एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में फिलहाल कोविड-19 और एच1एन1 की नियमित जांच नहीं हो रही है। ऐसे में मरीजों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। बढ़ते संक्रमण का असर ओपीडी पर भी दिख रहा है। सोमवार को एम्स भोपाल की ओपीडी में 5,684 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें बड़ी संख्या वायरल बुखार और श्वसन संबंधी संक्रमण के मरीजों की रही। हमीदिया अस्पताल की ओपीडी भी करीब तीन हजार मरीजों तक पहुंच गई है। डॉक्टरों के अनुसार पिछले 10 दिनों में ऐसे मरीज लगातार बढ़े हैं। एम्स ओपीडी में 5684 मरीज पहुंचे, तेज बुखार के बाद 2-3 हफ्ते रह सकती है खांसी 103 डिग्री तक आ रहा बुखार : गांधी मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा ने बताया कि इस बार कई मरीजों को अचानक 102 से 103 डिग्री तक बुखार आ रहा है। बुखार उतरने के बाद भी खांसी और गले की खराश दो से तीन हफ्ते तक बनी रहती है। इसे पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। कई मरीज लंबे समय तक कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत भी कर रहे हैं। नाक, गले और फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर : ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. यशवीर जेके के अनुसार संक्रमण सबसे पहले नाक और गले को प्रभावित कर रहा है। मरीजों में गले में तेज दर्द, निगलने में तकलीफ, आवाज बैठना, नाक बंद होना और लगातार सूखी खांसी की शिकायत अधिक मिल रही है। उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी। गंभीर मरीजों को एक्स-रे और सीटी स्कैन की सलाह : रेस्पिरेटरी इंस्टीट्यूट, जीएमसी के डायरेक्टर डॉ. लोकेन्द्र दवे ने बताया कि मरीजों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका पर उन्हें एक्स-रे या सीटी स्कैन की सलाह दी जाती है। कई मामलों में फेफड़ों में संक्रमण भी दिखाई दे रहा है। जुलाई से अक्टूबर तक ऐसे संक्रमण अधिक सक्रिय रहते हैं। तेज बुखार तीन दिन से अधिक रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टरों से संपर्क करें
मौसमी संक्रमण:सर्दी, सिरदर्द और गले में दर्द के साथ इन्फ्लूएंजा-कोविड जैसे लक्षण बढ़े - कॉपी लिंक राजधानी में वायरल संक्रमण का स्वरूप बदलता दिख रहा है। पिछले 10 दिनों में अस्पतालों की ओपीडी में तेज बुखार, गले में दर्द, सूखी खांसी और सांस संबंधी शिकायतों वाले मरीज लगातार बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीजों में इन्फ्लूएंजा, कोविड-19 और एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में फिलहाल कोविड-19 और एच1एन1 की नियमित जांच नहीं हो रही है। ऐसे में मरीजों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। बढ़ते संक्रमण का असर ओपीडी पर भी दिख रहा है। सोमवार को एम्स भोपाल की ओपीडी में 5,684 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें बड़ी संख्या वायरल बुखार और श्वसन संबंधी संक्रमण के मरीजों की रही। हमीदिया अस्पताल की ओपीडी भी करीब तीन हजार मरीजों तक पहुंच गई है। डॉक्टरों के अनुसार पिछले 10 दिनों में ऐसे मरीज लगातार बढ़े हैं। एम्स ओपीडी में 5684 मरीज पहुंचे, तेज बुखार के बाद 2-3 हफ्ते रह सकती है खांसी 103 डिग्री तक आ रहा बुखार : गांधी मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा ने बताया कि इस बार कई मरीजों को अचानक 102 से 103 डिग्री तक बुखार आ रहा है। बुखार उतरने के बाद भी खांसी और गले की खराश दो से तीन हफ्ते तक बनी रहती है। इसे पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। कई मरीज लंबे समय तक कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत भी कर रहे हैं। नाक, गले और फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर : ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. यशवीर जेके के अनुसार संक्रमण सबसे पहले नाक और गले को प्रभावित कर रहा है। मरीजों में गले में तेज दर्द, निगलने में तकलीफ, आवाज बैठना, नाक बंद होना और लगातार सूखी खांसी की शिकायत अधिक मिल रही है। उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी। गंभीर मरीजों को एक्स-रे और सीटी स्कैन की सलाह : रेस्पिरेटरी इंस्टीट्यूट, जीएमसी के डायरेक्टर डॉ. लोकेन्द्र दवे ने बताया कि मरीजों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका पर उन्हें एक्स-रे या सीटी स्कैन की सलाह दी जाती है। कई मामलों में फेफड़ों में संक्रमण भी दिखाई दे रहा है। जुलाई से अक्टूबर तक ऐसे संक्रमण अधिक सक्रिय रहते हैं। तेज बुखार तीन दिन से अधिक रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टरों से संपर्क करें
This is a summary. Read the full article at the original source.
Read full article at bhaskar_hindi
