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ट्रंप के टैरिफ फैसले से कनाडा को झटका, भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा

ट्रंप के टैरिफ फैसले से कनाडा को झटका, भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा

कनाडा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका द्वारा अपने पड़ोसी देश कनाडा पर 50 फीसदी...

कनाडा पर टैरिफ की मार, वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ सकती है हिस्सेदारी कनाडा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका द्वारा अपने पड़ोसी देश कनाडा पर 50 फीसदी का भारी-भरकम टैरिफ लगाए जाने से दोनों देशों के दशकों पुराने व्यापारिक संबंधों में बड़ा झटका लगा है। सालाना करीब 800 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार में से कनाडा के लगभग 20 अरब डॉलर के निर्यात पर इसका सीधा बुरा असर पड़ेगा। हालांकि, अमेरिका-कनाडा के बीच पनपे इस व्यापार युद्ध से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में नई राहें खुलती दिख रही हैं। इन प्रमुख क्षेत्रों में भारत के लिए बने नए अवसर कनाडाई उत्पादों पर 50% सीमा शुल्क लगने से अमेरिका में वहां के उत्पाद महंगे हो जाएंगे। ऐसे में अमेरिकी खरीदार भारत की ओर रुख कर सकते हैं। टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स में कनाडाई फैब्रिक की जगह भारतीय कपड़ों की मांग बढ़ सकती है। इसके अलावा रसायन, इंजीनियरिंग उपकरण, मशीन पार्ट्स, लकड़ी का फर्नीचर और प्रोसेस्ड फूड जैसे कृषि उत्पादों के निर्यात में भारतीय कंपनियां कनाडाई निर्यातकों की जगह ले सकती हैं। संभावित फायदे के बीच 100% टैरिफ का खतरा भारतीय कारोबारियों के लिए यह अवसर सुनहरा जरूर दिखता है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी अनिश्चितता और जोखिम भी जुड़ा हुआ है। अमेरिका-भारत व्यापार वार्ताओं के बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों की ओर से भारत पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की चेतावनी भी सामने आई है। यदि अमेरिकी प्रशासन भारत के खिलाफ ऐसा सख्त कदम उठाता है, तो कनाडा पर लगे टैरिफ से मिलने वाले सभी संभावित आर्थिक लाभ धरे के धरे रह जाएंगे। सावधानी बरतने और सतर्क रहने की जरूरत बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निर्यातकों को इस स्थिति में जल्दबाजी या अत्यधिक उत्साह दिखाने से बचना चाहिए। जब तक भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक अमेरिकी बाजार से पूरी तरह फायदा उठाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। ऐसे में नीतिगत स्पष्टता आने तक भारतीय उद्योग जगत को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी जा रही है।

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