राज्यसभा का बदला नंबरगेम, TMC की टूट के बाद NDA की बढ़ी ताकत; दो तिहाई कितना दूर

मॉनसून सत्र के पहले राज्यसभा में केंद्र में सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस का संख्याबल बढ़ने के आसार हैं। दरअसल, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 4 सांसदों ने पार्टी छोड़ी है और इनमें से 3 दोबारा भाजपा के टिकट पर राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे हैं।
संसद के 20 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र से पहले राज्यसभा का अंकगणित तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से पार्टी के राज्यसभा सदस्यों के लगातार इस्तीफों का असर दोनों सदनों में हुआ है। अब तृणमूल की एक और नेता रुक्मिणी मलिक (कोयल मलिक) ने भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। तृणमूल छोड़ने वाले तीन सांसद गत नौ जुलाई को भाजपा में शामिल हो गए थे और पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। विधानसभा में भाजपा के संख्या बल को देखते हुए उनकी जीत तय मानी जा रही है। इस बीच कोयल की भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने भी उनके संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।एजेंडों पर भारी न पड़े विपक्षभाजपा के सहयोगी दलों में टीडीपी, एआईएडीएमके, जदयू और एनसीपी के चार-चार, शिवसेना और यूपीपीएल के दो-दो और आरपीआई(ए), एजीपी, एमएनएफ, एनपीपी, आरएलएम और जनसेना पार्टी के एक-एक सदस्य हैं। इन सहयोगी दलों के 26 सांसदों को जोड़ने पर एनडीए का कुल आंकड़ा 153 तक पहुंच जाता है। यह राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के 164 के आंकड़े से केवल 11 सीट कम है।सरकार की पूरी रणनीति यही है कि दोनों सदनों में वह राहत की स्थिति में रहे, जिससे उसके राजनीतिक और विधायी एजेंडों पर विपक्ष भारी न पड़े। आने वाले दिनों में राज्यसभा के कुछ और सदस्यों के इस्तीफे हों तो अचरज नहीं होना चाहिए। सरकार ने संसदीय रणनीति में पिछले सत्र के दौरान हुई चूक की भरपाई का पूरा प्लान बनाया है। विपक्षी सांसदों के इस्तीफे उसी रणनीति का हिस्सा हैं।तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य व अभिनेत्री कोयल मलिक उर्फ रुक्मिणी ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद इस्तीफा देने वाली कोयल तृणमूल की चौथी सांसद हैं। महज 105 दिन सांसद रहीं कोयलकोयल संभवतः सबसे कम दिन राज्यसभा सदस्य रहने वाली नेता बन गई हैं। वह इसी साल तीन अप्रैल को राज्यसभा सदस्य चुनी गई थीं। इस तरह वह सिर्फ 105 दिन सांसद रहीं। इस दौरान उन्होंने एक दिन भी सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।इस्तीफे के बाद भूपेंद्र यादव से मुलाकाततृणमूल कांग्रेस के कुछ अन्य बागी नेताओं की तरह ही कोयल ने भी इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इससे उनके भी भाजपा या बागी सांसदों के गुट में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्यसभा में भाजपा का संख्याबल 117 संभवइन घटनाक्रमों का सबसे बड़ा असर राज्यसभा की संख्या पर पड़ने वाला है। 24 जुलाई के बाद भाजपा का राज्यसभा में संख्याबल बढ़कर 117 होने की संभावना है, जो पार्टी के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक होगा। साधारण बहुमत के लिए आवश्यक 123 के आंकड़े से भाजपा तब केवल छह सीट दूर रह जाएगी। यदि सात मनोनीत सदस्यों और तीन निर्दलीय सांसद परिमल नाथवानी, दिलीप रे और कार्तिकेय शर्मा का समर्थन जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 127 तक पहुंच सकती है, जो साधारण बहुमत से अधिक है।लोकसभा में ममता के पास सिर्फ आठ सांसदलोकसभा में भी ममता बनर्जी के सांसदों की संख्या घटकर केवल आठ रह गई है, क्योंकि सुदीप बंदोपाध्याय और काकली घोष दस्तीदार जैसे 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर एनसीपीआई्र का गठन कर लिया है। एनसीपीआई ने एनडीए को समर्थन दे दिया है। ऐसी अटकलें हैं कि पार्टी के कुछ और नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं। उन्होंने कहा है कि जो लोग केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस के दबाव में हैं वे खुशी-खुशी जहां चाहें जा सकते हैं। एक कलाकार के रूप में कोयल का मैं सम्मान करती हूं और इस्तीफा सौंपने के लिए उनका धन्यवाद करती हूं।
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