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सरकारी विभागों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, प्रशासनिक देरी पर नहीं मिलेगी विलंब माफी

सरकारी विभागों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, प्रशासनिक देरी पर नहीं मिलेगी विलंब माफी

Allahabad High Court : सरकारी विभाग अब प्रशासनिक देरी का हवाला देकर अदालत से विलंब माफी नहीं मांग सकेंगे. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों पर भी समयसीमा का पालन करने की समान जिम्मेदारी है और केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हुई देरी को आधार बनाकर राहत नहीं दी जा सकती.

लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी विभाग मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कराने के लिए केवल नौकरशाही प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही या प्रशासनिक विलंब का हवाला नहीं दे सकते. अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्षकार समान स्तर पर हैं तथा विलंब माफी के लिए सरकारी विभागों को ठोस और वास्तविक कारण बताने होंगे. 13 जुलाई को सुरक्षित रखा गया यह फैसला 29 जुलाई को सुनाया गया, जिसे गुरुवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया. मेरठ वाली मुस्कान भूल जाओगे, जब कानपुर की बहू का सुन लेंगे कारनामा, रूम फ्रेशनर से धीमे-धीमे ले रही थी पति की जान न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रेल मंत्रालय की उस विशेष अपील को खारिज करते हुए की, जो लखनऊ की वाणिज्यिक अदालत के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी. खंडपीठ ने वाणिज्यिक अदालत के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत आपत्तियां दाखिल करने में हुई 28 दिन की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया गया था. मामला मेसर्स गैलेंट इस्पात लिमिटेड और रेल मंत्रालय के बीच रेलवे साइडिंग के लिए आवंटित भूमि के पट्टा किराये से संबंधित विवाद का था. दिसंबर 2023 में एकल मध्यस्थ ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को पट्टा किराये में संशोधन करने तथा लगभग 1.79 करोड़ रुपये आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया था.

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