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पूर्व जन्म में वानरराज बाली कौन थे? दिव्य शक्तियों का क्या था रहस्य, रावण का कैसे तोड़ा घमंड, फिर श्रीराम ने क्यों किया वध

पूर्व जन्म में वानरराज बाली कौन थे? दिव्य शक्तियों का क्या था रहस्य, रावण का कैसे तोड़ा घमंड, फिर श्रीराम ने क्यों किया वध

Ramayana Katha: रामायण में वानरराज बाली का नाम सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में लिया जाता है. इसलिए कहा जाता है कि, उनके सामने आने वाला कोई भी योद्धा अपनी आधी शक्ति स्वयं बाली को दे देता था. यही कारण था कि, रावण जैसा महाबली भी उनके सामने टिक नहीं पाया था. एक समय ऐसा आया जब बाली ने लंकापति को अपनी कांख में दबाकर पूरी पृथ्वी का भ्रमण करा दिया. लेकिन सवाल है कि आखिर, इतना पराक्रमी योद्धा बाली आखिर पिछले जन्म में कौन था? उसे इतनी दिव्य शक्तियां कैसे मिलीं? जब वह इतना बलशाली और शिवभक्त था तो भगवान श्रीराम ने उसका वध क्यों किया? आइए जानते हैं रामायण और पुराणों में वर्णित इस रोचक प्रसंग के बारे में. पिछले जन्म में कौन थे वानरराज बाली? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वानरराज बाली को देवराज इंद्र का पुत्र माना जाता है. कुछ पुराणों और लोक परंपराओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि बाली कोई साधारण वानर नहीं थे, बल्कि देवांश से उत्पन्न हुए थे. इसी कारण उनमें असाधारण बल, तेज और युद्ध कौशल था. हालांकि, वाल्मीकि रामायण में बाली के किसी विशिष्ट पूर्वजन्म का विस्तृत वर्णन नहीं मिलता. बाद की कई कथाओं और लोकमान्यताओं में उनके दिव्य स्वरूप का उल्लेख मिलता है. कैसे मिली थीं दिव्य शक्तियां? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाली को ब्रह्मा से ऐसा वरदान प्राप्त था कि जो भी योद्धा उनसे आमने-सामने युद्ध करता, उसकी आधी शक्ति स्वतः बाली में समा जाती थी. इस वरदान के कारण उन्हें युद्ध में हराना लगभग असंभव माना जाता था. यही वजह थी कि देवता, दानव और असुर तक उनसे भय खाते थे. जब रावण का घमंड हुआ चूर रामायण की एक कथा के अनुसार, एक बार रावण अपने बल के मद में चूर होकर बाली को युद्ध की चुनौती देने किष्किंधा पहुंचा. उस समय वानरराज बाली संध्या वंदन के लिए समुद्र तट पर गए हुए थे. रावण ने पीछे से उन पर आक्रमण करने की कोशिश की, लेकिन बाली ने उसे पलभर में पकड़ लिया और अपनी कांख में दबा लिया. इसके बाद बाली बिना रुके चारों दिशाओं के समुद्रों की परिक्रमा करते रहे. रावण पूरी तरह असहाय होकर उनकी कांख में दबा रहा. अंत में जब बाली ने उसे मुक्त किया, तब रावण ने उनकी शक्ति स्वीकार करते हुए उनसे मित्रता कर ली. फिर श्रीराम ने क्यों किया बाली का वध? इतना शक्तिशाली और पराक्रमी होने के बावजूद बाली से एक गंभीर भूल हुई. उन्होंने अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी रूमा को अपने अधिकार में ले लिया, जिसे धर्म के विरुद्ध माना गया. साथ ही, उन्होंने सुग्रीव का राज्य भी छीन लिया और उसे किष्किंधा से निकाल दिया. जब वनवास के दौरान भगवान श्रीराम की मुलाकात सुग्रीव से हुई, तो उन्होंने उसका साथ देने का वचन दिया. श्रीराम ने बाली को कई बार समझाने का अवसर दिया, लेकिन जब उन्होंने अपने आचरण में परिवर्तन नहीं किया, तब श्रीराम ने सुग्रीव और बाली के युद्ध के दौरान पेड़ की ओट से बाण चलाकर उनका वध किया. श्रीराम ने बाली को क्या दिया उत्तर? मृत्युशैया पर बाली ने श्रीराम से पूछा कि उन्होंने सामने से युद्ध करने के बजाय छिपकर बाण क्यों चलाया. तब श्रीराम ने उत्तर दिया कि एक राजा के रूप में अधर्म का दंड देना उनका कर्तव्य था. उन्होंने कहा कि, छोटे भाई की पत्नी को अपने अधिकार में रखना घोर अधर्म है और ऐसे व्यक्ति को दंड देना राजधर्म के अनुरूप है.

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