Turning Point: टीम इंडिया की मुट्ठी में था मैच, 3 ओवर में बदल गया सबकुछ, गेंदबाजों ने ये क्या कर दिया

IND vs ENG Turning Point: भारतीय टीम मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का तीसरा और निर्णायक वनडे जीत जाती. लेकिन डेथ ओवरों ने उसके गेंदबाजों ने इतने रन लुटा दिए कि भारत की हार पक्की हो गई. तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़, प्रसिद्ध कृष्णा और प्रिंस यादव ने मैच के अंतिम 3 ओवरों में जमकर रन खर्च किए.
नई दिल्ली. जब मैच का फैसला सिर्फ 18 गेंदों में तय हो जाए, तो क्रिकेट की अनिश्चितता और क्रूरता दोनों एक साथ समझ आती है. इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में टीम इंडिया जीत के बेहद करीब थी, लेकिन आखिरी के तीन ओवरों ने पूरा पासा पलट कर रख दिया. 45वें ओवर तक मैच भारतीय मुट्ठी में था, लेकिन इसके बाद मैदान पर जो हुआ, उसने करोड़ों फैंस का दिल तोड़ दिया. भारत के युवा और अनुभवहीन गेंदबाजी आक्रमण प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव और गुरनूर बराड़ की तिकड़ी ने आखिरी 3 ओवरों में 62 रन लुटा दिए. यही वह टर्निंग पॉइंट था जिसने इंग्लैंड को 27 रनों की अकल्पनीय जीत दिला दी और भारत ने मुकाबला ही नहीं, बल्कि पूरी वनडे सीरीज भी गंवा दी. मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल के चेहरे पर निराशा साफ थी, और उन्होंने हार का पूरा ठीकरा डेथ ओवरों में दिशाहीन हुई गेंदबाजी पर फोड़ा. मैच में एक समय ऐसा था जब भारतीय टीम पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर थी. इंग्लैंड के बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे और भारतीय स्पिनर्स ने बीच के ओवरों में शिकंजा कस रखा था. कप्तान शुभमन गिल ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस बात को स्वीकार किया. गिल ने कहा, ‘हम 45वें ओवर तक पूरी तरह से मैच में बने हुए थे. हमारी योजना के मुताबिक सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन आखिरी तीन ओवरों ने हमसे मैच छीन लिया.’ दरअसल, भारतीय टीम की रणनीति बिल्कुल साफ थी कि मैच को आखिरी ओवरों तक खींच कर रखा जाए और विपक्षी टीम को 300 के अंदर रोका जाए. 40वें ओवर के बाद जब विकेट धीमा हो गया था, तब गेंदबाजों से सूझबूझ की उम्मीद थी, लेकिन युवा पेस अटैक दबाव को झेलने में पूरी तरह नाकाम रहा. भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे का टर्निंग पॉइंट. रोहित शर्मा ने रचा इतिहास... लॉर्ड्स में शतक जड़ने वाले पहले भारतीय बने, सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोड़ा जो रूट का वर्ल्ड रिकॉर्ड, बिना आउट हुए सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व कीर्तिमान किया अपने नाम, पोंटिंग-बटलर का रिकॉर्ड धराशायी प्रसिद्ध, प्रिंस और गुरनूर ने 3 ओवर में 62 रन लुटा दिए मैच का असली ड्रामा और भारतीय टीम की हार की पटकथा 46वें ओवर से लिखी जानी शुरू हुई. क्रीज पर सेट हो चुके इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय तेज गेंदबाजों की अनुभवहीनता का पूरा फायदा उठाया. चोट के बाद वापसी कर रहे अनुभवी प्रसिद्ध कृष्णा से उम्मीद थी कि वह डेथ ओवरों में यॉर्कर और स्लोअर गेंदे डालेंगे, लेकिन उनकी गेंदों में न तो धार दिखी और न ही सटीक दिशा. युवा प्रिंस यादव ने शुरुआत में अच्छी गेंदबाजी की थी, लेकिन आखिरी ओवरों में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उन पर काउंटर-अटैक किया, जिसका जवाब प्रिंस के पास नहीं था. गुरनूर बराड़ की दिशाहीन गेंदबाजी गुरनूर ने अपनी गति से प्रभावित तो किया, लेकिन जब फुल टॉस और लेंथ गेंदों पर बाउंड्रीज लगने लगीं, तो वह पूरी तरह नियंत्रण खो बैठे. इन तीनों गेंदबाजों ने मिलकर आखिरी 18 गेंदों में 62 रन दे डाले. फुल टॉस, वाइड और लेंथ गेंदों की इस खैरात ने इंग्लैंड को एक ऐसे स्कोर तक पहुंचा दिया, जिसने भारतीय बल्लेबाजों पर मानसिक दबाव बना दिया. रोहित शर्मा का जुझारू शतक गया बेकार इस बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के लिए रन बनाना आसान नहीं था, क्योंकि विकेट लगातार धीमा हो रहा था. ऐसे मुश्किल समय में अनुभवी रोहित शर्मा ने एक बार फिर मोर्चा संभाला. रोहित ने धीमी और टर्निंग पिच पर एक बेहतरीन शतकीय पारी खेली और यह साबित कर दिया कि उन्हें क्यों दुनिया का सबसे खतरनाक वनडे बल्लेबाज माना जाता है. कप्तान गिल ने रोहित और विराट कोहली की तारीफ करते हुए कहा, ‘रोहित भाई ने शानदार बल्लेबाजी की. इस विकेट पर स्ट्रोक्स लगाना बिल्कुल आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने जिस तरह से पारी को संभाला, वह लाजवाब था. रोहित और विराट ने इतने सालों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में खुद को साबित किया है.’ हालांकि, रोहित के इस शानदार शतक पर गेंदबाजों की उस 18 गेंदों की नाकामी ने पानी फेर दिया. रन चेज की रणनीति और कहां रह गई कमी? शुभमन गिल ने भारतीय टीम की रन चेज की रणनीति पर भी बात की. उन्होंने बताया कि पावरप्ले के बाद भारतीय टीम 6 से 6.5 रन प्रति ओवर की दर से आगे बढ़ रही थी. टीम का प्लान था कि आखिरी 10 ओवरों में 10 रन प्रति ओवर की रन रेट से रन बनाकर मैच को निकाल लिया जाएगा, बशर्ते हाथ में विकेट बचे हों. लेकिन जब डेथ ओवरों में गेंदबाजों ने 62 रन अतिरिक्त लुटा दिए, तो आवश्यक रन रेट अचानक आसमान छूने लगा. धीमी होती पिच पर आखिरी ओवरों में हर गेंद पर बाउंड्री लगाना नामुमकिन था, और यही भारत की हार की सबसे बड़ी वजह बनी.
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